- उज्जैन संभाग के 11 प्रमुख मंदिरों को विश्वस्तरीय सुविधाओं से जोड़ने के लिए टेंपल बॉन्ड जारी करने की योजना है.
- 31 जुलाई को 200 करोड़ के 10 वर्षीय टेंपल बॉन्ड लॉन्च होंगे, कुल परियोजना पर 1100 करोड़ का खर्च अनुमानित है.
- टेंपल बॉन्ड खरीदने के लिए श्रद्धालु या कॉर्पोरेट संस्थाएं डिजिटल माध्यमों व बैंकिंग चैनलों का उपयोग कर सकेंगे.
मध्य प्रदेश का धार्मिक शहर उज्जैन एक बार फिर देशभर में नई पहल को लेकर चर्चा में है. सिहंस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए महाकाल लोक के बाद अब उज्जैन संभाग के 11 प्रमुख मंदिरों को विश्वस्तरीय सुविधाओं से जोड़ने की तैयारी शुरू हो गई है. इसके लिए देश में पहली बार "टेंपल बॉन्ड" जारी करने की योजना बनाई गई है.
31 जुलाई को 200 करोड़ रुपये के 10 वर्षीय टेंपल बॉन्ड लॉन्च किए जाएंगे, जबकि पूरी परियोजना पर करीब 1100 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. प्रशासन का दावा है कि इस पहल से धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी. यदि यह मॉडल सफल रहता है तो भविष्य में देश के अन्य धार्मिक स्थलों के विकास के लिए भी इसे अपनाया जा सकता है.
11 प्रमुख मंदिरों के विकास का बना रोडमैप
महाकाल लोक बनने के बाद उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है. इसे देखते हुए प्रशासन ने आसपास के प्रमुख धार्मिक स्थलों को भी आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने की योजना तैयार की है. इस परियोजना में कालभैरव मंदिर, मंगलनाथ मंदिर, सांदीपनि आश्रम, गढ़कालिका मंदिर, सिद्धवट, अंगारेश्वर महादेव, भूखी माता मंदिर, नवग्रह शनि मंदिर, 84 महादेव मंदिर श्रृंखला और आगर-मालवा स्थित बगलामुखी माता मंदिर सहित कुल 11 धार्मिक स्थलों को शामिल किया गया है.
31 जुलाई को लॉन्च होंगे टेंपल बॉन्ड
योजना को निर्धारित समय में लागू करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं. संभागायुक्त आशीष सिंह ने अधिकारियों की बैठक लेकर बॉन्ड जारी करने से जुड़ी प्रक्रियाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए हैं. प्रस्ताव के अनुसार 31 जुलाई को 200 करोड़ रुपये के टेंपल बॉन्ड जारी किए जाएंगे. यह देश में धार्मिक स्थलों के विकास के लिए अपनी तरह का पहला प्रयोग माना जा रहा है.

ऐसे जुटाए जाएंगे 1100 करोड़ रुपये
पूरे प्रोजेक्ट के लिए 1100 करोड़ रुपये का वित्तीय मॉडल तैयार किया गया है. इसमें 200 करोड़ रुपये टेंपल बॉन्ड के जरिए जुटाए जाएंगे. इसके अलावा 275 करोड़ रुपये अर्बन चैलेंज फंड से प्राप्त होंगे, जबकि 625 करोड़ रुपये बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों के सहयोग से जुटाए जाने की योजना है. प्रशासन का मानना है कि इस मॉडल से बड़े पैमाने पर विकास कार्यों के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे.
आखिर क्या है टेंपल बॉन्ड?
टेंपल बॉन्ड को धार्मिक और सामाजिक योगदान के एक नए वित्तीय मॉडल के रूप में देखा जा रहा है. प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार कोई भी श्रद्धालु या कॉर्पोरेट संस्था अधिकृत बैंक के माध्यम से टेंपल बॉन्ड खरीद सकेगी. इसके लिए नकद राशि लेकर मंदिर पहुंचने की आवश्यकता नहीं होगी. भुगतान बैंकिंग चैनलों और डिजिटल माध्यमों से किया जा सकेगा.

दानकर्ता की पहचान रह सकती है गोपनीय
प्रस्तावित मॉडल के मुताबिक बॉन्ड पर दानकर्ता का नाम सार्वजनिक रूप से दर्ज नहीं होगा. श्रद्धालु इसे खरीदकर संबंधित मंदिर की दान पेटी या ट्रस्ट कार्यालय में जमा कर सकता है. इससे बड़े दान देने वालों की पहचान गोपनीय रखने में मदद मिल सकती है. हालांकि अंतिम नियम और प्रक्रिया अभी तय होना बाकी है.
केवल पंजीकृत ट्रस्ट ही भुना सकेंगे बॉन्ड
प्रस्ताव के अनुसार टेंपल बॉन्ड को केवल सरकार या आयकर विभाग के नियमों के तहत पंजीकृत मंदिर ट्रस्ट ही भुना सकेंगे. इससे धन के उपयोग में पारदर्शिता बनाए रखने में मदद मिलेगी. साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि राशि का इस्तेमाल मंदिरों के विकास और सुविधाओं के विस्तार में ही हो.
इस मॉडल का एक बड़ा उद्देश्य धार्मिक दान व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना भी है. चूंकि बॉन्ड खरीदने वाले का केवाईसी रिकॉर्ड बैंक के पास रहेगा और पूरा लेनदेन बैंकिंग सिस्टम के माध्यम से होगा, इसलिए नकद लेनदेन और काले धन की आशंकाओं को कम किया जा सकता है. इससे मंदिरों को मिलने वाली राशि का रिकॉर्ड भी अधिक व्यवस्थित तरीके से रखा जा सकेगा.
अभी प्रक्रिया निर्माण के दौर में है योजना
हालांकि टेंपल बॉन्ड को लेकर प्रारंभिक रूपरेखा तैयार कर ली गई है, लेकिन इसकी अंतिम प्रक्रिया और नियम अभी तय किए जा रहे हैं. प्रशासनिक और वित्तीय स्तर पर तैयारी जारी है. ऐसे में बॉन्ड के संचालन और उपयोग से जुड़े कुछ प्रावधान अंतिम मंजूरी के बाद बदल भी सकते हैं.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं