जयपुर पुलिस ने एक शातिर ठग को गिरफ्तार किया है, जो कभी इंजीनियर, पुलिसकर्मी, कभी नर्सिंग ऑफिसर, कभी यूनिवर्सिटी से जुड़ा व्यक्ति बताकर ठगी करता था. यह आरोपी अलग-अलग पहचान बनाकर लोगों को अपने जाल में फंसाता था. पुलिस के अनुसार ब्रह्मपुरी जयपुर के रहने वाले अरुण शर्मा के कई नाम हैं. अरुण शर्मा उर्फ आलू उर्फ दातार सिंह स्पेशल वाला उर्फ सुनील शर्मा उर्फ इंजीनियर सुनील मीणा उर्फ विजय शर्मा पहचान बदलकर लोगों को ठगता. उनके काम करवाने के एवज में उनसे पैसे मांगता था. आरोपी ने फेसबुक पर अलग-अलग नामों से प्रोफाइल बना रखी थीं. इनमें इंजीनियर सुनील मीणा, इंजीनियर सुनील शर्मा और इंजीनियर विजय शर्मा जैसी पहचान शामिल है.
RTU में काम करने का करता दावा
आरोपी खास तौर पर इंजीनियरिंग बैकग्राउंड वाले लोगों को फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजता था. इसके बाद वह खुद को पुराना परिचित, स्टूडेंट या कॉलेज से जुड़ा व्यक्ति बताकर बातचीत शुरू करता था. बातचीत के दौरान वह दावा करता था कि वह आरटीयू में पदस्थापित है और किसी का भी यूनिवर्सिटी से जुड़ा काम करवा सकता है. इसके बाद वह पीड़ित से किसी काम के बहाने पैसे लेता था.
आरोपी पीड़ित को डराता था कि उसने किसी गलत काम के लिए पैसे भेजे हैं और जिस व्यक्ति को पैसे भेजे गए हैं, उसे पुलिस ने पकड़ लिया है. इसके बाद वह गिरफ्तारी और मुकदमे का डर दिखाकर अतिरिक्त रकम वसूलता था. पुलिस के अनुसार आरोपी ने ठगी के लिए कई तरीके अपनाए. यूनिवर्सिटी में मार्क्स बढ़वाने, किसी का काम करवाने, नौकरी लगवाने, खुद को नर्सिंग ऑफिसर या स्पेशल स्टाफ पुलिसकर्मी बताकर लोगों से पैसे ऐंठने और पुलिस कार्रवाई रोकने के नाम पर रकम मांगने जैसे कई तरीकों से आरोपी ठगी करता था.
मुहाना निवासी ललित को लगाई लंबी चपत
वह बिटकॉइन से जुड़े पैसे निकलवाने का झांसा देकर भी लोगों को निशाना बनाता था. पुलिस के अनुसार आरोपी खास तौर पर सट्टा कारोबार से जुड़े लोगों को डराता था और खुद को सीएसटी या स्पेशल स्टाफ का पुलिसकर्मी बताकर मुकदमा दर्ज करने व गिरफ्तारी की धमकी देता था, फिर कार्रवाई से बचाने के नाम पर पैसे वसूलता था. मामला खुलासा तब हुआ, जब मुहाना निवासी और पूर्व एचओडी ललित गहलोत ने शिकायत दर्ज कराई. ललित के अनुसार फेसबुक पर ‘इंजीनियर सुनील मीणा' के नाम से आई फ्रेंड रिक्वेस्ट के जरिए आरोपी ने खुद को उनका पुराना छात्र बताया और आरटीयू में काम करने का दावा करते हुए किसी का काम करवाने के नाम पर 62 हजार रुपये ले लिए.

बाद में दस्तावेज भेजने के बहाने घर की लोकेशन ली गई और अगले दिन एक व्यक्ति उनके घर पहुंचकर खुद को गांधीनगर थाने का पुलिसकर्मी बताने लगा. उसने डराया कि गलत काम के लिए पैसे भेजने के कारण उन्हें जेल जाना पड़ सकता है, जिसके बाद भय के चलते उनसे और उनकी पत्नी से 60 हजार रुपये और ले लिए गए. ठगी का अहसास होने पर पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क किया और मुहाना थाने में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की. पुलिस टीम ने सबसे पहले घटनास्थल के CCTV फुटेज खंगाले. फुटेज में एक व्यक्ति पीड़ित के घर आता हुआ दिखाई दिया.
2 दर्जन से अधिक वारदात में शामिल आरोपी
इसके बाद पुलिस ने आरोपी की पहचान के लिए फुटेज हासिल किए और तकनीकी जांच शुरू की. पीड़ित से कथित इंजीनियर सुनील मीणा की फेसबुक आईडी के जरिए संपर्क और उपलब्ध डिजिटल डेटा की भी जांच की गई. तकनीकी जानकारी और मुखबिर की सूचना के आधार पर संदिग्ध की पहचान अरुण शर्मा, निवासी ब्रह्मपुरी के रूप में हुई. इसके बाद पुलिस टीम ने तकनीकी सहयोग से आरोपी की तलाश की, उसे डिटेन किया और पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया.
पुलिस के मुताबिक पूछताछ में आरोपी ने करीब दो दर्जन वारदातों को अंजाम देना कबूल किया है. पुलिस का कहना है कि आरोपी पहले भी कई मामलों में जेल जा चुका है और जमानत पर बाहर आने के बाद कथित तौर पर इसी तरह की वारदातें करता रहा. पुलिस अब उसके पुराने रिकॉर्ड को खंगाल रही है और पूछताछ के आधार पर अन्य मामलों का खुलासा करने की कोशिश कर रही है. पुलिस के अनुसार पूछताछ में आरोपी द्वारा ठगी की कई वारदातों का खुलासा हुआ है. उसने ब्रह्मपुरी के गिर्राज सिंह से नौकरी लगवाने के नाम पर 2.50 लाख रुपये, गलतागेट के सुभाष से 1.50 लाख रुपये और रामनगरिया के अम्बर व अभिनव से आरटीयू में मार्क्स बढ़वाने के नाम पर क्रमशः 62 हजार और 34 हजार रुपये लिए.
इसके अलावा फर्जी पुलिसकर्मी बनकर सट्टे के मुकदमे का डर दिखाते हुए विजय से 25 हजार, अनु सिंधी से 90 हजार और राहुल सिंह से 60 हजार रुपये ऐंठे. मुहाना के ललित गहलोत से यूनिवर्सिटी का काम करवाने और बाद में फर्जी पुलिसकर्मी बनकर कुल 1.21 लाख रुपये, जबकि नर्सिंग ऑफिसर बनकर राहुल से 4,500 रुपये, बिटकॉइन के पैसे निकलवाने के नाम पर 50 हजार रुपये और अन्य लोगों से 10 हजार से 35 हजार रुपये तक की ठगी की गई. पुलिस के मुताबिक आरोपी ने कई अन्य वारदातों की जानकारी भी दी है, जिनका रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है. अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह में उसके साथ और कौन-कौन लोग शामिल हैं.
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