राजस्थान के निकाय चुनाव में इस बार सिर्फ पुराने राजनीतिक चेहरे ही नहीं, बल्कि Gen Z भी चुनावी मैदान में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस, दोनों ही पार्टियों ने युवा वोटर्स के साथ-साथ युवा उम्मीदवारों पर भी बड़ा दांव लगाया है. राजस्थान के 309 नगर निकायों—नगर पालिका, नगर परिषद और नगर निगम में करीब 1.40 करोड़ मतदाता हैं. इनमें 18 से 25 वर्ष की उम्र के युवा मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 14.7 फीसदी है, जबकि 26 से 35 वर्ष की उम्र के मतदाता करीब 25.4 फीसदी हैं. यानी 35 साल तक के मतदाताओं की संख्या चुनावी नतीजों पर खासा असर डाल सकती है.
युवाओं के इस बड़े वोट बैंक को देखते हुए BJP और कांग्रेस दोनों ने टिकट वितरण में युवा चेहरों को जगह दी है. उपलब्ध टिकट आंकड़ों के मुताबिक, दोनों प्रमुख दलों के लगभग हर दूसरे उम्मीदवार की उम्र 40 साल तक है. BJP ने करीब 51 फीसदी और कांग्रेस ने 49 फीसदी युवा उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है.
5 शहरों में 70 जेन ज़ी उम्मीदवार
जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, अजमेर और कोटा जैसे प्रमुख शहरों में भी दोनों दलों ने युवा चेहरों पर भरोसा जताया है. इन प्रमुख नगर निगमों में 510 वार्ड टिकटों में से BJP और कांग्रेस ने मिलकर 70 Gen Z उम्मीदवारों को टिकट दिया है. इन उम्मीदवारों की उम्र 21 से 29 वर्ष के बीच है.
इन दिनों अलवर के देहात में एक युवा महिला सलवार कुर्ता और वॉकिंग शूज पहनकर चुनाव प्रचार करती दिखाई देती है. 21 साल की नेहा जोशी कुछ दिन पहले एक टेलीविज़न चैनल में पत्रकार थी अब उसने थानागाजी से ताल ठोकी है. पत्रकारिता की पढ़ाई कर चुकीं और कुछ चर्चित टीवी चैनलों पर काम कर चुकीं नेहा अब थानागाजी नगर पालिका से BJP के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं.

अलवर से बीजेपी उम्मीदवार नेहा जोशी
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सलवार-कुर्ता और वॉकिंग शूज़ में नेहा चुनाव प्रचार के लिए इलाके में घूमती नजर आती हैं. कभी वह बुजुर्गों के साथ चारपाई पर बैठकर बातचीत करती हैं तो कभी पशुओं के लिए घास काट रही महिलाओं के पास पहुँच जाती है तो कभी खेती-किसानी से जुड़ी महिलाओं से मिलकर उनकी समस्याएं समझती हैं.
नेहा कहती हैं,"इस चुनाव में गांव के मुद्दे ही महत्वपूर्ण हैं, सफाई की बड़ी समस्या है , जहाँ से पीने का पानी भर रहे है , जहां प्याऊ है वहां गंदी नालियां है, सड़कें, बिजली नहीं है. हम सोचते है वार्ड पार्षद का mla इन् समस्याओं का समाधान करे तो मैंने सोचा क्यों नहीं मैं खुद से ही शुरुआत करूं , अगर बदलाव की नीति लानी है तो खुद से शुरू करो , मेरी कोई बाहर की टीम नहीं है. मेरी टीम ही मेरा गांव है और इसका परिणाम अच्छा होगा."
नेहा का जुड़ाव थानागाजी से है, जबकि उनकी परवरिश अलवर में हुई. उन्होंने जयपुर की हरदेव जोशी यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई की और छात्र राजनीति में भी सक्रिय रहीं.

खुशबू आचार्य RAS की तैयारी छोड़ राजनीति में आई हैं
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CA छात्रा राजनीति के मैदान में
अलवर के देहात से दूर जयपुर शहर में भी कई युवा प्रत्याशी हैं. जैसे BJP ने 21 साल की पलक यादव पर दांव खेला है. जयपुर के विद्याधर नगर के वार्ड नंबर 10 से BJP ने पलक यादव को उम्मीदवार बनाया है. पलक महारानी कॉलेज की छात्रा हैं और CA की पढ़ाई भी कर रही हैं. यह उनका पहला चुनाव है. प्रचार के दौरान उनकी मां और भाई भी उनके साथ नजर आते हैं.
पलक का इंटरव्यू होते देख भाई बीच में आ जाता है, कहता है मेरा भी इंटरव्यू लो. पलक कहती है भैय्या चुनाव तो मैं लड़ रही हूं. यानी चुनाव प्रचार भाई बहन के रिश्ते की मिठास के बीच ही चल रहा है.
पलक का चुनावी अभियान महिलाओं और स्थानीय मतदाताओं के बीच सीधा संपर्क बनाने पर केंद्रित है. मम्मी और भैय्या टीम का अहम हिस्सा हैं. और पूर्व निर्दलीय पार्षद कमलेश यादव ने चुनावी प्रचार की बागडोर संभाली है. आस पड़ोस के लोग पलक से मिलकर खुश होते हैं और कहते हैं कि मोहल्ले की बच्ची कुछ अच्छा करके दिखा सकती है.

