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एशियन गेम्स 2026: किस खेल में भारत ने जीते सबसे ज्यादा मेडल

एथलेटिक्स के 24, शूटिंग के 15 और तीरंदाजी के 9 पदक. जानिए एशियाड 2026 में भारत ने किस खेल में कितने मेडल जीते और कौन बना सबसे बड़ा पदक बैंक.

एशियन गेम्स 2026: किस खेल में भारत ने जीते सबसे ज्यादा मेडल
एशियन गेम्स 2026 किस खेल में भारत ने जीते सबसे ज्यादा मेडल

भारत ने आइची-नागोया में हुए एशियाई खेल 2026 में 85 मेडल जीते - 21 गोल्ड, 27 सिल्वर और 37 ब्रॉन्ज़. इस अभियान में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां, रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन और लंबे समय से चले आ रहे मेडल का सूखा भी खत्म हुआ. एशियाई खेलों में भारत की यह दूसरी सबसे बड़ी मेडल जीत थी. इससे पहले हांगझोऊ 2023 में भारतीय दल ने रिकॉर्ड 106 मेडल जीते थे, जिनमें 28 गोल्ड शामिल थे. एशियाई खेल 2026 की मेडल तालिका में भारत चौथे स्थान पर रहा, जबकि चीन, जापान और दक्षिण कोरिया उससे आगे रहे. भारत और पांचवें स्थान पर रहे उज़्बेकिस्तान, दोनों ने 21-21 गोल्ड मेडल जीते, लेकिन सिल्वर मेडल की संख्या बेहतर होने के कारण भारत उनसे ऊपर रहा.

आइची नागोया में भारत को सबसे अधिक सफलता तीरंदाजी में मिला, जिसमें भारतीय दल ने नौ मेडल जीते, जिनमें पांच गोल्ड शामिल थे, जो हांगझोऊ में बनाए गए रिकॉर्ड के बराबर है. भारत ने तीनों कंपाउंड टीम इवेंट के खिताब जीते, जबकि चिकिता तनिपार्थी और साहिल जाधव की मिक्स्ड टीम की जीत ने LA 2028 ओलंपिक कोटा भी पक्का किया. रिकर्व में, भारत ने सभी पांच इवेंट में मेडल जीते और इस खेल में अपना अब तक का सबसे अच्छा एशियाई खेल अभियान पूरा किया. कुमकुम मोहोद ने महिलाओं के व्यक्तिगत इवेंट में गोल्ड जीता और एक और ओलंपिक 2028 कोटा हासिल किया.

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गोल्फ कोर्स पर भी इतिहास रचा गया. प्रणवी उर्स एशियाई खेलों में व्यक्तिगत गोल्फ गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं और इस खेल में देश के 24 साल के खिताबी सूखे को खत्म किया. इसके बाद उन्होंने अदिति अशोक और दीक्षा डागर के साथ मिलकर महिलाओं के टीम इवेंट में सिल्वर मेडल जीता - यह भी भारत के लिए एक और पहली उपलब्धि थी.

एथलेटिक्स (24 मेडल: 1 गोल्ड, 9 सिल्वर और 14 ब्रॉन्ज़)

एथलेटिक्स में भारत को सबसे ज़्यादा 24 मेडल मिले, भले ही इसमें सिर्फ़ एक गोल्ड मेडल ही आया. यह गोल्ड मेडल आखिरी दिन महिलाओं की 4x400 मीटर रिले रेस में रोमांचक अंदाज में मिला. विथ्या रामराज इस टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करने वालों में से एक थीं, उन्होंने महिलाओं की 400 मीटर बाधा दौड़ में पीटी उषा का 42 साल पुराना नेशनल रिकॉर्ड तोड़ा और साथ ही महिलाओं और मिक्स्ड 4x400 मीटर रिले में भी मेडल जीते. गुलवीर सिंह ने भी बेहतरीन प्रदर्शन किया. उन्होंने 10000 मीटर और 1500 मीटर दोनों में सिल्वर मेडल जीता और फिर 5000 मीटर में ब्रॉन्ज़ मेडल भी हासिल किया. बरनिका इलांगोवन का ब्रॉन्ज़ मेडल एशियाई खेलों में भारत का पहला पोल वॉल्ट मेडल था, जबकि सावन बरवाल ने नेशनल रिकॉर्ड के साथ मैराथन में सिल्वर मेडल जीता.

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शूटिंग (15 मेडल: 3 गोल्ड, 8 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज़)

भारत के निशानेबाजों ने भी यादगार पल बनाए. सुरुचि सिंह और कमलजीत ने 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम इवेंट में एशियाई रिकॉर्ड के साथ भारत का पहला एशियाई खेल गोल्ड मेडल जीता. वहीं, नीरू ढांडा एशियाई खेलों में शॉटगन गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं और महिलाओं का ट्रैप खिताब एक और एशियाई रिकॉर्ड के साथ अपने नाम किया. बाद में नीरू ने कायन चेनाई के साथ मिलकर भारत के लिए मिक्स्ड टीम ट्रैप इवेंट में पहला मेडल जीता - जो कि गोल्ड था. भले ही शूटिंग में भारत का अच्छा प्रदर्शन शूटिंग में ना आया हो, लेकिन उसने इस इवेंट में कुल 15 मेडल जीते.

