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मुंगेर की बेटी ने बढ़ाया बिहार का मान, गोल्फ के दम पर आयकर विभाग में पाई बड़ी जिम्मेदारी

Bihar Golfer Srishti Rani Success Story: मुंगेर के जमालपुर की गोल्फर सृष्टि रानी ने महज 6 साल की उम्र में गोल्फ खेलना शुरू किया था. 14 साल की मेहनत और शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्होंने स्पोर्ट्स कोटे से आयकर विभाग में नौकरी हासिल की है.

मुंगेर की बेटी ने बढ़ाया बिहार का मान, गोल्फ के दम पर आयकर विभाग में पाई बड़ी जिम्मेदारी
Bihar Golfer Srishti Rani Success Story
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हौसले बुलंद हों तो सफलता की राह खुद-ब-खुद बन जाती है. इस कहावत को मुंगेर जिले के जमालपुर की बेटी सृष्टि रानी ने चरितार्थ कर दिखाया है. गोल्फ के मैदान में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाली सृष्टि ने अब खेल कोटे के तहत आयकर विभाग में नौकरी हासिल कर एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम की है. उनकी इस सफलता से जमालपुर सहित पूरे मुंगेर जिले में खुशी की लहर है.

रेलवे कारखाना में कार्यरत रेलकर्मी संजय रजक और किरण कुमार की पुत्री सृष्टि की गोल्फ से जुड़ने की कहानी भी बेहद प्रेरणादायक है. महज छह साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता को गोल्फ खेलते देखा था. पिता को खेलते देखकर उनके मन में भी इस खेल के प्रति रुचि जगी. इसके बाद पिता के साथ गोल्फ मैदान जाने का सिलसिला शुरू हुआ, जो धीरे-धीरे उनके जुनून में बदल गया.

सृष्टि के नाम कई गोल्ड और सिल्वर मेडल

लगातार 14 वर्षों तक कठिन अभ्यास, अनुशासन और मेहनत के बल पर सृष्टि ने गोल्फ में अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर, रांची, पटना और कोलकाता में आयोजित विभिन्न गोल्फ प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर उन्होंने कई गोल्ड मेडल और सिल्वर मेडल हासिल किए. अपनी उपलब्धियों से उन्होंने जमालपुर गोल्फ क्लब का गौरव भी बढ़ाया.

माता-पिता और परिवार को दिया सफलता का श्रेय

नोट्रे डेम अकादमी की पूर्व छात्रा सृष्टि अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता की प्रेरणा और परिवार के सहयोग को देती हैं. खेल के दम पर सरकारी नौकरी हासिल करने वाली सृष्टि की उपलब्धि उन बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत है, जो खेल को अपना करियर बनाना चाहती हैं. उनकी सफलता पर रेलवे के अधिकारियों, कर्मचारियों और खेल प्रेमियों ने बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की.

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परिवार के साथ सृष्टि की फोटो: Photo Credit: NDTV

उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि अपनी सफलता का श्रेय पिता संजय रजक को दिया और उन्होंने कहा कि 'मेरे पापा ने न सिर्फ मुझे गोल्फ के खेल से परिचित कराया, बल्कि बेहतर  ट्रेनिंग की व्यवस्था कर इस खेल में आगे बढ़ने के लिए हमेशा प्रोत्साहित किया. उनके मार्गदर्शन और सहयोग का ही परिणाम रहा कि मुझे विदेशों तक जाकर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला. आज मैंने जो मुकाम हासिल किया है, वह मेरे पापा की मेहनत, प्रेरणा और परिवार के सहयोग का नतीजा है. वहीं उन्होंने बताया कि एक सप्ताह पूर्व ही उनका सिलेक्शन हुआ है.

रिपोर्ट: मिथुन कुमार मुंगेर 

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