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मनु फ्रांसिस-प्रिंस नोबल को सेलिंग में मेडल:मछुआरे का बेटा, बाढ़ में गई पिता की जान, अब एशियन गेम्स में सिल्वर जीतकर रचा इतिहास

गुरुवार को एशियाई खेलों की सेलिंग प्रतियोगिता में पुरुषों की स्किफ़ ओपनिंग रेस 9 में मनु फ्रांसिस और प्रिंस कुरिसिंकल नोबल की भारतीय जोड़ी ने सिल्वर मेडल जीता.

मनु फ्रांसिस-प्रिंस नोबल को सेलिंग में मेडल:मछुआरे का बेटा, बाढ़ में गई पिता की जान, अब एशियन गेम्स में सिल्वर जीतकर रचा इतिहास

गुरुवार को एशियाई खेलों की सेलिंग प्रतियोगिता में पुरुषों की स्किफ़ ओपनिंग रेस 9 में भारत की मनु फ्रांसिस और प्रिंस कुरिसिंकल नोबल की जोड़ी ने सिल्वर मेडल जीता. एर्नाकुलम के रहने वाले और आपस में चचेरे भाई, 31 साल के फ्रांसिस और 30 साल के नोबल ने नौ रेस के बाद कुल 23 पॉइंट हासिल किए और चीन के बाद दूसरे स्थान पर रहे. चीन ने प्रतियोगिता में कुल 16 पॉइंट बनाए. इस प्रतियोगिता में सबसे कम कुल स्कोर वाली टीम ही रेगाटा (नौका दौड़) जीतती है. चीनी टीम में वेन ज़ाइडिंग और लियू तियान शामिल थे.

पुरुषों की स्किफ़ सेलिंग में पॉइंट हर रेस में फिनिशिंग पोज़िशन के आधार पर तय किए जाते हैं और पहले स्थान पर आने पर कुल स्कोर में एक पॉइंट जुड़ता है. भारतीय जोड़ी ने प्रतियोगिता के दौरान रेस 3 जीती और रेस 1, 5 और 9 में दूसरा स्थान हासिल किया. वहीं, चीन चार रेस जीतकर सबसे अच्छी स्थिति वाली टीम बनी. स्किफ़ छोटी और हल्की नावें होती हैं.

केरल में 2018 की भयानक बाढ़ में जान गंवाने वाले एक मछुआरे के बेटे नोबल ने कहा कि अपने पहले एशियाई खेलों में मेडल जीतना एक खास एहसास था. फाइनल के बाद नोबल ने कहा,"ये हमारे पहले एशियाई खेल थे और मेडल जीतना बहुत खास है. मुकाबला कड़ा था और हमने किसी तरह सिल्वर मेडल जीता."

दोनों मुंबई में आर्मी यॉटिंग नोड में ट्रेनिंग करते हैं. फ्रांसिस ने कहा,"असल में यह बहुत मुश्किल था. हवा तेज चल रही थी. हम तेज हवा वाले हालात में बहुत सहज नहीं होते. लेकिन हम डटे रहे और किसी तरह सिल्वर मेडल जीत लिया." "हल्की हवा वाले हालात में हम काफी अच्छे हैं. हम भारत में ट्रेनिंग करते हैं और भारत में लगभग हर बार हल्की हवा ही होती है."

फ्रांसिस के लिए यह मिली-जुली भावना थी क्योंकि उन्हें लगा कि वे गोल्ड मेडल जीत सकते थे. उन्होंने कहा,"हम इसके बारे में बहुत ज़्यादा नहीं सोच रहे हैं. खुश भी हैं और उतने खुश भी नहीं. क्योंकि हम गोल्ड मेडल जीत सकते थे." "शुरू में, हमें पता नहीं था कि हम सिल्वर मेडल की स्थिति में हैं. हमें लगा कि हम ब्रॉन्ज़ मेडल के लिए मुकाबला कर रहे हैं, इसलिए यह किस्मत की बात थी. ऐसी तेज हवा वाले हालात में हमारी तकनीक उतनी अच्छी नहीं है. पानी में बहुत हलचल थी. लेकिन आखिरी रेस में नाव बहुत तेज़ी से चल रही थी. इसलिए हम उससे खुश थे." "लेकिन हमें तेज हवा वाले हालात में (सेलिंग करने पर) और काम करने की ज़रूरत है."

अपनी केमिस्ट्री के बारे में फ्रांसिस ने कहा,"हम कज़िन हैं, हम साथ ही बड़े हुए हैं. हम एक-दूसरे को समझते हैं और इससे तालमेल बिठाना आसान हो जाता है." गुरुवार की प्रतियोगिता में ब्रॉन्ज़ मेडल हांगकांग, चीन के अकीरा ल्यूक सकाई और रसेल आयल्सवर्थ ने जीता, जिनका स्कोर 24 रहा.

स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया की ओर से शेयर की गई जानकारी के मुताबिक, नोबल और फ्रांसिस को कम उम्र में ही सेलिंग में दिलचस्पी हो गई थी और उन्होंने भोपाल के नेशनल सेलिंग स्कूल और केरल के मुज़िरिस यॉटिंग क्लब में ट्रेनिंग ली थी. इससे पहले उन्होंने मिलकर एशियन सेलिंग चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता था.

महिलाओं की स्किफ़ प्रतियोगिता में, हर्षिता तोमर और शीतल वर्मा की भारतीय जोड़ी 26 पॉइंट के साथ चौथे और आखिरी स्थान पर रही. इस इवेंट में जापान ने 11 पॉइंट के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि हांगकांग, चीन (16) और चीन (23) उसके बाद रहे. भारतीय जोड़ी नौ में से कोई भी रेस नहीं जीत सकी, लेकिन रेस 3 और 4 में दूसरे स्थान पर रही.

सेलिंग में कम-पॉइंट स्कोरिंग सिस्टम का पालन किया जाता है, जिसमें रेस जीतने वाले को एक पॉइंट, दूसरे स्थान पर रहने वाली नाव को दो पॉइंट्स और इसी तरह आगे पॉइंट्स मिलते हैं. सबसे कम कुल स्कोर वाला विजेता बनता है, और तय संख्या में रेस के बाद सबसे खराब नतीजे को हटा दिया जाता है. स्किफ छोटी और हल्की नावें होती हैं.

आइची-नागोया में मिला मेडल पुरुषों के स्किफ में भारत का पहला एशियाई खेल सिल्वर मेडल था और इस इवेंट में देश का दूसरा मेडल था. वरुण ठक्कर और केसी गणपति ने जकार्ता 2018 में पुरुषों के 49er इवेंट में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता था. सेलिंग को पहली बार बैंकॉक 1970 में एशियाई खेलों के प्रोग्राम में शामिल किया गया था. मनु और प्रिंस का सिल्वर मेडल, एशियाई खेलों में भारत का 24वां सेलिंग मेडल भी था. हांगझोऊ 2023 में भारत ने तीन मेडल जीते थे.

भारत ने आइची-नागोया 2026 में 10 सदस्यों वाली सेलिंग टीम उतारी है. इससे पहले गुरुवार को, हर्षिता तोमर और शीतल वर्मा महिलाओं के स्किफ़ इवेंट में चौथे स्थान पर रहीं और बहुत कम अंतर से एक और मेडल जीतने से चूक गईं. यह भारतीय जोड़ी हांगझोऊ 2023 में भी इसी इवेंट में चौथे स्थान पर रही थी. सेलिंग प्रतियोगिता 3 अक्टूबर को खत्म होने वाली है.

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