विज्ञापन

मां की जिद से शूटिंग में वापसी, तो डीसीपी पिता के इस फैसले ने बदली जिंदगी, रुद्रांक्ष की रोचक कहानी

पिछले साल एशियन खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले रुद्रांक्ष स्वर्ण पर तो निशाना नहीं लगा सके, लेकिन तीसरे दिन उन्होंने भारत के लिए रजत पदक दिलाकर पदकों की संख्या बढ़ा दिया

मां की जिद से शूटिंग में वापसी, तो डीसीपी पिता के इस फैसले ने बदली जिंदगी,  रुद्रांक्ष की रोचक कहानी
रुद्रांक्ष ने भारत के लिए तीसरे दिन सोमवार को कांस्य पदक जीता
source: X

जापान के आइजी निगोया में खेले जा रहे 20वें एशियाई खेलों की शुरुआत में भारतीय शूटरों ने एक बार फिर से अपना दमखम दिखाया है. तीसरे दिन शूटिंग में भारत के हिमांशु ढिल्लन और रुद्रांक्ष पाटिल 10 मी. एयर रायफल में क्रमश: रजत और कांस्य पदक जीतकर भारत के कुल पदकों की संख्या को 6 तक पहुंचा दिया. अगर रुद्रांक्ष की बात करें, तो उनका जन्म 16 दिसंबर 2003 को ठाणे, महाराष्ट्र में हुआ था.उनके पिता बालासाहेब पाटिल एक पुलिस अधिकारी डीसीपी (डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस), जबकि  उनकी मां हेमांगिनी पाटिल एक गृहिणी हैं, जिन्होंने रुद्रांक्ष को खेल की ओर प्रेरित करने में मुख्य भूमिका निभाई.

यह भी पढ़ें: कौन हैं 36 साल की सुचिका तरियाल? विश्व चैंपियन को हराकर एशियन गेम्स में भारत को दिलाया MMA ब्रॉन्ज मेडल

संयोग से हुई शूटिंग में वापसी

बचपन में रुद्रांक्ष काफी एथलेटिक थे. शूटिंग से पहले उन्होंने चेस, फुटबॉल, बैडमिंटन और स्विमिंग जैसी गतिविधियों में हाथ आजमाया था. लेकिन जब  13 साल की उम्र में जब ठाणे में एक नई शूटिंग रेंज का उद्घाटन हुआ, तब उनके पिता वहां पहुंचे थे. वहां मौजूद कोच स्नेहल कदम और पापालकर ने रुद्रांक्ष को शूटिंग में हाथ आजमाने की सलाह दी.  शुरुआत में रुद्रांक्ष को शूटिंग बहुत उबाऊ लगी थी, क्योंकि इसमें कई घंटों तक एक ही जगह स्थिर खड़े रहना पड़ता था और  उन्होंने कुछ ही हफ्तों में शूटिंग छोड़ दी थी. 

मां की जिद से वापसी

बहरहाल, उनकी मां ने उन्हें दोबारा प्रयास करने के लिए कहा. जब वह फिर से शूटिंग रेंज लौटे और शुरुआती स्कूल व राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेकर मेडल जीता, तब उनका आत्मविश्वास बढ़ा और खेल में दिल लग गया. करियर की शुरुआत में ठाणे के पास शूटिंग रेंज बहुत ही सामान्य स्तर की थी और यहां लाइट्स और मैनुअल टारगेट की समस्या थी. ऐसे में उन्होंने और उनके कोच ने अपनी मेहनत और टूर्नामेंट्स की इनामी राशि से ऑटोमैटिक टारगेट और बेहतर लाइटें लगवाईं.

माता-पिता का बड़ा फैसला 

इसके बाद रुद्रांक्ष ने सुर्खियां बटोरना शुरू किया, तो पिता ने बेटे की पेशेवर कोचिंग को अगले स्तर पर ले जाने का फैसला किया. पिता ने कोच अजीत पाटिल को ठाणे में शिफ्ट होने के लिए राजी किया, ताकि रुद्रांक्ष की पढ़ाई और ट्रेनिंग साथ-साथ चल सके. वहीं उननके परिवार ने ट्रेनिंग, महंगी राइफल और उपकरणों के खर्च को उठाने के साथ-साथ उनके यात्रा के शेड्यूल में लगातार सहयोग किया

करियर के बड़े टर्निंग प्वाइंट

कोच अजीत पाटिल से जुड़ाव 

साल 2017 में  कोल्हापुर के मशहूर निशानेबाजी कोच अजीत पाटिल के मार्गदर्शन में आना उनके करियर का पहला बड़ा मोड़ साबित हुआ. कोच ने रुद्रांक्ष की तकनीक और मानसिक मजबूती  पर काम किया

2022 ISSF वर्ल्ड चैंपियनशिप में ऐतिहासिक गोल्ड

साल 2022 में 10 मीटर एयर राइफल में व्यक्तिगत गोल्ड जीतकर रुद्रांक्ष अभिनव बिंद्रा के बाद ऐसा करने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी बने. इस जीत के साथ ही उन्होंने पेरिस ओलंपिक कोटा हासिल किया था. इसी साल  मात्र 18 वर्ष की उम्र में रुद्रांक्ष ने पुरुषों की 10m एयर राइफल श्रेणी में विश्व नंबर-1 पायदान हासिल की. 

एशियाई खेल में रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन

साल 2022 में ही हांग्जो (चीन) म आयोजित 2022 एशियाई खेलों में रुद्रांक्ष ने 10m एयर राइफल टीम स्पर्धा में विश्व रिकॉर्ड स्कोर के साथ भारत को गोल्ड मेडल दिलवाया था. हालांकि, वह इस प्रदर्शन को इस बार नहीं दोहरा सके और उन्हें बार सिल्वर से ही संतोष करना पड़ा. 

यह भी पढ़ें: 1000 डॉलर की अपील, 10 जजों की सुनवाई... फिर भी फाइनल से बाहर हुईं सुचिका तरियाल, जानिए क्या है पूरा मामला

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Sports News, Asian Games 2026, Shooting
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com