- 31 जनवरी तक सत्यापन का काम पूरा करने का प्रण लिया है.
- राजसमंद में 30-40 लोग हैं, जिनका सत्यापन बाकी है.
- अरुण कुमार हसीजा को 2024 में RAS से IAS पर प्रमोशन मिला था.
राजसमंद के जिला कलेक्टर अरुण कुमार हसीजा की अनूठी पहल पूरे राजस्थान की नौकरशाही में चर्चा का विषय बनी हुई है. उन्होंने घोषणा की है कि जब तक जिले के सभी गरीबों का सत्यापन सरकारी योजनाओं के लाभार्थी के रूप में नहीं हो जाता है. वे अपना जनवरी महीने का वेतन नहीं लेंगे. जिला कलेक्टर ने कहा कि मुझे अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि वे 31 जनवरी तक यह सत्यापन का काम पूरा कर देंगे.
कलेक्टर ने साझा किया अपना अनुभव
एनडीटीवी से खास बातचीत में कलेक्टर अरुण कुमार हसीजा ने कहा कि मुझे यह ख्याल आया कि हमारी तनख्वाह 10 दिन भी देरी से आती है तो हमें कितनी परेशानी होती है. हर व्यक्ति का जीवन साइकिल अपनी आय से जुड़ा हुआ है. बच्चों की स्कूल फीस, अपना EMI, क्रेडिट कार्ड का बिल है, मैं अपने कार्मिकों को यह समझना चाह रहा था कि अगर आपका वेतन 10 दिन भी देरी से आये तो आपके जीवन पर क्या असर पड़ सकता है, लेकिन सोचो उन गरीबों का जिन्हें सरकार से सिर्फ 1500 रुपये प्रति माह मिलते हैं, लेकिन अगर वो तीन तीन महीने नहीं मिले, सिर्फ सत्यापन की वजह से तो ये कोई अनन्य से कम नहीं.
अपने व्यक्तिगत जीवन के अनुभव को साझा करते हुए राजसमंद कलेक्टर ने कहा कि उनके माता पिता 1947 में विभाजन के समय में भारत आए थे. वो पहली पीढ़ी है जो भारत में रहे हैं. हम अपना सब छोड़कर यहां आए थे. मुझसे ज्यादा कोई नहीं समझ सकता कि अभाव क्या होता है. अरुण कुमार हसीजा ने बताया कि राजसमन्द जिले में करीब 30 हजार व्यक्ति ऐसे व्यक्ति हैं, जो गरीब की श्रेणी में आते हैं. इसमें मुख्यतः तीन योजनाओं के लाभार्थी हैं.
- पहले वे, जिन्हें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत सरकारी मुफ्त राशन या गेहूं मिलता है.
- इसके अलावा वे बच्चे जिनके सर से माता - पिता का साया हट चुका है, वे पालनहार योजना के तहत लाभार्थी हैं.
- साथ ही वे व्यक्ति जो सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की पेंशन योजनाओं के लाभार्थी हैं. इसमें एकल महिला, विधवा और वृद्धजन पेंशन जैसे योजनाओं से जुड़े पात्र लोग हैं. इन्हें सरकारी मदद की बेहद ज़रूरत रहती है.
जनवरी महीने में सत्यापन पूरा करने का प्रण
अभी भी हमारे जिले में लगभग 30 से 40 हजार लोग ऐसे हैं, जिनका सत्यापन होना बाकी है. हालांकि हमारा जिला राज्य में दूसरे नंबर है, लेकिन मैं इसको तब तक उचित नहीं मानता, जब तक उन 30 हजार लोगों का सत्यापन नहीं हो जाता है. एक बच्चा जिसका पिता नहीं है, उसको जो प्रतिमाह राशि मिलनी है वह नहीं मिलेगी. एक गरीब आदमी जो सरकार के गेहूं पर निर्भर है, उसे गेहूं नहीं मिलता. ऐसा गरीब आदमी, जिनका जीवन सरकारी पेंशन योजना पर निर्भर है, उन्हें पेंशन नहीं मिलती. जब तक सभी गरीब लोगों को यह लाभ नहीं मिल जाता. तब तक हमारे अधिकारी दिन रात काम करें. इस सत्यापन को जनवरी माह में ही पूरा करें.
जिला कलेक्टर अरुण कुमार हसीजा कहा कि ऐसा नहीं है कि हमारे कर्मचारी इस काम को करने में सक्षम नहीं हैं. हाल ही में हमनें कृषक अधिकार पंजीयन पखवाड़ा काआयोजन किया था. इसके तहत हमनें किसानों को उनसे संबंधित योजनाओं का लाभ देने के लिए मुहिम चलाई. इस दौरान कार्मिकों ने शुरू में थोड़ा विरोध किया कि इतने कम समय में ये काम कैसे पूरा होगा, लेकिन मैंने उन्हें कहा कि आप शाम के वक्त 4 बजे से 8 बजे के बीच गांव-गांव जाइए. कोई ताम-झाम मत कीजिए. किसानों से उनके घर पर, मंदिर में या खेत में जहां संभव हो मिलिए और उनका रजिस्ट्रेशन कीजिये. हमनें तय समय में यह काम कर लिया. इसलिए मुझे पूरी उम्मीद है कि अगले 15 दिनों में हम यह मुकाम भी हासिल कर लेंगे.
सरकारी योजनाओं से वंचित 20 लाख से ज्यादा लोग
बता दें कि राजस्थान में हाल ही में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में बड़ा बैक लॉग चल रहा है. 20 लाख 36,000 लोगों का वार्षिक सत्यापन नहीं होने के कारन उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ नही मिल रहा है. जैसे सामाजिक सुरक्षा पेंशन, पालनहार योजना और खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ. प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के 71 लाख 46000 लाभार्थी और NFSA के 4 करोड़ से अधिक लाभार्थी हैं.
अरुण कुमार हसीजा ने 24 जून 2025 को राजसमन्द कलेक्टर के पद पर कार्यभार संभाला था. इससे पहले वे नगर निगम जयपुर हेरिटेज के आयुक्त और जयपुर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के सीईओ भी रहे हैं. 2024 में ही उनका RAS से IAS में प्रमोशन हुआ. वे अपने सरल स्वभाव के लिए जाने जाते हैं. उनकी गिनती ऐसे नौकरशाहों में होती है, जो जमीन से जुड़े हो और समाज कल्याण की योजनाओं के क्रियान्वयन में तत्पर रहते हैं.
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