- रणथंभौर टाइगर रिजर्व ने प्रदेश में बाघों की संख्या बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
- रणथंभौर टाइगर रिजर्व में अभी 77 बाघ-बाघिन और शावक हैं.
- बाघिन टी 16 मछली, रणथंभौर की क्वीन मानी जाती थी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान थी.
राजस्थान में बाघों की बढ़ती संख्या के पीछे रणथंभौर का बहुत बड़ा योगदान रहा है. रणथंभौर को बाघों की नर्सरी भी कहा जाता है. यह प्रदेश का ना सिर्फ सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है, बल्कि प्रदेश के अन्य टाइगर रिजर्वों को आबाद करने में भी रणथंभौर का महतवर्ण योगदान रहा है. चाहे अलवर का सरिस्का हो या कोटा का मुकुन्दरा या फिर बूंदी का रामगढ़ विषधारी टाईगर रिजर्व हो, रणथंभौर की बदौलत ही प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व आज बाघों से आबाद है .
रणथंभौर में अभी 77 बाघ-बाघिन और शावक
रणथंभौर में अभी 77 बाघ बाघिन और शावक हैं. पर समय-समय पर रणथंभौर से प्रदेश के अन्य टाइगर रिजर्वों में बाघ बाघिन शिफ्ट किए जाते रहे हैं. क्योंकि रणथंभौर सघन बाघ आबादी वाला टाइगर रिजर्व है. रणथंभौर में ऐसे कई बाघ बाघिन हुए हैं, जो न सिर्फ प्रसिद्ध रहे, बल्कि उन्होंने अंतराष्ट्रीय स्तर पर रणथंभौर की पहचान बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. रणथंभौर में ऐसे ही एक बाघिन हुई, जो रणथंभौर की क्वीन के नाम से जानी गई.
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रणथंभौर की सबसे चर्चित बाघिन रही मछली
बाघिन टी 16 मछली और बाघ टी 25 डॉलर ने रणथंभौर को खास पहचान दिलाई. बाघिन टी 16 मछली को रणथंभौर की क्वीन कहा जाता है. बाघिन टी 16 मछली रणथंभौर की सबसे चर्चित बाघिन रही है. बाघिन टी 16 को मछली नाम देने के पीछे भी एक खास वजह रही. उसके चेहरे पर मछली जैसे आकर की धारियां थी . जिसकी वजह से वन्यजीव प्रेमियों ने इसे मछली नाम दिया और ये नाम इतना प्रसिद्ध हुआ कि टी 16 की पहचान ही बन गया. मछली की वंशबेल आज भी रणथंभौर को आबाद कर रही है.
रणथंभौर के प्रसिद्ध बाघ चंगेज खां की संतान थी मछली
बाघिन मछली रणथंभौर की प्रसिद्ध बाघिन टी 16 लेडी ऑफ द लेक व रणथंभौर के प्रसिद्ध बाघ चंगेज खां की संतान थी. बाघिन मछली ने अपने जीवन काल में 11 बच्चों को जन्म दिया, जिनकी बदौलत रणथंभौर आज भी बाघों से आबाद है. बाघिन मछली क्वीन ऑफ रणथंभौर, वर्ल्ड मोस्ट फोटोग्राफर्ड टाईगर, झीलों की रानी व क्रोकोडायल किलर के नाम से भी प्रसिद्ध थी.

बाघिन मछली ने रणथंभौर में तकरीबन 18 साल तक राज किया. वह जंगल में रहने वाली सबसे उम्रदराज बाघिन भी बन गई थी. आमतौर पर बाघ-बाघिन की औसत उम्र 12 से 15 वर्ष होती है, लेकिन मछली 20 साल तक जीवित रही थी. वन्यजीव प्रेमियों व फोटोग्राफरों में मछली की लोकप्रियता इस कदर थी कि मछली की लोकप्रियता से भारत सरकार को करीब 100 मिलियन अमरीकी डॉलर की कमाई हुई थी.
बाघ संरक्षण और पर्यटकों को आकर्षित करने में अहम योगदान देने की वजह से मछली को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से भी नवाजा गया था. बाघिन मछली के पारिस्थितिक और आर्थिक योगदान में एक यादगार पोस्टल कवर व डाक टिकिट भी जारी किया गया था. बघिन मछली और वाइल्डलाइफ फ़िल्म द वर्ड्स मोस्ट फेमस टाइगर भी बनी है, जिसने 66वें राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कारों में राष्ट्रीय पुरस्कार जीता था.
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