- श्रीगंगानगर में देश का पहला किन्नू सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा.
- इस सेंटर का उद्देश्य किन्नू की गुणवत्ता सुधारने, उत्पादन बढ़ाने और नई वेरायटी विकसित करना होगा
- टांटिया ग्रुप सरकार के साथ मिलकर सेंटर बनाएगा जहां किन्नू किसानों की आमदनी बढ़ाने पर काम होगा
श्रीगंगानगर के किन्नू को अब देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी नई पहचान दिलाने की तैयारी की जा रही है. इसके लिए गंगानगरी किन्नू की मिठास और खास पहचान को अब वैज्ञानिक रिसर्च का सहारा मिलने जा रहा है.राजस्थान सरकार ने जिले में किन्नू का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा जो देश में ऐसा पहला सेंटर होगा. हाल ही में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने वर्चुअल रूप से इसका शिलान्यास किया. केंद्र सरकार की राष्ट्रीय कृषि योजना के तहत यह सेंटर अनुदानित होगा. सेंटर में किन्नू की गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ाने के साथ रिसर्च, नई वेरायटी, किसानों की ट्रेनिंग और एक्सपोर्ट पर भी फोकस रहेगा.
किसानों की कमाई बढ़ाने की कोशिश
राजस्थान सरकार ने जिले में किन्नू का सेंटर फॉर प्रमोशन ऑफ किन्नू यानी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की जिम्मेदारी टांटिया ग्रुप को सौंपी है. टांटिया ग्रुप के वाइस चेयरपर्सन डॉ. मोहित टांटिया के मुताबिक, श्रीगंगानगर के किन्नू की मिठास और गुणवत्ता इसे दूसरे फलों से अलग बनाती है, लेकिन किसानों को अब तक इसका अपेक्षित बाजार और कीमत नहीं मिल पाई है.

किन्नू की नई वेरायटी विकसित करने का प्रयास किया जाएगा
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सेंटर के जरिए वैज्ञानिकों के साथ मिलकर किन्नू की बागवानी को आगे बढ़ाने, नई वेरायटी तैयार करने और एक्सपोर्ट की संभावनाओं पर काम किया जाएगा. साथ ही ऐसे पौधे तैयार करने की कोशिश होगी, जिन्हें किसानों को उपलब्ध कराया जा सके और फल प्राप्त करने के लिए चार साल तक इंतजार न करना पड़े.

वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि नई किस्मों से किसानों को जल्दी फसल मिलेगी
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सेंटर में रिसर्च के साथ ट्रेनिंग
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में किन्नू की क्वालिटी और क्वांटिटी बढ़ाने के लिए रिसर्च के साथ किसानों को आधुनिक तकनीक की ट्रेनिंग भी दी जाएगी. टांटिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. एम.एम. सक्सेना का कहना है कि वैज्ञानिक रिसर्च के जरिए उत्पादन बढ़ाने के साथ किन्नू की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है. नई तकनीकों और नई किस्मों पर काम होने से किसानों को बेहतर विकल्प मिलेंगे. सेंटर के कृषि विद्यार्थियों के लिए भी व्यावहारिक ज्ञान का महत्वपूर्ण केंद्र बनने की उम्मीद है.

हॉर्टिकल्चर विभाग की उपनिदेशक प्रीति गर्ग
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हॉर्टिकल्चर विभाग की उपनिदेशक प्रीति गर्ग के मुताबिक सेंटर को सरकारी अनुदान से विकसित किया जाएगा. सेंटर में होने वाला रिसर्च और किसानों के लिए प्रस्तावित प्रशिक्षण निश्चित रूप से क्षेत्र के बागवानों के लिए फायदेमंद साबित होगा. उत्पादन से लेकर गुणवत्ता और आधुनिक तकनीक तक, किन्नू की खेती को वैज्ञानिक आधार देने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

किन्नू किसान शिवप्रकाश ने सेंटर से लाभ होने की उम्मीद जताई
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किसानों को उम्मीद
किन्नू की खेती से जुड़े किसान भी सरकार की इस पहल को उम्मीदों से जोड़कर देख रहे हैं. किसान शिवप्रकाश सहारन ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने के लिए राजस्थान सरकार का आभार जताते हुए कहा कि इससे किन्नू पर रिसर्च का दायरा बढ़ेगा. नई तकनीक और वैज्ञानिक जानकारी मिलने से पैदावार बढ़ने के साथ क्वालिटी का उत्पादन भी बेहतर होगा. उनका मानना है कि सेंटर बनने से श्रीगंगानगर के बागवानों को सीधा फायदा मिलेगा और किन्नू की खेती को नई दिशा मिलेगी.
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