मेसी की अर्जेंटीना ने जब क्वार्टरफाइनल में स्विट्जरलैंड को हराया तो ड्रेसिंग रूम में आने के बाद टीम ने अपने देश के अनौपचारिक वर्ल्ड कप गाने 'द फोर्थ स्टार' को गाकर जश्न मनाया.
लियोनेल मेसी और टीम के उनके साथियों ने नारे भी लगाए- "माल्विनास के लिए, डिएगो के लिए."
इस नारे में अर्जेंटीना का वो इतिहास छिपा है जिससे मशहूर फुटबॉलर डिएगो माराडोना और फॉकलैंड द्वीप समूह दोनों जुड़े हुए हैं.
अर्जेंटीना के ये नारे बुधवार की रात को इंग्लैंड से होने जा रहे उनके वर्ल्ड कप सेमीफाइनल के लिहाज से और भी अहम हो जाते हैं क्योंकि फॉकलैंड द्वीप का सीधा संबंध ब्रिटेन से जुड़ा है.

माराडोना का 'हैंड ऑफ गॉड' गोल
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माराडोना का वो विवादित 'हैंड ऑफ गॉड' गोल इंग्लैंड के खिलाफ 1986 के वर्ल्ड कप में हुआ था, जो दोनों देशों के बीच 1982 के फ़ॉकलैंड युद्ध के बाद खेला गया था.
अब करीब चार दशक बाद, 2026 के वर्ल्ड कप सेमीफाइनल से पहले फिर इन दोनों ऐतिहासिक घटनाओं की चर्चा हो रही है.
ये टीमें जब आमने-सामने होती हैं, तो इनके इतिहास, राजनीति और करोड़ों लोगों की भावनाएं भी साथ ही मैदान पर उतरती हैं. फिर जब मुकाबला वर्ल्ड कप का हो तो यह टक्कर और भी बड़ा हो जाता है.
सेमीफाइनल मुकाबले से पहले दोनों देशों की जनता में बेहद जोश है. इंग्लैंड में लोग 1986 में माराडोना के 'हैंड ऑफ गॉड' गोल और पुरानी प्रतिद्वंद्विता को याद कर रहे हैं. वहीं अर्जेंटीना में लोग इतिहास से जुड़ी लड़ाई की तरह देख रहे हैं.

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क्यों खास है यह मुकाबला?
1982 में अर्जेंटीना और ब्रिटेन के बीच दक्षिण अटलांटिक महासागर में मौजूद फॉकलैंड द्वीप (अर्जेंटीना इसे माल्विनास कहता है) को लेकर युद्ध हुआ था. करीब 74 दिन तक चले इस युद्ध में दोनों देशों के सैकड़ों सैनिक मारे गए.
सिर्फ चार साल बाद 1986 फीफा वर्ल्ड कप के क्वार्टर फाइनल में दोनों टीमें भिड़ीं. इसी मैच में डिएगो माराडोना ने पहले विवादित 'हैंड ऑफ गॉड' गोल किया और फिर इतिहास का सबसे शानदार माना जाने वाला एकल गोल दागकर अर्जेंटीना को 2-1 से जीत दिलाई.
फाकलैंड्स/माल्विनास युद्ध के अनुभवी अर्जेंटीना के सांसद एल्डो लीवा कहते हैं, "1986 का मैच उन सभी लोगों के लिए एक मरहम था, जिन्होंने युद्ध का सामना किया था.
वहीं 'द फोर्थ स्टार' के लेखक पाब्लो पामिटो क्विंटाना ने गीत के बोल में माल्विनास शब्द को शामिल करने का कारण बताते हुए कहा कि “अर्जेंटीना टीम के पीछे ऐसे लोग हैं जो आज भी दर्द झेल रहे हैं, जो अपने इतिहास को भूलना नहीं चाहते और जो फुटबॉल के मैदान पर हर हाल में जीतना चाहते हैं.”