बाड़मेर में कांग्रेस की युवा उम्मीदवार खुशबू आचार्य
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RAS की तैयारी करनेवाली उम्मीदवार
वहीं पश्चिमी राजस्थान के एक कोने में खुशबू आचार्य RAS की तैयारी छोड़ राजनीति में आई हैं. बाड़मेर में कांग्रेस की युवा उम्मीदवार खुशबू आचार्य ने RAS की तैयारी छोड़कर राजनीति का रास्ता चुना है. उनके पिता पूर्व पार्षद रह चुके हैं और लंबे समय से कांग्रेस की विचारधारा से जुड़े रहे हैं.
खुशबू के चुनावी मुद्दों में पेपर लीक, युवाओं के लिए समय पर भर्ती कैलेंडर जारी नहीं होना और सरकारी सिस्टम में सुधार प्रमुख हैं. उनका मानना है कि राजनीतिक बदलाव में युवाओं की भागीदारी बढ़नी चाहिए और डिजिटल तकनीक के जरिए आम लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाया जा सकता है.
खुशबू कहती हैं,"जेन जी के साथ डिजिटल तकनीक और AI का भी इस्तेमाल होना चाहिए. मैं देखती हूं कि लोग छोटी सी समस्या का हल करने के लिए लंबी क़तारों में खड़े रहते हैं. डिजिटल युग में इस सब का समाधान AI से हो सकता है, लोगों को लंबी लाइन में क्यों लगना पड़ता है?"
सोशल मीडिया बना Gen Z की राजनीति का नया मैदान
Gen Z और युवा मतदाताओं तक पहुंचने के लिए BJP और कांग्रेस दोनों डिजिटल माध्यमों पर भी फोकस कर रही हैं. कांग्रेस ने युवाओं से सीधे संवाद के लिए 'GenZ for Change' अभियान शुरू किया है. पार्टी का सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म विभाग इस अभियान के जरिए डिजिटल दुनिया में सक्रिय युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा है.
वहीं BJP Gen Z शब्द के बजाय 'युवा वर्ग' पर जोर दे रही है. पार्टी ने जिला और मंडल स्तर पर सोशल मीडिया नेटवर्क तैयार किया है, जहां रील आधारित कंटेंट के जरिए युवाओं तक पहुंच बनाने की रणनीति अपनाई जा रही है.
यानी चुनाव प्रचार अब सिर्फ पोस्टर, बैनर और नुक्कड़ सभाओं तक सीमित नहीं है. इंस्टाग्राम रील्स और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म भी स्थानीय चुनावी प्रचार का अहम हिस्सा बन चुके हैं.

उम्मीदवार घर-घर जाकर प्रचार कर रहे हैं
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अजमेर में भी युवा उम्मीदवारों की मजबूत मौजूदगी
अजमेर नगर निगम चुनाव में BJP और कांग्रेस ने अनुभवी चेहरों के साथ युवा उम्मीदवारों को भी मौका दिया है. बड़ी संख्या में युवा निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनावी मैदान में हैं.
वार्ड नंबर 8 से BJP के 24 वर्षीय पंकज सिंह राठौड़ चुनाव लड़ रहे हैं. उनका फोकस स्थानीय विकास और लोगों की समस्याओं के समाधान पर है.
वहीं वार्ड नंबर 48 से कांग्रेस के 24 वर्षीय मोक्ष मैदान में हैं. उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना और स्थानीय समस्याओं का समाधान उनकी प्राथमिकता है.
वार्ड नंबर 40 से निर्दलीय उम्मीदवार काम्या सांखला भी स्थानीय मुद्दों को लेकर मतदाताओं के बीच पहुंच रही हैं. सफाई व्यवस्था और गंदगी जैसे मुद्दे उनके अभियान के केंद्र में हैं.
जोधपुर में भी युवाओं पर भरोसा
जोधपुर नगर निगम चुनाव में BJP ने 7 और कांग्रेस ने 10 युवा उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है. ये उम्मीदवार डोर-टू-डोर कैंपेन के जरिए विकास और स्थानीय समस्याओं के मुद्दे पर वोट मांग रहे हैं.
कांग्रेस की सबसे युवा उम्मीदवारों में झालामंड के वार्ड नंबर 51 से सरस्वती प्रजापति शामिल हैं. वह भारतीय प्रशासनिक सेवा की तैयारी कर रही हैं. उनके मुताबिक इलाके में पेयजल, सड़क, सीवरेज और स्ट्रीट लाइट जैसी समस्याएं प्रमुख हैं.
BJP ने वार्ड नंबर 24 से 24 वर्षीय भाग्यश्री आचार्य को टिकट दिया है. भाग्यश्री पॉलिटिकल साइंस में MA कर रही हैं. उनका कहना है कि पार्टी ने युवा शक्ति पर भरोसा जताया है और वह इस भरोसे पर खरा उतरने की कोशिश करेंगी.

जोधपुर से कांग्रेस उम्मीदवार सरस्वती प्रजापत IAS परीक्षा की तैयारी कर रही हैं
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क्या Gen Z बदलेगी राजस्थान की स्थानीय राजनीति?
राजस्थान के निकाय चुनाव में युवा उम्मीदवारों की बढ़ती संख्या बताती है कि स्थानीय राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव की शुरुआत हो चुकी है. BJP और कांग्रेस दोनों के लिए युवा वोटर्स एक बड़ा चुनावी वर्ग हैं और दोनों पार्टियां उन्हें साधने के लिए जमीन से लेकर सोशल मीडिया तक अपनी रणनीति बदल रही हैं.
लेकिन सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि Gen Z कितने वोट देगी. सवाल यह भी है कि क्या Gen Z के उम्मीदवार स्थानीय राजनीति में नए मुद्दे, नई सोच और काम करने का नया तरीका लेकर आ पाएंगे?
इस बार राजस्थान के निकाय चुनाव में Gen Z सिर्फ वोट बैंक नहीं, बल्कि सियासत का नया चेहरा भी है. अब देखना होगा कि इन युवाओं की चुनावी एंट्री स्थानीय राजनीति की तस्वीर कितनी बदल पाती है.
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