दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर कस्टम विभाग ने रेड सैंडर्स यानी लाल चंदन की लकड़ी की बड़ी तस्करी की कोशिश को नाकाम कर दिया है. एयरपोर्ट इंटेलिजेंस यूनिट के अधिकारियों ने एक भारतीय यात्री को गिरफ्तार किया है, जिसके सामान से करीब 365.545 किलोग्राम रेड सैंडर्स बरामद किया गया. आरोपी इस प्रतिबंधित लकड़ी की खेप को हांगकांग ले जाने की कोशिश कर रहा था.
कस्टम अधिकारियों के मुताबिक, 13 जुलाई 2026 को टर्मिनल-3 से कैथे पैसिफिक की फ्लाइट CX-698 से हांगकांग जाने वाले एक भारतीय यात्री की गतिविधियां संदिग्ध लगीं. प्रोफाइलिंग के दौरान अधिकारियों ने देखा कि यात्री के पास सामान्य से ज्यादा सामान था और उसकी हरकतें भी शक पैदा कर रही थीं. इसके बाद उसे रोककर उसके सामान की गहन जांच की गई.
जांच के दौरान अधिकारियों को यात्री के पास मौजूद 12 बैगों में बड़ी मात्रा में रेड सैंडर्स की लकड़ियां मिलीं. इन 12 बैगों में छह छोटे ट्रॉली सूटकेस (तीन मैरून और तीन काले रंग के) तथा छह ट्रैवल बैग शामिल थे. तस्करों ने लकड़ियों को पहले नीले रंग की पॉलीथीन में पैक किया था और फिर उन्हें स्पंज में लपेटकर रखा गया था, ताकि एक्स-रे स्कैनिंग और अन्य सुरक्षा जांच के दौरान अधिकारियों को शक न हो.
कस्टम विभाग ने बताया कि बरामद की गई रेड सैंडर्स का कुल वजन 365.545 किलोग्राम है. रेड सैंडर्स भारत की बेहद दुर्लभ और कीमती लकड़ी मानी जाती है. इसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी मांग है और इसका इस्तेमाल महंगे फर्नीचर, सजावटी सामान और पारंपरिक औषधियों में किया जाता है. इसी वजह से इसकी तस्करी के कई मामले सामने आते रहते हैं.
अधिकारियों के अनुसार, रेड सैंडर्स का निर्यात सख्त नियमों के तहत नियंत्रित है. बिना वैध अनुमति इसके निर्यात की कोशिश कस्टम्स एक्ट, 1962, CITES (Convention on International Trade in Endangered Species) Appendix-II और विदेश व्यापार (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1992 के प्रावधानों का उल्लंघन है. पूछताछ के बाद कस्टम विभाग ने आरोपी यात्री को कस्टम्स एक्ट, 1962 के तहत गिरफ्तार कर लिया है. साथ ही बरामद की गई पूरी खेप को जब्त कर लिया गया है. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह रेड सैंडर्स कहां से लाई गई थी, इसके पीछे कौन-सा तस्करी गिरोह सक्रिय है और इस खेप को हांगकांग में किसे पहुंचाया जाना था.
कस्टम अधिकारियों का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है. जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि इस तस्करी के पीछे कोई अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क तो नहीं है और क्या पहले भी इसी तरीके से रेड सैंडर्स की खेप विदेश भेजी गई थी. एयरपोर्ट पर बढ़ाई गई निगरानी और प्रोफाइलिंग की वजह से इस बड़ी तस्करी की कोशिश को समय रहते नाकाम कर दिया गया.
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