फॉकलैंड (माल्विनास) युद्ध की तस्वीर
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अर्जेंटीना का माल्विनास (फॉकलैंड) कनेक्शन
अर्जेंटीना का कहना है कि माल्विनास द्वीप उसके ऐतिहासिक और भौगोलिक क्षेत्र का हिस्सा हैं. उसका दावा है कि 1833 में ब्रिटेन ने इन द्वीपों पर कब्जा कर लिया था और तब से वह लगातार इन पर अपना अधिकार जताता रहा है. अप्रैल 1982 में अर्जेंटीना की सैन्य सरकार ने इन द्वीपों को अपने अधिकार क्षेत्र में ले लिया तो ब्रिटेन ने सैन्य कार्रवाई शुरू की. करीब ढाई महीने तक युद्ध चला और ब्रिटेन ने दोबारा इन द्वीपों पर अपना नियंत्रण हासिल कर लिया.
युद्ध में जान गंवाने वाले सैनिकों को अर्जेंटीना राष्ट्रीय नायक मानता है. वहां के स्कूलों में माल्विनास के बारे में पढ़ाया जाता है और ये मुद्दा राष्ट्रीय पहचान का बेहद अहम हिस्सा माना जाता है.
इसी वजह से इंग्लैंड के खिलाफ फुटबॉल मैच भी कई लोगों के लिए भावनात्मक महत्व रखते हैं.

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फिर इंग्लैंड फॉकलैंड पर क्या तर्क देता है?
वहीं ब्रिटेन का कहना है कि फॉकलैंड द्वीप उसका विदेशी इलाका है और वहां रहने वाले अधिकांश लोग खुद को ब्रिटिश मानते हैं.
ब्रिटिश सरकार का तर्क है कि 1982 में अर्जेंटीना ने इन द्वीपों पर सैन्य कब्जा किया था, इसलिए उसने वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा और अपने क्षेत्र की रक्षा के लिए सैन्य कार्रवाई की.
2013 में फॉकलैंड द्वीप पर हुए जनमत संग्रह में लगभग सभी मतदाताओं ने ब्रिटेन के साथ बने रहने का समर्थन किया था. ब्रिटेन इसी जनमत को अपनी स्थिति का मजबूत आधार मानता है.
यही वजह है कि दोनों देशों के बीच यह विवाद आज भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.

माराडोना का 'हैंड ऑफ गॉड' गोल
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'हैंड ऑफ गॉड' और 'गोल ऑफ द सेंचुरी' आज भी जिंदा: अर्जेंटीना vs इंग्लैंड (1986, क्वार्टर फाइनल)
1986 के वर्ल्ड कप में डिएगो माराडोना ने इंग्लैंड के खिलाफ हाथ से गेंद को गोल में डाल दिया था. रेफरी की नजर नहीं पड़ी और गोल मान लिया गया. अर्जेंटीना 2-1 से जीता और बाद में माराडोना ने इसे 'हैंड ऑफ गॉड' नाम दिया. यह वर्ल्ड कप इतिहास का सबसे विवादित गोल माना जाता है.
बेशक फुटबॉल के जीनियस माराडोना एक बेहद गुस्सैल और बदनाम लेकिन इस खेल की अद्भुत प्रतिभा से संपन्न अर्जेंटीना के फुटबॉलर थे जो मैदान पर फुटबॉल के साथ अपनी तेजी और असाधारण गोल करने की क्षमता की वजह से दर्शकों, प्रशंसकों को मंत्रमुग्ध कर देते थे.
माराडोना मैदान के बाहर ड्रग्स और नशाखोरी जैसे मामलों में भी पड़े लेकिन हैंड ऑफ गॉड गोल से उन्होंने सबको हैरान में डाल दिया.
Have you ever heard of the "Hand of God" goal by Maradona? He scored it against England back in the 1986 World Cup.👀 pic.twitter.com/QYWU4S3Fro
— Jika | CFC Daily 💙🇳🇬 (@Jikason94) June 7, 2026
इसी मैच में हैंड ऑफ गॉड गोल करने के कुछ ही मिनट बाद माराडोना ने एक ऐसा गोल किया जिसे 'गोल ऑफ द सेंचुरी' के तौर पर याद किया जाता है. तब माराडोना ने इंग्लैंड के पांच खिलाड़ियों के साथ ही गोलकीपर को भी छकाते हुए फुटबॉल गोल पोस्ट के भीतर पहुंचा दिया था. माराडोना ने अर्जेंटीना को 1986 में वर्ल्ड कप में जीत दिलाई और चार बार इस टूर्नामेंट के फाइनल तक पहुंचाया.
अर्जेंटीना में कई लोगों ने उस जीत को फॉकलैंड युद्ध के बाद इंग्लैंड पर मिली भावनात्मक जीत के तौर पर देखा. लोगों ने यहां तक कहा कि ये ईश्वरीय कृपा है. उन्होंने माना कि ब्रिटेन ने अर्जेंटीना के क्रूजर जनरल बेलग्रानो को डुबोकर नियमों का उल्लंघन किया था, उसमें सवार सभी 323 लोग मारे गए थे.
उरुग्वे के पत्रकार विक्टर ह्यूगो मोरालेस माराडोना के उस 1986 वाले मैच के दौरान कमेंट्री कर रहे थे. बुधवार की रात होने वाले सेमीफाइनल से पहले उन्होंने कहा है कि (1986 के) उस मैच की यादें एक बार फिर गूंज रही हैं.
हालांकि माराडोना ने खुद कई बार कहा था कि वो सिर्फ एक फुटबॉल मैच था, लेकिन उन्होंने यह भी स्वीकार किया था कि युद्ध की यादें खिलाड़ियों और लोगों के मन में थीं.

