नशे के मुद्दे पर पंजाब की सियासत घूम रही है. पंजाब में मिशन 2027 से पहले डोप टेस्ट के नाम पर सियासी घमासान मच गया है. रविवार को सरकारी अस्पताल में कैबिनेट मंत्री और विपक्षी नेता आमने-सामने आ गए. एसएमओ के कमरे में माहौल गरमाता हुआ दिखाई दिया और पुलिस को बीच बचाव करना पड़ा. आम आदमी पार्टी की ओर से कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सौंध, पूर्व मंत्री गुरकीरत कोटली और अकाली दल नेता यादविंदर यादू अपना डोप टेस्ट करवाने के लिए समर्थकों के साथ सरकारी अस्पताल पहुंचे.
खन्ना की राजनीति में नशे के मुद्दे पर शुरू हुआ डोप टेस्ट चैलेंज रविवार को सरकारी अस्पताल में बड़े विवाद में बदल गया. दरअसल खन्ना से विधायक और पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंध ने एक कार्यक्रम में बयान दिया था कि पिछली सरकारों ने कोई विकास नहीं करवाया, इस पर अकाली दल के हलका इंचार्ज यादविंदर सिंह यादू और कांग्रेस के पूर्व मंत्री गुरकीरत सिंह कोटली ने उन्हें बहस और डोप टेस्ट का चैलेंज दे दिया. सभी दलों ने एक दूसरे का चैलेंज स्वीकार किया और आज सुबह ग्यारह बजे सिविल अस्पताल खन्ना में डोप टेस्ट का समय तय हुआ, तो तय समय से सब अस्पताल पहुंचे.

करीब ग्यारह बजे जब अकाली नेता यादविंदर सिंह यादू, कांग्रेस नेता गुरकीरत कोटली और भाजपा नेता अस्पताल पहुंचे तो उन्होंने नमूना लेने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए. विपक्ष का आरोप है कि आम आदमी के डोप टेस्ट के दौरान लैब में पुरुष सहायक मौजूद रहता है, ताकि नमूना बदला ना जा सके, लेकिन मंत्री के मामले में शीशी देकर उन्हें बंद कमरे में भेज दिया गया. साथ ही सवाल उठाया कि अस्पताल में अन्य लैब तकनीशियन मौजूद होने के बावजूद नमूना लेने के लिए महिला कर्मचारी की ड्यूटी क्यों लगाई गई.
इसी बात को लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कमरे में चारों दलों - आम आदमी पार्टी, अकाली दल, कांग्रेस और भाजपा के नेताओं के बीच तीखी बहस शुरू हो गई. देखते ही देखते माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि हाथापाई की नौबत आ गई. हालात बिगड़ते देख पुलिस अधिकारियों को हस्तक्षेप करना पड़ा और मंत्री सौंध को समर्थकों के साथ कमरे से बाहर निकाला गया, बाहर कार्यकर्ताओं ने एक दूसरे के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की.
मंत्री के जाने के बाद अकाली नेता यादविंदर सिंह यादू और पूर्व मंत्री गुरकीरत कोटली ने भी अपना डोप टेस्ट करवाया, दोनों की रिपोर्ट नकारात्मक आई.
खन्ना में डोप टेस्ट के बहाने शुरू हुई सियासत अब पीजीआई और अंबाला तक पहुंच गई है. अकाली नेता यादविंदर सिंह यादू ने मंत्री को पीजीआई और अंबाला में दोबारा टेस्ट कराने का चैलेंज दिया है, अब देखना होगा कि ये डोप टेस्ट की राजनीति मिशन 2027 तक क्या नया मोड़ लेती है.
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