अलवर नगर निगम में सफाई कर्मियों के नियुक्ति पत्र का मामला अब बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है. मंगलवार शाम शुरू हुआ हंगामा बुधवार को उस वक्त और तेज हो गया, जब सफाई कर्मियों की आवाज जिला प्रशासन से होते हुए सीधे वन मंत्री संजय शर्मा तक पहुंची और मंत्री खुद कर्मचारियों के समर्थन में नगर निगम पहुंचकर धरने पर बैठ गए.
सफाईकर्मियों का आक्रोश बढ़ा
दरअसल, मंगलवार शाम बड़ी संख्या में सफाई कर्मी नियुक्ति पत्र जारी करने की मांग को लेकर नगर निगम पहुंचे थे. कर्मचारियों ने निगम आयुक्त से अपने नियुक्ति पत्र को लेकर स्पष्ट जवाब मांगा, लेकिन आरोप है कि उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला. इसी बीच आयुक्त के ट्रांसफर की जानकारी के बाद कर्मचारियों का आक्रोश और बढ़ गया.
वन मंत्री को बताई अपनी पीड़ा
बुधवार सुबह सफाईकर्मी वन मंत्री संजय शर्मा के निवास पर पहुंचे, और अपनी पूरी पीड़ा उनके सामने रखी. कर्मचारियों ने बताया कि करीब 6 महीने से वे नियुक्ति पत्र के लिए जिला कलेक्टर और नगर निगम अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं. कर्मचारियों का आरोप है कि राज्य सरकार के स्तर से आदेश होने के बावजूद उन्हें नियुक्ति पत्र नहीं दिए जा रहे हैं.
मामले की गंभीरता को देखते हुए वन मंत्री ने तत्काल जिला कलेक्टर से फोन पर बातचीत की. हालांकि, मंत्री के मुताबिक बातचीत से कोई संतोषजनक समाधान सामने नहीं आया. इसके बाद संजय शर्मा सीधे नगर निगम पहुंचे और कर्मचारियों के साथ धरने पर बैठ गए.

सफाइकर्मचारियों को नियुक्ति पत्र नहीं मिलने पर धरने पर बैठे मंत्री संजय शर्मा. NDTV
जिला कलेक्टर की कार्यशैली पर नाराजगी
धरने पर बैठे मंत्री ने प्रशासन पर तीखे सवाल खड़े करते हुए कहा, "जब सरकार के आदेश आ चुके हैं, तो कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र देने में आखिर रुकावट किस बात की है?" उन्होंने जिला कलेक्टर की कार्यशैली पर भी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि आम जनता की समस्याओं का समाधान नहीं होना गंभीर विषय है.
मंत्री ने वकीलों के नए भवन के मुद्दे को भी उठाया और आरोप लगाया कि वहां भी जिला प्रशासन की ओर से रुकावट पैदा की जा रही है. फिलहाल नगर निगम परिसर में मंत्री और सफाई कर्मियों का धरना जारी है.
खास बात यह है कि भाजपा सरकार में वन मंत्री का अपनी ही सरकार के प्रशासनिक तंत्र के खिलाफ इस तरह कर्मचारियों के साथ धरने पर बैठना पूरे मामले को बेहद गंभीर बना रहा है. अब नजर इस बात पर है कि सरकार इस विवाद में क्या कदम उठाती है और सफाई कर्मियों को नियुक्ति पत्र कब मिलते हैं.
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