भारत में पिछले चार वर्षों से विलुप्त हो चुके वन्यजीव चीते को फिर से बसाने की मुहिम चल रही है. भारत से चीते 1952 में विलुप्त घोषित कर दिए गए थे. इसके बाद 2022 में चीतों की वापसी के अभियान की शुरुआत हुई. इसके तहत 70 साल बाद नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से चीतों को भारत लाया गया. उन्हें मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क में रखा गया और वहां उनकी संख्या बढ़ाने की दिशा में काम चल रहा है. इसी कड़ी में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी NTCA ने अब राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र की भी पहचान की है और वहां भी चीतों को वापस लाने की तैयारी की जा रही है.
पिछले दिनों राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी NTCA की टीम ने प्रोजेक्ट चीता के तहत रावतभाटा-भैंसरोड़गढ़ क्षेत्र का सर्वे किया. अगर रावतभाटा-भैंसरोड़गढ़ क्षेत्र में चीते बसाने की योजना को मंजूरी मिलती है तो यह हाड़ौती के वन्यजीव इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि होगी.

कुनो में चीतों की संख्या लगातार बढ़ रही है
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राजस्थान के इलाकों का सर्वे
NTCA ने अपनी 28वीं बैठक में राजस्थान में चीतों को वापस लाने के बारे में निर्णय लिया जिसके बाद एक समिति गठित की गई. इस समिति में NTCA के सदस्य, भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिक, राजस्थान और मध्यप्रदेश वन विभाग के अधिकारी शामिल हैं. इस समिति के सदस्यों ने रावतभाटा रेंज के वन क्षेत्र, राणा प्रताप सागर बांध क्षेत्र, गॉर्ज क्षेत्र और आसपास के जंगलों का निरीक्षण किया है. उन्होंने करीब 299 वर्ग किलोमीटर में फैले क्षेत्र में वनस्पति, मृदा संरचना, शिकार प्रजातियों की उपलब्धता और अन्य पारिस्थितिकीय पहलुओं का अध्ययन किया.
कोटा के मुख्य वन संरक्षक (CCF) सुगना राम जाट ने बताया कि रावतभाटा, भैंसरोड़गढ़ और गांधी सागर का क्षेत्र मुकुंदरा से जुड़ता है, और इस वजह से यह क्षेत्र वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा,"हाड़ौती इलाके की सबसे बड़ी खासियत इसका लैंडस्केप कनेक्टिविटी होना है. उत्तर में मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व और दक्षिण में मध्यप्रदेश का गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य मौजूद है. ऐसे में रावतभाटा-भैंसरोड़गढ़ क्षेत्र दोनों महत्वपूर्ण वन्यजीव क्षेत्रों को जोड़ने वाला कॉरिडोर बन सकता है."
उन्होंने आगे कहा,"हाड़ौती का क्षेत्र मध्य प्रदेश के कुनो और गांधीसागर के बीच में आता है. राजस्थान का बारां, झालावाड़ और कोटा मध्य प्रदेश के दोनों हिस्सों से लगा हुआ है. चीते का होम रेंज बहुत ज्यादा होता है. इसलिए वह इस इलाके में बार-बार आ जाता है और इसी वजह से इस इलाके को चीते के लिए अनुकूल बनाने का प्रयास किया जा रहा है."

चीतों को रहने के लिए बहुत बड़े क्षेत्र की आवश्यकता होती है
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सर्वे के बाद क्या?
वन विभाग के अधिकारियों के संकेतों के मुताबिक NTCA सर्वे के बाद इस क्षेत्र की संभावनाओं को लेकर रिपोर्ट सकारात्मक रहने की उम्मीद है. हालांकि अंतिम फैसला विशेषज्ञों की रिपोर्ट और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा.
रावतभाटा-भैंसरोड़गढ़ क्षेत्र में चीतों को बसाने की योजना को मंजूरी मिलती है तो यह हाड़ौती के वन्यजीव इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि होगी. मुकुंदरा में बाघों की बसावट के बाद चीते की मौजूदगी इस पूरे क्षेत्र को देश के प्रमुख वन्यजीव पर्यटन स्थलों में शामिल कर सकती है.
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