जयपुर में रोबोट बनाने वाली कंपनी से जुड़े एक मामले में चार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है. कंपनी की गोपनीय तकनीक, मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जानकारी के कथित दुरुपयोग, कंपनी के नाम पर लेनदेन और देनदारों की रकम निजी खाते में ट्रांसफर कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं. कंपनी के निदेशक भुवनेश मिश्रा की शिकायत के आधार पर कोर्ट के आदेश के बाद शिवदासपुरा थाने में एफआईआर दर्ज हुई है.
कंपनी का डीप-टेक रोबोट निर्माण का काम
शिकायत के मुताबिक उनकी कंपनी क्लब फर्स्ट रोबोटिक्स (Club First Robotic Pvt. Ltd.) डीप-टेक रोबोट निर्माण के क्षेत्र में काम करती है. आरोप है कि कंपनी के एक कर्मचारी के पास आधिकारिक लैपटॉप, मोबाइल, सॉफ्टवेयर, रोबोट निर्माण की तकनीक, कोडिंग से जुड़ी जानकारी और कंपनी के देनदारों का डेटा उपलब्ध था. शिकायत में बताया गया है कि वह कर्मचारी 13 मई 2026 से बिना सूचना के कंपनी से गायब था.
दूसरे को बेचा कंपनी का सिस्टम, मशीनरी
इसके बाद कंपनी ने उसे टर्मिनेट कर नोड्यूज की प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा. आरोप है कि इसके बावजूद कर्मचारी ने कंपनी का लैपटॉप, मोबाइल, दस्तावेज, मशीनरी और अन्य सामान वापस नहीं किया. इसके अलावा कंपनी के देनदारों से संपर्क कर बकाया राशि अपने बैंक खाते में ट्रांसफर कराने का भी आरोप लगाया गया है. शिकायतकर्ता का दावा है कि कंपनी के फोन की सिम उसके कब्जे में आने और उसे रिस्टोर कराने के बाद कथित लेनदेन से जुड़े कुछ सबूत सामने आए. आरोप है कि सिम में कंपनी के देनदारों से रकम निजी खाते में ट्रांसफर कराने से संबंधित जानकारी मौजूद थी.
कंपनी की गोपनीय तकनीक दूसरे से साझा करने का आरोप
यह भी आरोप लगाया गया है कि कर्मचारी ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर कंपनी की गोपनीय तकनीक और उपकरणों से जुड़ी जानकारी साझा की. शिकायत में Monstar Truck Wheel, MK-15 Remote और उसके पार्ट्स, कैमरा मॉड्यूल्स, LiDAR सेंसर, UGV जिना समेत कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का जिक्र किया गया है.
उसकी तकनीकी का इस्तेमाल कर दूसरी मशीन बनाने की कोशिश
कंपनी का आरोप है कि उसके पार्ट्स और तकनीकी जानकारी का इस्तेमाल दूसरी मशीन तैयार करने के प्रयास में किया गया. शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि कंपनी को बिना जानकारी दिए उसके स्रोत और मशीन निर्माण से संबंधित जानकारी अन्य लोगों तक पहुंचाई गई. शिकायत के अनुसार कंपनी के फर्जी लेटरहेड और कोटेशन का इस्तेमाल कर कंपनी के नाम पर कथित तौर पर लेनदेन किए गए और रकम प्राप्त की गई.
FIR में मोहनलाल चौधरी, रोहित सोलंकी, देवेश उपाध्याय और विकास को आरोपी बनाया गया है. हालांकि, FIR में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी. यह कंपनी सेना से जुड़ा काम भी करती है. शिकायतकर्ता के मुताबिक उसने पहले शिवदासपुरा थाने में मामला दर्ज कराने का प्रयास किया था, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई. इसके बाद कोर्ट में परिवाद पेश किया गया. कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू की है.
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