आर्चरी (9 मेडल: 5 गोल्ड, 2 सिल्वर, 2 ब्रॉन्ज़)

भारतीय तीरंदाजों ने यादगार प्रदर्शन करते हुए पांच गोल्ड मेडल जीते, जो इन खेलों में किसी भी खेल में जीते गए सबसे ज़्यादा गोल्ड मेडल थे. 17 साल की कुमकुम मोहोद इस अभियान का मुख्य चेहरा बनकर उभरीं और उन्होंने व्यक्तिगत और मिक्स्ड टीम रिकर्व में गोल्ड मेडल जीते. कुमकुम की जीत ऐतिहासिक भी थी, क्योंकि वह एशियाई खेलों में रिकर्व आर्चरी में व्यक्तिगत गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय बनीं.

बॉक्सिंग (6 मेडल: 3 गोल्ड, 3 ब्रॉन्ज़)

भारतीय मुक्केबाजों ने गोल्ड मेडल की शानदार हैट्रिक लगाई, जिसमें लवलीना बोरगोहेन, परवीन हुड्डा और अंकुश पांघल ने तीन गोल्ड मेडल जीते. हालांकि, परवीन का गोल्ड मेडल जीतना इस इवेंट की सबसे खास कहानी रही, क्योंकि हांग्जो में डोपिंग से जुड़े नियमों (वेयरअबाउट्स फेलियर) के उल्लंघन के कारण उनसे ब्रॉन्ज़ मेडल छीन लिया गया था. परवीन और लवलीना दोनों ही एमसी मैरी कॉम के साथ उन चुनिंदा भारतीय महिला मुक्केबाजों के ग्रुप में शामिल हो गईं जिन्होंने एशियाई खेलों में खिताब जीते हैं. अंकुश ने भी इतिहास में अपनी जगह बनाई, वह अमित पंघाल के बाद एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीतने वाले दूसरे भारतीय पुरुष बॉक्सर बन गए.

रेसलिंग (6 मेडल: 2 गोल्ड, 2 सिल्वर, 2 ब्रॉन्ज़)

जकार्ता 1962 के बाद रेसलिंग में भारत का यह सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा, जिसमें रेसलर्स ने दो गोल्ड, दो सिल्वर और दो ब्रॉन्ज़ मेडल जीते और कुल मेडल की संख्या छह हो गई. हाल के समय में ग्रीको-रोमन रेसलिंग भारत की मज़बूती रही है, फिर भी फ्रीस्टाइल रेसलर्स ने छह में से चार मेडल जीते, जिनमें अमन सहरावत और सुजीत कलकल के गोल्ड मेडल भी शामिल हैं.

स्क्वैश (5 मेडल: 2 सिल्वर, 3 ब्रॉन्ज़)

इस साल गोल्ड मेडल न जीत पाने के बावजूद, भारतीय स्क्वैश टीम ने अब तक का अपना सबसे अच्छा मेडल प्रदर्शन किया. बदलाव के दौर से गुज़र रही टीम के लिए यह कोशिश बेहतरीन रही. अभय सिंह और युवा अनाहत सिंह ने क्रमशः पुरुषों और महिलाओं के व्यक्तिगत इवेंट में सिल्वर मेडल जीतकर भारत की चुनौती को आगे बढ़ाया. उन्होंने पुरुषों की टीम, महिलाओं की टीम और मिक्स्ड डबल्स इवेंट में भी पोडियम फिनिश करके भारत के ब्रॉन्ज़ मेडल जीतने में योगदान दिया.

क्रिकेट-हॉकी-कबड्डी टीम ने किया कमाल

क्रिकेट, हॉकी और कबड्डी में भी शानदार प्रदर्शन देखने को मिला, जहां पुरुषों और महिलाओं की टीमों ने अपने-अपने इवेंट में गोल्ड मेडल जीते. भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने पहली बार अपना टाइटल बचाया, जबकि महिला हॉकी टीम ने 1982 के बाद अपना दूसरा गोल्ड मेडल जीता. क्रिकेट में पहली बार महिला और पुरुष टीम ने गोल्ड मेडल जीता. 

गोल्फ में ऐतिहासिक मेडल (2 मेडल: 1 गोल्ड, 1 सिल्वर)

गोल्फ़ में, प्रणवी व्यक्तिगत गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं. वह उस भारतीय महिला टीम का भी हिस्सा थीं जिसने सिल्वर मेडल जीता.

सेलिंग में आए तीन मेडल

सेलिंग में भी तीन मेडल मिले, जिसमें पुरुषों और महिलाओं की स्किफ़ टीमों ने क्रमशः सिल्वर और ब्रॉन्ज़ मेडल जीते. नेत्र कुमानन ने भी महिलाओं के डिंगी इवेंट में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता. सतनाम सिंह और सलमान खान ने रोइंग में ब्रॉन्ज़ मेडल जीतकर पुरुषों के डबल स्कल्स इवेंट में भारत के लिए पहला पदक जीता.

इन 9 खेलों में भी आए एक-एक पदक

इसके अलावा, वेटलिफ्टिंग, वुशु, बैडमिंटन, कुराश, मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स, रोइंग, सेपकटकरॉ, सॉफ्ट टेनिस, टेबल टेनिस में 1-1 पदक आया. सुचिका तारियाल ने MMA में भारत का पहला एशियाई खेल पदक जीता. इस खेल के एशियाई खेलों में शामिल होने के पहले ही मौके पर उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल हासिल किय. वहीं रोशिबिना देवी ने वुशु में सिल्वर मेडल जीता और वह लगातार तीन एशियाई खेलों में इस खेल में पदक जीतने वाली पहली भारतीय बनीं. इसके अलावा, भारत ने पुरुषों के सेपकटकराव क्वाड्रेंट इवेंट में ऐतिहासिक ब्रॉन्ज़ मेडल के साथ अपना पहला पदक भी हासिल किया.

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