क्रिकेट और एथलेटिक्स की दुनिया शायद ही कभी एक-दूसरे से मिलती हैं, लेकिन जैवलिन थ्रो में कुछ ऐसा हो रहा है जिसे जानकर हर कोई हैरान है. दरअसल, श्रीलंका के रुमेश पथिरागे और भारत के जैवलिन थ्रोअर मनोज कुमार साबित कर रहे हैं कि एक तेज गेंदबाज़ की स्किल्स जैवलिन थ्रो में भी सफलता दिला सकती हैं. श्रीलंका के पथिरागे की तरह, जो जैवलिन में आने से पहले लगभग 134 किमी/घंटा की रफ्तार से गेंदबाजी करते थे, उन्हीं के नक्शे कदम पर भारत के जैवलिन थ्रोअर मनोज कुमार चल रहे हैं. मनोज कुमार ने भी पथिरागे की राह पर चलकर अपना करियर क्रिकेट के बजाय जैवलिन में चुना और एशिया के बेहतरीन थ्रोअर्स में से एक बनने की राह पर खड़े हैं.
भारत के मनोज कुमार ने हाल ही में नई दिल्ली में हुई इंडियन एथलेटिक्स सीरीज फाइनल में 80.73 मीटर का अपना अब तक का सबसे अच्छा थ्रो करके सबका ध्यान अपनी ओर खींचा. इसके साथ ही वे 80 मीटर का आंकड़ा पार करने वाले 21वें भारतीय जैवलिन थ्रोअर बने. वे यह उपलब्धि हासिल करने वाले तमिलनाडु के पहले एथलीट भी हैं. उनके प्रदर्शन ने तेज गेंदबाजी और जैवलिन थ्रो के बीच संबंध पर चर्चा छेड़ दी ,
मनोज की तुलना पथिरागे से तुलना होना तो लाजमी है. दोनों एथलीट्स का बैकग्राउंड तेज गेंदबाजी से जुड़ा रहा है और उन्होंने उसी आधार का इस्तेमाल करके जबरदस्त थ्रोइंग पावर हासिल की है. आज पथिरागे दुनिया के नंबर 1 जैवलिन थ्रोअर बन चुके हैं. वहीं मनोज कुमार को अब एक उभरते हुए टैलेंट के तौर पर देखा जा रहा है, जो आने वाले सालों में भारत के लिए बड़ा नाम बन सकते हैं.
नीरज चोपड़ा की सफलता के बाद भारत में जैवलिन की लोकप्रियता काफी आगे बढ़ी है. इसलिए 80-मीटर का हर नया थ्रो लोगों का ध्यान खींचता है. मनोज कुमार के लिए, उस बाधा को पार करना न सिर्फ एक पर्सनल माइलस्टोन है, बल्कि इस बात का भी संकेत है कि भारत में जैवलिन के क्षेत्र में लगातार नए और शानदार टैलेंट सामने आ रहे हैं.
ANOTHER 80M THROWER! 👏👏
— myKhel.com (@mykhelcom) September 11, 2026
21-year-old Tamil Nadu javelin thrower Manoj Kumar produced a personal best of 80.73m in the men's javelin throw at the Indian Athletics Series Final 2026 in New Delhi.
With this throw, Manoj became the latest entrant into India's 80m club.
He is… pic.twitter.com/pWmjnC2TTo
मनोज कुमार रह चुके हैं तेज गेंदबाज
कोविड-19 महामारी के दौरान जैवलिन थ्रो अपनाने से पहले मनोज क्रिकेट में तेज़ गेंदबाज़ थे. शुरुआती सालों में कोचिंग की सीमित मदद के बावजूद, उन्होंने महान थ्रोअर जान जेलेजनी और एंड्रियास थोरकिल्डसेन के वीडियो देखकर खेल सीखा. मनोज का सफर बिल्कुल भी आसान नहीं रहा. बड़ी सफलता हासिल करने से पहले उन्होंने साधारण उपकरणों के साथ ट्रेनिंग की, चोटों का सामना किया और अपेंडिक्स की सर्जरी से भी उबरकर वापसी की. इस सीजन में उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 77.82 मीटर से बेहतर करके 80.73 मीटर तक पहुंचाया और भारत के उभरते हुए जैवलिन टैलेंट के तौर पर अपनी पहचान बनाई.
तेज गेंदबाजी से शुरू हुआ सफर, अब बने दुनिया के नंबर 1 जैवलिन थ्रोअर
बता दें कि श्रीलंका के पथिरागे का भी सफल क्रिकेट में तेज गेंदबाज से शुरू हुआ था. अपने शुरुआती समय में वे 134 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी करते थे और 2019 की राष्ट्रीय टैलेंट हंट में अंडर-18 वर्ग में 134 किलोमीटर प्रति घंटे की गति दर्ज की थी. उस टूर्नामेंट में वह श्रीलंका और आईपीएल टीम सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाड़ी ईशान मलिंगा से पीछे दूसरे स्थान पर रहे थे.
दुनिया के टॉप 10 जैवलिन थ्रोअर (1 सितंबर 2026)
- पथिरागे (श्रीलंका) - 1379 अंक
- एंडरसन पीटर्स (ग्रेनेडा) - 1340 अंक
- जूलियन वेबर (जर्मनी) - 1316 अंक
- कर्टिस थॉम्पसन (अमेरिका) – 1315 अंक
- केशोर्न वालकॉट (त्रिनिदाद एवं टोबैगो) - 1294 अंक
- नीरज चोपड़ा (भारत)- 1285 अंक
- जूलियस येगो (केन्या) - 1248 अंक
- सचिन यादव (भारत)- 1245 अंक
- डेविड वेगनर (पोलैंड) - 1240 अंक
- अरशद नदीम (पाकिस्तान) - 1234 अंक
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