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माल्विनास की गूंज
स्विट्जरलैंड के खिलाफ जीत के बाद अर्जेंटीना के खिलाड़ी जो गीत गा रहे थे, उसमें 'माल्विनास' और 'डिएगो' दोनों का जिक्र था.
सेमीफाइनल तय होने के बाद अर्जेंटीना के कई टीवी चैनलों और अखबारों ने भी 1986 और माल्विनास को जोड़कर कवरेज शुरू कर दी. इसमें 'डिएगो, एक बार फिर हमारी मदद करो', 'अर्जेंटीना 1986 की तरह नीली जर्सी पहनकर मैदान में उतरेगा' जैसी बातें लिखी और कही जा रही हैं.
अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई कई बार ब्रिटेन की पूर्व प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर की तारीफ कर चुके हैं. अर्जेंटीना में यह काफी विवाद का विषय रहा है क्योंकि 1982 के फॉकलैंड (माल्विनास) युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार का नेतृत्व मार्गरेट थैचर के हाथों में ही था.
यही वजह है कि राजनीतिक जानकार इंग्लैंड के खिलाफ इस मैच को घरेलू राजनीति से भी जोड़कर देख रहे हैं.

गैरी लिनेकर
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इंग्लैंड में बड़ा मुद्दा नहीं, फिर क्यों छिड़ी बहस?
माल्विनास अर्जेंटीना में जितना बड़ा मुद्दा है, ब्रिटेन में फॉकलैंड उतना बड़ा राजनीतिक मुद्दा नहीं है. हालांकि अर्जेंटीना के खिलाफ मैच आते ही पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं. पर हाल ही में जब इंग्लैंड के पूर्व फुटबॉलर गैरी लिनेकर ने अपने पॉडकास्ट में फॉकलैंड के साथ माल्विनास शब्द का भी उपयोग किया, तो यह ब्रिटेन में भी बहस का विषय बन गया. सोशल मीडिया पर यहां तक कहा गया कि "इस मूर्ख को रेड कार्ड दिखाने का वक्त आ गया है."
इस बीच अर्जेंटीना के मिडफील्डर लिएंड्रो परेडेस ने कहा कि उन्हें पता है कि इंग्लैंड के खिलाफ मैच उनके देश के लिए कितना मायने रखता है, पर आखिरकार यह फुटबॉल का मुकाबला है और हम इसे मैच की तरह ही खेलना चाहते हैं. लेकिन मैदान के बाहर माहौल कुछ और ही कहानी कह रहा है.
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