नागौर के मेड़ता क्षेत्र का डांगावास में वर्ष 2015 के बहुचर्चित डांगावास हत्याकांड मामले में बुधवार को एससी/एसटी विशिष्ट न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सभी 40 आरोपियों को आरोपों से बरी कर दिया. करीब 11 वर्ष तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले ने पूरे नागौर जिले सहित आसपास के क्षेत्र में व्यापक चर्चा का विषय बना दिया.
11 साल पहले 6 लोगों की हत्या
यह मामला मई 2015 में डांगावास गांव में जमीन विवाद को लेकर हुई हिंसक घटना से जुड़ा था, जिसमें 6 लोगों की दर्दनाक हत्या हो गई थी. घटना के बाद मामला प्रदेशभर में सुर्खियों में रहा, और इसकी सुनवाई एससी/एसटी विशिष्ट न्यायालय में चल रही थी.
साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर आया फैसला
फैसला सुनाए जाने के बाद बचाव पक्ष के अधिवक्ता कमल आचार्य, महिपाल लटियाल, महेंद्र चौधरी एवं बाबूलाल गोरा ने मीडिया को निर्णय की जानकारी दी. अधिवक्ताओं ने न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए इसे न्याय की जीत बताया, और कहा कि न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों एवं तथ्यों के आधार पर अपना निर्णय सुनाया है.
कोर्ट के फैसले के बाद गांव में खुशी
कोर्ट के फैसले के बाद डांगावास गांव में खुशी का माहौल देखने को मिला. ग्रामीणों ने एक-दूसरे का मुंह मीठा कराकर प्रसन्नता व्यक्त की. लंबे समय से फैसले का इंतजार कर रहे लोगों में निर्णय को लेकर विशेष उत्साह देखा गया. लगभग 11 वर्षों बाद आए इस फैसले की पूरे क्षेत्र में दिनभर चर्चा होती रही.
नागौर के डांगावास हत्याकांड में 11 साल बाद आया फैसला बेहद चिंताजनक है। 2015 में जमीन विवाद में 5 दलितों समेत 6 लोगों की निर्मम हत्या हुई थी, और अब एससी-एसटी विशेष अदालत ने सभी 40 आरोपियों को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया। पीड़ित परिवारों का सवाल जायज है, अगर 40 आरोपी बरी हो गए तो…
— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) August 6, 2026
पूर्व सीएम गहलोत ने उठाए सवा
राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाया. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, "नागौर के डांगावास हत्याकांड में 11 साल बाद आया फैसला बेहद चिंताजनक है. 2015 में जमीन विवाद में 5 दलितों समेत 6 लोगों की निर्मम हत्या हुई थी, और अब एससी-एसटी विशेष अदालत ने सभी 40 आरोपियों को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया. पीड़ित परिवारों का सवाल जायज है, अगर 40 आरोपी बरी हो गए तो इन 6 लोगों की हत्या आखिर किसने की?
"बीजेपी न्याय के पक्ष में नहीं"
11 साल की लंबी कानूनी लड़ाई, सीबीआई जांच और ट्रायल के बावजूद इंसाफ न मिलना जांच और अभियोजन की गंभीर खामियों की ओर इशारा करता है. भाजपा सरकार के शासन में 11 साल पहले ऐसी घटना होना, और अब उन्हीं के शासन में प्रतिकूल फैसला आना दिखाता है कि भाजपा न्याय के पक्ष में नहीं है. दलित समाज के साथ हुए इस अन्याय में जवाबदेही तय होनी चाहिए.
कांग्रेस हमेशा दलित समाज के सम्मान और अधिकारों के लिए खड़ी रही है. पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील की प्रक्रिया मजबूती से आगे बढ़नी चाहिए, राज्य सरकार को इसमें सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए.
(लाेकेश श्रीवास्तव की रिपोर्ट)
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