जयपुर में निकाय चुनाव के दौरान एक तस्वीर ने हर किसी का दिल जीत लिया. झोटवाड़ा के वार्ड 23 स्थित मतदान केंद्र पर संसद हमले के वक्त एनएसजी कमांडो रहे देशराज वोट डालने पहुंचे. संसद में हमले के दौरान उनकी रीढ़ टूट गई थी, और पिछले करीब 22 वर्षों से वे बिस्तर पर हैं. शुक्रवार को देशराज पहले अपने बेटे की गोद में मतदान केंद्र पहुंचे और फिर व्हीलचेयर के सहारे बूथ तक गए. उन्हें देखते ही वहां मौजूद लोग सम्मान में खड़े हो गए. बूथ लेवल अधिकारी (BLO) ने उन्हें मतदान केंद्र के अंदर तक पहुंचाने में मदद की. देशराज ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर एक मिसाल कायम की.
शरीर लकवाग्रस्त हो गया
देशराज ने कहा, "देश के लिए लड़ते हुए मेरी रीढ़ टूट गई, और शरीर को लकवा हो गया, लेकिन हौसला नहीं टूटा. जब जवान सीमा पर देश के लिए लड़ सकते हैं, तो मैं घर बैठकर अपना वोट कैसे छोड़ सकता हूं? सरकारें आती-जाती रहेंगी, लेकिन एक फौजी का फर्ज वोट देना भी है."
सुबह से ही मतदान की तैयारी में लग गऐ थे
उनके बेटे के मुताबिक, पिता ने सुबह से ही मतदान की तैयारी शुरू कर दी थी. घर पर दिनभर कोई मौजूद नहीं था, इसलिए वे शाम को वोट डालने पहुंचे. बारिश के बीच भी उनका हौसला कम नहीं हुआ. नहाने, कपड़े पहनने और तैयार होने में करीब दो घंटे लगे, लेकिन वोट डालने का जुनून ऐसा था कि उन्होंने हार नहीं मानी.
बेटे की मदद से करते हैं काम
देशराज की जिंदगी आसान नहीं रही. कमर के नीचे का हिस्सा लकवाग्रस्त है और रोजमर्रा के कामों के लिए उन्हें बेटे की मदद लेनी पड़ती है. पत्नी के निधन के बाद अकेलेपन का दर्द भी उनके जीवन का हिस्सा बन गया है. इसके बावजूद लोकसभा चुनाव हो, विधानसभा चुनाव या निकाय चुनाव—देशराज हर बार मतदान करना नहीं भूलते.
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