राजस्थान हाईकोर्ट ने मंडोर के ओपन जेल में सजा काट रहे बंदी को दूसरी सजायाफ्ता महिला से विवाह करने की अनुमति दी है. कोर्ट के आदेश पर अब दोनों की ओपन जेल में शादी होगी. जेल में ही मंडप सजेगा और वहीं दोनों सात फेरे लेंगे. जेल में पंडित जी सहित 21 लोगों के जाने की अनुमति दी गई है. कोर्ट ने कहा कि दो बालिग व्यक्तियों का अपनी मर्जी से विवाह करना स्वतंत्रता के अधिकार का हिस्सा है. अदालत ने जेल प्रशासन को रीति रिवाज से शादी कराने के निर्देश दिए हैं. जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने कैदी मूलाराम की ओर से दायर आवेदन पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया.
उम्रकैद की सजा काट रहा मूलाराम
वकील कालूराम भाटी ने बताया कि कैदी मूलाराम नागौर जिले के अरसिंगा गांव का रहने वाला है. उसके पिता और पड़ोसी युवक में खेत का विवाद था. वह साल 2017 में वह पड़ोसी युवक को बाइक पर बैठ कर ले गया था. बाद में उसकी डेड बॉडी टांके में मिली थी, हत्या के आरोप में मूलाराम को जेल भेज दिया गया. साल 2023 में हत्या, साक्ष्य मिटाने और संपत्ति के दुरुपयोग के मामले में दोषी ठहराया गया था. उसे उम्रकैद की सजा हुई.
दो साल से ओपन जेल में है मूलाराम
मूलाराम को अजमेर जेल से 2 साल पहले जोधपुर की खुली जेल शिफ्ट किया गया था. उम्रकैद की सजा काट रही कैदी सीमा को करीब डेढ़ साल पहले जोधपुर महिला जेल से ओपन जेल में भेजा था, जहां दोनों ही खेती का काम करते थे. वहीं दोनों संपर्क में आए और नजदीकियां बढ़ीं. दोनों को एक-दूसरे से प्यार हुआ और शादी करने का फैसला किया. हालांकि, सीमा 40 दिनों के लिए पेरोल पर बाहर है.
सीमा को पति के हत्या में उम्रकैद
सीमा घड़से मुंबई की रहने वाली है. साल 2016 में उसकी शादी घंटाघर के कौशल राज अरोड़ा से हुई थी. बताया जाता है कि उसकी मां ने मर्जी के खिलाफ शादी करवाई थी. शादी के 2 महीने बाद ही सीमा ने सोते हुए पति की दोनों हाथों की नसें धारदार हथियार से काट दी थी, जिससे उसके पति की मौत हो गई थी. बाद में वह चिल्लाई थी कि एक चोर आया था, लेकिन 2019 में सीमा को उम्रकैद की सजा मिली थी.
कोर्ट में शादी के लिए याचिका
शादी के लिए मूलाराम ने कोर्ट में याचिका दायर की. सुनवाई के दौरान बताया गया कि मूलाराम, हत्या के मामले में सजायाफ्ता सीमा से विवाह करना चाहता है. दोनों के वकील ने कोर्ट को बताया कि वे आपसी सहमति से विवाह करना चाहते हैं. और इससे उनके सामाजिक पुनर्वास को भी बल मिलेगा.
पंडित सहित 21 लोगों को जाने की अनुमति
राज्य सरकार की ओर से पेश रिपोर्ट में दोनों के विवाह करने की इच्छा की पुष्टि की गई. लोक अभियोजकों ने कोर्ट को बताया कि ओपन एयर कैंप में विवाह कराने पर राज्य को कोई आपत्ति नहीं है, और नियमों के अनुरूप इसकी अनुमति दी जा सकती है. खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि विवाह समारोह में पंडित सहित दोनों पक्षों के अधिकतम 21 परिजनों को प्रवेश दिया जाएगा.
आवश्यकता पड़ने पर जेल प्रशासन अपने विवेक से अतिरिक्त लोगों को भी अनुमति दे सकेगा. विवाह की तिथि पहले से प्रशासन को बतानी होगी तथा सुरक्षा, अनुशासन और ओपन एयर कैंप की गरिमा बनाए रखने के लिए आवश्यक शर्तों का पालन करना होगा. विवाह का समस्त खर्च संबंधित पक्ष स्वयं वहन करेंगे.
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