दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा का कहना है कि वह हर टूर्नामेंट में 90 मीटर का आंकड़ा पार करने को लेकर ‘जुनूनी' नहीं हैं. नीरज का मानना है कि किसी जादुई नंबर के पीछे भागने के बजाय बड़े खिताब जीतना और मुश्किल हालात में भी लगातार अच्छा प्रदर्शन करना अधिक महत्वपूर्ण है. पिछले साल दोहा डायमंड लीग में 90.23 मीटर के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ पहली बार 90 मीटर का बहुप्रतीक्षित आंकड़ा पार करने वाले मौजूदा विश्व चैंपियन ने कहा कि "किसी भी चैंपियनशिप में उनकी पहली प्राथमिकता गोल्ड मेडल जीतना होती है जबकि थ्रो की दूरी उसके बाद आती है."
नीरज ने ‘पीटीआई' के एक सवाल के जवाब में नीरज ने कहा, ‘‘नहीं, मुझे ऐसा कोई दबाव महसूस नहीं होता और ना ही मैं किसी खास दूरी को लेकर जुनूनी हूं। एक खिलाड़ी के रूप में मेरा लक्ष्य हमेशा अपनी दूरी में सुधार करना होता है. '' उन्होंने कहा, ‘‘बड़े टूर्नामेंट में सबसे बड़ी चुनौती दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के बीच गोल्ड मेडल जीतना होती है. दूरी दूसरी चीज है..इसलिए मैं अपनी दूरी लगातार बढ़ाने की कोशिश करता हूं. ''
नीरज 30 जुलाई को ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा के क्वालीफिकेशन दौर में मैदान पर उतरेंगे. 28 साल के नीरज ने माना कि मौसम और अन्य बाहरी परिस्थितियां भाला फेंक प्रतियोगिताओं को काफी प्रभावित करती हैं इसलिए केवल लंबी दूरी नहीं बल्कि निरंतर अच्छा प्रदर्शन भी उतना ही अहम है. उन्होंने कहा, ‘‘जब परिस्थितियां कठिन होती हैं तो हम मनचाही दूरी हासिल नहीं कर पाते, ऐसे समय में लगातार अच्छा प्रदर्शन करना जरूरी होता है.इसलिए मेरा प्रयास रहता है कि मैं अपनी निरंतरता बनाए रखूं और साथ ही दूरी भी बढ़ाता रहूं. ''
कई सालों की अटकलों के बाद आखिरकार 90 मीटर का आंकड़ा पार कर चुके नीरज ने कहा कि अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन में और सुधार करना अब भी उनका दीर्घकालिक लक्ष्य है. उन्होंने कहा, ‘‘मैं निश्चित रूप से अपने थ्रो में और सुधार करना चाहता हूं. ''
भारत-पाक-श्रीलंका के बीच कांटे की टक्कर
पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा अब एशिया की सबसे प्रतिस्पर्धी प्रतियोगिताओं में से एक बन चुकी है. पाकिस्तान के ओलंपिक चैंपियन अरशद नदीम, श्रीलंका के डायमंड लीग विजेता रुमेश पथिरागे और नीरज अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार एक-दूसरे को कड़ी चुनौती दे रहे हैं. नीरज ने कहा, ‘‘यह अच्छी बात है, जब प्रतिस्पर्धा कड़ी होती है तो हम एक-दूसरे को और बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करते हैं. खासकर साउथ एशिया में अब काफी मजबूत प्रतिस्पर्धा है और सभी खिलाड़ी खुद को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. ''
नीरज 2018 के गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में अपने डेब्यू पर गोल्ड मेडल जीतने के बाद पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स में लौट रहे हैं। चोट के कारण वह 2022 के बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा नहीं ले सके थे.
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