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मोर्चरी में गुरु की लाश देख चीड़-फाड़ करने वाले डॉक्‍टरों के कांप गए हाथ, बोले- कलेजे पर छुरी नहीं चला पाएंगे

जयपुर के सवाई मानस‍िंह (SMS) मेड‍िकल कॉलेज के सीन‍ियर प्रोफेसर डॉ. नंदलाल ड‍िसान‍िया (58) की लाश मोर्चरी पहुंची तो चीड़-फाड़ करने वाले डॉक्‍टरों के हाथ कांप गए. 

मोर्चरी में गुरु की लाश देख चीड़-फाड़ करने वाले डॉक्‍टरों के कांप गए हाथ, बोले- कलेजे पर छुरी नहीं चला पाएंगे
पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर मोर्चरी में अपने गुरु के लाश देखा तो फफक पड़े.
NDTV Reporter

जयपुर के एसएमएस अस्‍पताल के मोर्चरी में बुधवार का द‍िन बहुत ही भावुक कर देने वाला रहा. रोज लाशों की चीड़-फाड़ करने वाले डॉक्‍टर अपने गुरु डॉ. नंदलाल ड‍िसान‍िया की लाश टेबल पर देखा तो अपने आंसू नहीं रोक पाए और रोने लगे. उनके शव को देख डॉक्टर्स से लेकर वार्ड बॉय तक की आँखें नम नजर आईं.  डॉ. डी. के. शर्मा ने बताया कि जब मोर्चरी में पोस्टमार्टम करने के लिए उनका शव आया तो कोई भी डॉक्टर तैयार नहीं था. सबका कहना था हम अपने गुरु के कलेजे पर छुरी नहीं चला पाएंगे. सभी डॉक्टरों ने कहा, "आज हमसे मत कराइए... हम अपने गुरु के कलेजे पर कटर-छुरी नहीं चला पाएंगे." 

"शव दूसरे अस्पताल भेजने का आया विचार"

डॉ. डी. के. शर्मा ने बताया कि एक बार तो ख्याल आया कि पोस्टमार्टम किसी दूसरे सरकारी अस्पताल में ट्रांसफर कर दें.  हालांकि, फिर साथियों से बात की. उन्हें समझाया और मेडिकल बोर्ड का गठन किया. मेडिकल बोर्ड में शामिल डॉ. दीपाली ने बताया, "हमने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन अपने ही एचओडी पर हमें कटर और छुरी चलानी पड़ेगी.  जीवन में ऐसा पहली बार हुआ, जब पोस्टमार्टम करते वक्त हमारे हाथ कांप रहे थे."  

डॉक्टर बोले, "सामने हमारे गुरु थे.  जिनसे हमने सब कुछ सीखा.  कई बार जिन्होंने हमें समझाया. आज उनका ही पोस्टमार्टम करने के लिए खुद को समझना पड़ रहा था." 

"मैंने जीवन में नहीं सोचा था..."

नंदलाल डिसानिया के सहयोगी डॉ. सुमंत दत्ता ने बताया, "हम 1996 से साथ काम कर रहे हैं.  वह हर रोज सुबह सभी को गुड मॉर्निंग मैसेज करते थे. अपने काम के साथ अच्छा सामाजिक व्यवहार रखते थे.  अपने प्रयासों से उन्होंने एसएमएस में प्रदेश की पहली 'पॉइजन डिटेक्शन एंड ड्रग लेवल लैब' तैयार करवाई थी. मैंने जीवन में कभी नहीं सोचा था कि जिस साथी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर 30 साल तक हजारों पोस्टमार्टम किए, एक दिन उसी का पोस्टमार्टम अपनी आंखों से देखना पड़ेगा." 

डॉ. नंद लाल डिसानिया ने कर लिया था सुसाइड 

एसएमएस अस्पताल में मेडिकल कॉलेज में फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के हेड डॉ. नंद लाल डिसानिया बुधवार सुबह आत्महत्या कर ली थी. सुबह 6 बजे उनका बेटा अविनाश अपनी बहन को लेकर एयरपोर्ट गया था. सुबह 6 बजे उन्होंने सामान्य रूप से ही अपनी बेटी को अलविदा कहा था, लेकिन जब बेटा अविनाश वापस लौटा तो पिता को फांसी के फंदे से लटका देखा. वह उन्हें तुरंत एक निजी अस्पताल लेकर गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

कई दिनों से डिप्रेशन में थे 

पुलिस ने घर की तलाशी ली तो पता चला कि वे पिछले कई दिनों से डिप्रेशन में थे. उनकी डिप्रेशन की दवाई भी चल रही थी. 5 जुलाई को हो उन्होंने मनोचिकित्सक को दिखाया था. अब उनके परिवार में पत्नी, चार बेटियां और एक बेटा है. उनका बेटा अविनाश भी डॉक्टर है, जहां एक ओर एक पूरा परिवार इस दुख की घड़ी में था. वहीं, सवाई मानसिंह अस्पताल के डॉक्टर भी इस बात से दिन भर परेशान रहे.  

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