2676 करोड़ रुपये के कथित Nexa Evergreen निवेश घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी सुभाष चंद्र बिजनोरिया उर्फ सुभाष चंद्र बिजारनिया को गिरफ्तार कर लिया है. ED के जयपुर जोनल कार्यालय ने 10 अगस्त को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 19 के तहत यह गिरफ्तारी की. एजेंसी का आरोप है कि इस नेटवर्क के जरिए हजारों निवेशकों से बड़ी रकम जुटाई गई और उसे विभिन्न कंपनियों एवं खातों के माध्यम से इधर-उधर घुमाया गया.
निवेशकों को बड़े मुनाफे का दिया गया लालच
ED की जांच राजस्थान पुलिस द्वारा दर्ज कई एफआईआर और चार्जशीट के आधार पर शुरू हुई थी. जांच में सामने आया कि Nexa Evergreen Group से जुड़े लोगों ने निवेशकों को भारी रिटर्न का वादा कर निवेश करने के लिए प्रेरित किया. निवेशकों को बताया गया कि उनकी रकम गुजरात के धोलेरा स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में जमीन विकास और प्लॉटिंग योजनाओं में लगाई जाएगी. इसके बदले 60 सप्ताह तक हर सप्ताह 3 प्रतिशत रिटर्न देने का दावा किया गया.
रेफरल नेटवर्क बनाकर जोड़े गए नए निवेशक
योजना को तेजी से फैलाने के लिए निवेशकों को नए लोगों को जोड़ने पर कमीशन और इनाम देने का लालच भी दिया गया. कथित तौर पर लैपटॉप, मोटरसाइकिल और कार जैसे आकर्षक पुरस्कार देने की बातें कही गईं. ED के अनुसार इसी मॉडल के आधार पर एक बड़ा मल्टी-लेवल रेफरल नेटवर्क तैयार किया गया, जिसके माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों का पैसा जुटाया गया.
कई कंपनियों के जरिए घुमाया गया पैसा
जांच एजेंसी का आरोप है कि सुभाष चंद्र बिजनोरिया और रणवीर बिजारनिया इस पूरे नेटवर्क को नियंत्रित कर रहे थे. दोनों ने अपने सहयोगियों और कुछ निवेशकों के नाम पर कई कंपनियां, एलएलपी, पार्टनरशिप फर्म और प्रोपराइटरशिप संस्थाएं बनाई थीं. इन संस्थाओं के बैंक खातों में निवेशकों की रकम जमा कराई जाती थी. बाद में वह रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर की जाती थी. ED को आशंका है कि नए निवेशकों से मिले पैसे का इस्तेमाल पुराने निवेशकों को रिटर्न देने के लिए किया जाता था. एजेंसी इसे पोंजी स्कीम जैसे मॉडल के रूप में देख रही है.
संपत्तियों और मनी ट्रेल की जांच तेज
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि रकम के वास्तविक स्रोत और स्वामित्व को छिपाने के लिए कई स्तरों पर वित्तीय लेनदेन किए गए. ED का आरोप है कि निवेशकों से जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल अचल संपत्तियां खरीदने में भी किया गया. अब एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि 2676 करोड़ रुपये की रकम किन खातों में पहुंची, कितनी राशि निवेशकों को लौटाई गई और कितनी संपत्तियों में लगाई गई.
पहले भी हो चुकी है बड़ी कार्रवाई
इस मामले में जून 2025 में ED ने जयपुर, सीकर, झुंझुनूं और अहमदाबाद समेत 25 ठिकानों पर छापेमारी की थी. तब एजेंसी ने 2.04 करोड़ रुपये नकद, कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए थे. इसके अलावा Nexa Group से जुड़े विभिन्न बैंक खातों और क्रिप्टो खातों में मौजूद करीब 15 करोड़ रुपये भी फ्रीज किए गए थे.
जांच जारी, और खुलासों की उम्मीद
सुभाष चंद्र बिजनोरिया की गिरफ्तारी के बाद ED अब पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है. एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस कथित निवेश घोटाले में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा निवेशकों के पैसे का अंतिम उपयोग कहां किया गया.
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