राजस्थान हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक मामले में बड़ा आदेश दिया है. कोर्ट ने अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (AVVNL) को निर्देश दिया है कि कर्मचारी की विधवा की नियमित मासिक सैलरी से 25 फीसदी राशि काटकर सीधे उसकी सास के बैंक खाते में जमा कराई जाए.
दरअसल, महिला ने अनुकंपा नियुक्ति पाने के दौरान यह वादा किया था कि वह अपने ससुराल के अन्य सदस्यों, खासकर सास-ससुर की देखभाल और भरण-पोषण का दायित्व संभालेगी. लेकिन नौकरी मिलने के बाद वह अपना ससुराल छोड़कर अलग रहने लगी.
मृतक की मां ने हाईकोर्ट में याचिका लगाकर बताया कि नौकरी मिलने के कुछ समय बाद उनकी बहू ने सास-ससुर की देखभाल करना बंद कर दिया. वह ससुराल छोड़कर अलग रहने लगी और बाद में उसने दूसरी शादी भी कर ली.
याचिका में कहा गया कि पति की मृत्यु के बाद परिवार आर्थिक संकट में था, लेकिन अनुकंपा नियुक्ति मिलने के बावजूद बुजुर्ग सास को आर्थिक और अन्य सहायता नहीं मिली.
2017 में हुई थी कर्मचारी की मौत
मामला अजमेर विद्युत वितरण निगम में कार्यरत एक कर्मचारी से जुड़ा है, जिसकी 2017 में सेवा के दौरान मृत्यु हो गई थी. कर्मचारी की मौत के बाद निगम ने परिवार को बताया कि सरकारी नियमों के तहत परिवार के किसी पात्र सदस्य को अनुकंपा के आधार पर नौकरी दी जा सकती है.
परिवार में चर्चा के बाद यह तय हुआ कि मृतक की पत्नी को अनुकंपा नियुक्ति दिलाई जाए. बताया गया कि मृतक के माता-पिता ने भी इस व्यवस्था पर सहमति जताई थी. इसके पीछे यह समझ थी कि नौकरी मिलने के बाद बहू उनके भरण-पोषण और देखभाल की जिम्मेदारी संभालेगी.
अनुकंपा नियुक्ति सिर्फ विधवा के लिए व्यक्तिगत लाभ नहीं
राजस्थान हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य मृत सरकारी कर्मचारी की अचानक मृत्यु के बाद उसके परिवार को पैदा हुई तत्काल आर्थिक कठिनाइयों से उबारना है. इसका मकसद परिवार को आर्थिक सहारा उपलब्ध कराना है, न कि इसे केवल मृत कर्मचारी की विधवा के व्यक्तिगत लाभ के रूप में देखा जाए.
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि लागू नियमों के तहत 'परिवार' की अवधारणा केवल विधवा तक सीमित नहीं है. इसमें मृत कर्मचारी के माता-पिता और नियमों में शामिल अन्य पात्र सदस्य भी आते हैं.
नौकरी लेते समय किया था देखभाल का वादा
कोर्ट ने विशेष रूप से उस हलफनामे का उल्लेख किया, जो महिला ने अनुकंपा नियुक्ति हासिल करते समय दिया था. इसमें उसने अपने दिवंगत पति के परिवार के अन्य सदस्यों, जिसमें उसके सास-ससुर भी शामिल थे, की देखभाल और भरण-पोषण करने की जिम्मेदारी स्वीकार की थी.
हाईकोर्ट ने कहा कि जब महिला ने इसी वचन के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति का लाभ हासिल किया, तो बाद में वह उस जिम्मेदारी से पूरी तरह अलग नहीं हो सकती. कोर्ट ने टिप्पणी की कि पति की मृत्यु के बाद बहू ने अनुकंपा नियुक्ति हासिल की और उसके बाद बुजुर्ग ससुराल वालों को छोड़कर उन्हें उनके हाल पर नहीं छोड़ा जा सकता.
सैलरी से 25% सास को देने का आदेश
मामले की परिस्थितियों को देखते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने AVVNL को निर्देश दिया कि महिला की नियमित मासिक सैलरी का 25 फीसदी हिस्सा काटकर सीधे उसकी सास के बैंक खाते में जमा कराया जाए.
इसके अलावा कोर्ट ने मृत कर्मचारी को मिलने वाले टर्मिनल बेनिफिट्स को भी दोनों के बीच बराबर बांटने का निर्देश दिया. इसके तहत 50 फीसदी राशि विधवा को और 50 फीसदी राशि मृत कर्मचारी की मां को देने का आदेश दिया गया.
याचिकाकर्ता की ओर से वकील अमितराज कौशल ने बताया कि इस मामले में कोर्ट के आदेश का मुख्य आधार महिला की ओर से अनुकंपा नियुक्ति लेते समय दिया गया वचन और अनुकंपा नियुक्ति योजना का मूल उद्देश्य रहा.
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