भारत ने बिलासपुर-मनाली-लेह रेलवे लाइन ब्रॉडगेज बिछाने की तैयारी शुरू कर दी है. 1.31 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट में लेह में दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे स्टेशन भी शामिल होगा.
इस परियोजना की डीपीआर और सर्वेक्षण हो चुका है. 489 किलोमीटर की इस ब्रॉड गेज रेल लाइन 55 फीसदी हिस्सा यानी करीब 270 किलोमीटर लंबी सुरंग से होकर गुजरेगा. इसमें 62 सुरंगें बनाई जाएंगी. पहाड़ियों के बीच गहरी घाटी और नदियों के बीच 114 से 116 बड़े पुल और छोटे पुल निर्मित होंगे. हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर, सुंदरनगर, मंडी, मनाली से लेह लद्दाख के सिस्सू, दारचा, केलांग, सरचू, पांग, रुमत्से, उपशी, खारू से लेह तक ये रेल लाइन जाएगी.
दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे स्टेशन
बिलासपुर-लेह रेल लाइन की सबसे बड़ी खासियत तांगलांग ला दर्रे के नीचे बनने वाला तेंगला रेलवे स्टेशन है. तांगलांग ला पहले से ही मनाली-लेह हाईवे पर एक प्रमुख ऊंचा पहाड़ी दर्रा है. यह रेलवे स्टेशन समुद्र तल से करीब 5359 मीटर (17245 से 17582 फीट) की ऊंचाई पर होगा. अभी दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे स्टेशन चीन में है. ये तिब्बत की किंघई-तिब्बत रेलवे पर तांगगुला स्टेशन है, जो 5068 मीटर की ऊंचाई पर है. देश का तेंगला स्टेशन 188 मीटर ऊंचाई पर होगा.
केलांग में भारत का पहला अंडरग्राउंड रेलवे स्टेशन
हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले के केलांग में भारत का पहला ऐसा रेलवे स्टेशन बनेगा, जो पहाड़ की सुरंग के अंदर होगा. यह रेलवे स्टेशन समुद्र तल से करीब 3 हजार मीटर की ऊंचाई पर होगा.भारी बर्फबारी और हिमस्खलन में भी ट्रेनों का संचालन पूरी तरह सुरक्षित रहेगा.

Bilaspur Manali Leh railway line
हवाई जहाज जैसे प्रेशर वाला कोच
भूगर्भीय विशेषज्ञों की मानें तो 17 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर हवा का दबाव और ऑक्सीजन लेवल सामान्य से आधा हो जाता है. सैनिकों और रेल यात्रियों को अधिक ऊंचाई पर होने वाली दिक्कत (सांस लेने में परेशानी) और भारी ठंड (माइनस 30 से 40 डिग्री) से बचाने के लिए इन ट्रेनों में विमानों जैसे प्रेशराइज्ड और हीटेड केबिन और कोच होंगे. खास ऑक्सीजन मास्क की व्यवस्था भी होगी.
चीन बॉर्डर तक रणनीतिक महत्व की परियोजना
रक्षा मंत्रालय ने इसे रणनीतिक महत्व वाली परियोजना का दर्जा किया है. ठंड में भारी बर्फबारी के दौरान लद्दाख का रोड संपर्क देश से कट जाता है. यह रेलवे लाइन जवानों के साथ भारी हथियारों, तोप-टैंक आदि को साल के 12 महीने सीमा तक बिना परेशानी के चुनौती पूरा करेगा.दिल्ली से लेह सड़क से जाने में 36 से 40 घंटे का समय लगता है, जो रेल लाइन चालू होने 20 से 22 घंटे रह जाएगा.
बिलासपुर-लेह रेलवे लाइन का फायदा क्या है?
चीन की वास्तविक नियंत्रण रेखा तक सामरिक आपूर्ति के अलावा लद्दाख और हिमाचल प्रदेश में पर्यटन के लिए वरदान बनेगा.बागवानी और कृषि उत्पादकों को भी बढ़ावा मिलेगा. इस कॉरिडोर के पहले चरण में भानुपाली-बिलासपुर-बेरी नई रेल लाइन (63 किमी) पर काम चल रहा है.
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बिलासपुर-लेह रेलवे लाइन क्यों अहम है?
देश के अन्य इलाकों से लेह पहुंचने में सड़क और हवाई यात्रा ही मुख्य साधन हैं. मनाली-लेह हाईवे एक अहम रास्ता है, लेकिन ज्यादा ऊंचाई वाले इलाके में और सर्दियों के महीनों में आवाजाही बंद हो जाती है. रेलवे कनेक्शन मिलने से यात्रियों और माल ढुलाई के लिए परिवहन का ठोस विकल्प बनेगा. हिमाचल प्रदेश में रेलवे कनेक्टिविटी की चुनौती भानुपाली-बिलासपुर-बेरी रेलवे परियोजना की तरह ही भूमि अधिग्रहण की हैं. इस 63 किलोमीटर लंबी लाइन में रेल कनेक्टिविटी बेहतर बनाने का प्रयास हो रहा है.
क्या बिलासपुर-मनाली-लेह रेलवे परियोजना को मंजूरी मिल गई?
सर्वे और डीपीआर के बावजूद बिलासपुर-मनाली-लेह रेलवे लाइन अभी प्रारंभिक चरण में ही है.1.31 लाख करोड़ का भारी निवेश और हिमालयी हालातों को देखते हुए लेह तक के सेक्शन के लिए कैबिनेट की आखिरी मंजूरी का इंतजार हो रहा है.
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