एजेंटों के जरिए डंकी रूट से अमेरिका जाने के चक्कर में इथियोपिया में किडनैपिंग का शिकार बने गुजरात के महेसाणा के तीन युवक-युवतियों की घर वापसी की यह कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी है. एजेंट को 70 लाख रुपये देने के बाद जयपुर से दुबई और फिर वहां से कनाडा की फ्लाइट का सपना दिखाकर तीनों को इथियोपिया पहुंचा दिया गया, जहां उनका अपहरण कर लिया गया. आखिरकार इथियोपिया के अपहरणकर्ताओं के चंगुल में बंधक बने ऋत्विज जनसारी, ममता और मयूरी सुरक्षित अपने गांव वडसमा लौट आए हैं. मुंबई एयरपोर्ट से जब परिजन इन्हें लेकर घर पहुंचे तो लंबे समय से चल रही खौफनाक अनहोनी की आशंका खत्म हुई और परिवार के साथ पूरे गांव ने खुशी के आंसुओं में डूब कर उनका स्वागत किया.

Gujarat Youth Kidnapped: जब तीनों युवक मेहसाणा में अपने गांव लौटे तो पूरे गांव ने उसका स्वागत किया.
अमेरिका का सपना और धोखेबाज एजेंटों का 70 लाख का खेल
यह पूरा मामला गोजारिया के रहने वाले किरीटभाई चौहान के परिवार से जुड़ा है, जिनकी बेटी ममता का पति पहले से अमेरिका में है. अमेरिका जाने के लिए ममता का वीजा अलग-अलग वजहों से छह बार वीजा रिजेक्ट हो चुका है. इसके बाद परिवार ने कानूनी रास्ता छोड़कर एजेंटों का सहारा लिया. जब ममता ने अमेरिका जाने की सोची तो उसके साथ तो किरीटभाई दशरथभाई चौहान के साले का 23 वर्षीय बेटा ऋत्विक शैलेषभाई जनसारी और साली की 27 वर्षीय बेटी मयूरी संजयकुमार सोलंकी भी अमेरिका जाने को तैयारी करने लगी. इसके बाद परिवार ने डांगरवा के एजेंट अल्पेश और वडोदरा के भार्गव पटेल के साथ प्रति व्यक्ति 75 लाख रुपये में सभी को अमेरिका भेजने का सौदा किया. जिसके बाद परिवार ने अपनी जमा-पूंजी और दुकान की कमाई लगाकर करीब 70 लाख रुपये एडवांस में एजेंटों को सौंप भी दिए.

Gujarat Youth Kidnapped: जब तीनों युवकों का इथियोपिया में अपहरण हो गया तो उनकी भाभी ने गांव का पानी तब तक न पीने की मान्यता की जब तक वो वापस न आ जाएं. जब वे सकुशल लौटे तो भाभी ने पूरे उत्साह से उनका स्वागत किया.
इथियोपिया के GSF कैंप में ठहरने का सच
तीनों युवाओं को जयपुर से फ्लाइट कराकर पहले अबूधाबी और फिर वहां से इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा ले जाया गया था. वहां स्वाजीलैंड स्ट्रीट पर स्थित GSF कैंप में उनके ठहरने की व्यवस्था की गई थी. एजेंटों ने वहां उनके रहने के लिए एक महीने का ई-वीजा भी लिया था ताकि किसी को शक न हो. इसी कैंप से आगे उन्हें कनाडा भेजने का झांसा दिया जा रहा था और इसी दौरान उन्हें बंधक बना लिया गया.
कनाडा पहुंचने की झूठी खबर और फिरौती के लिए खान का कॉल
इथियोपिया के कैंप में ठहराने के बाद एजेंटों ने परिवार से झूठ बोलना शुरू कर दिया. उन्होंने दावा किया कि तीनों सुरक्षित कनाडा पहुंच चुके हैं और ममता से भी जबरन फोन करवाया गया. इसके तुरंत बाद तीनों के फोन बंद हो गए और 'खान' नाम के एक शख्स का फोन आया, जिसने तीनों को बंधक बनाने की बात कहकर एक करोड़ रुपये की फिरौती मांगी. एजेंट अल्पेश ने भी लांघणज पुलिस के सामने माना कि तीनों का इथियोपिया में अपहरण हो चुका है और इस साजिश के तार कई देशों से जुड़े हैं.
बिना फिरौती दिए हुई रिहाई, मन्नत पूरी होने पर गांव में जश्न
महसाणा की लांघणज पुलिस की तुरंत शुरू की गई जांच और सरकारी स्तर पर हुए प्रयासों के चलते अपहरणकर्ता दबाव में आ गए. राहत की बात यह रही कि उन्होंने बिना कोई पैसा लिए तीनों को छोड़ दिया. मुंबई पहुंचने की खबर मिलते ही परिजन उन्हें लेने भागे और गांव लाते ही ऋत्विज की भाभी ने अपना वह कड़ा व्रत तोड़ा जिसमें उन्होंने तीनों के सुरक्षित लौटने तक गांव का पानी न पीने की बाधा रखी थी. परिवार ने अपने घर के मंदिर के बाद पूरे गांव के साथ सधी माता मंदिर में दर्शन किए और उनकी सुरक्षित वापसी पर राहत की सांस ली.कुल मिलाकर यह सनसनीखेज मामला उन लोगों के लिए एक बहुत बड़ा सबक है जो एजेंटों के झूठे झांसे में आकर गैरकानूनी तरीकों से विदेश जाने का जानलेवा जोखिम उठाते हैं.
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