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कुतों ने भगाया, खेत में भागे, ट्रैक-स्पाइक्स-डाइट की कमी भी नहीं आई 10.09 सेकेंड में 100मी. रिकॉर्ड के आड़े

भारत के लिए अभी तक कोई भी एथलिट 10 सेकेंड के अंदर 100 मीटर नहीं दौड़ पाया है, लेकिन गुरिंदरवीर ने दिखाया है कि वो पल जल्द आ सकता है. गुरिंदरवीर के कोच सरबजीत सिंह ने NDTV से ख़ास बातचीत की है और इस नेशनल रिकॉर्ड होल्डर के संघर्ष को बताया है.

कुतों ने भगाया, खेत में भागे, ट्रैक-स्पाइक्स-डाइट की कमी भी नहीं आई 10.09 सेकेंड में 100मी. रिकॉर्ड के आड़े
Gurindervir Singh Struggling Story

100m National Record Holder Gurindervir Singh Struggling Story: रांची के बिरसा मुंडा स्टेडियम में 25 साल के पंजाब के एथलीट गुरिंदरवीर सिंह ने जैसे ही 10.09 सेकेंड का रिकॉर्ड बनाया,तबसे ही जालंधर के गांव पटियाल में उनके और उनके कोच सरबजीत सिंह-हैप्पी के घर मीडिया का तांता लगा हुआ है. गुरिंदरवीर के माता-पिता और कोच सरबजीत सिंह खुश भी हैं और हैरान भी कि 100 मीटर के एथलीट को भारत में पहचान मिल रही है. गुरिंदरवीर ने 10.10s का बैरियर तोड़ने के बाद कहा,"पहले लोग कहते थे कि भारत में 100मीटर का जीन्स नहीं है. हम साबित करके रहेंगे कि हमारा जीन्स 100 मीटर के लिए भी तगड़ा है." कोच हैप्पी कहते हैं कि गुरिंदरवीर ने 10.10 का बैरियर तोड़ा है, ये बच्चे ज़रूर जल्दी ही 10 सेकेंड का बैरियर भी तोड़ देंगे. 

'इसलिए टूटेगा 10 सेकेंड का बैरियर'

NDTV से ख़ास बातचीत करते हुए कोच सरबजीत सिंह-‘हैप्पी' कहते हैं,"10 सेकेंड का बैरियर बहुत जल्दी टूटेगा. अभी ही क्या बाक़ी रह गया? अगर यहीं (रांची में) ये एथलीट मॉन्डो ट्रैक पर भागे होते, हवा की स्पीड 1.5 m/s या 1.8m/s होता तो यहीं बड़ा रिज़ल्ट दिख जाता. अनिमेष कुजूर भी फ़ाइनल 10.20 में भागे हैं. ये एथलीट लगातार एक-दूसरे के साथ अच्छा भाग रहे हैं. लगातार इंप्रूव कर रहे हैं."

ना ट्रैक, ना जूते ना डाइट, पर नहीं टूटा हौसला

कोच हैप्पी बताते हैं,"एथलीट गुरिंदरवीर में भागने की फ्रीक्वेंसी भी है, स्टैमिना और स्पीड भी है. वो ये भी कहते हैं कि गुरि अच्छे फॉर्म में हैं. फ़ॉरेन (ब्रिटिश) कोच जेम्स हिलियर के साथ मुंबई में उन्हें अच्छा जिम, अच्छी ट्रेनिंग और अच्छी डाइट मिल रही है. कोच जेम्स हिलिअर उन्हें अच्छी ट्रेनिंग दे रहे हैं. मैं भी बीच-बीच में सरबजीत को देखने, उनका आकलन करते रहने के लिए ज़रूर जाता रहता हूं. कुछ ज़रूरी सलाह देनी होती है तो वो भी देता हूं."

जालंधर में उनके पास अच्छे ट्रैक भी नहीं होते थे. गुरिंदरवीर ने खेतों में भागना शुरू किया. फिर कोच श्रवण के साथ पटियाल में ट्रेनिंग शुरू की.  कोच हैप्पी अपने सफ़र को लेकर कहते हैं,"जब वो मेरे पास आए तो मैंने घर में ही बने जिम में उन्हें अभ्यास कराया. ट्रैक नहीं होते थे तो उन्हें लेकर कभी किसी यूनिवर्सिटी तो कभी अपनी अर्टिगा कार में पीछे कंबल डालकर गुरु को सुलाकर धर्मशाला ले जाता था. वहीं ट्रैक पर ट्रेनिंग होती थी. NIS पटियाला गया तो वहां भी ट्रैक की परमिशन नहीं मिली. फिर यूनिवर्सिटी के बाहर कमरा लेकर रहना शुरू किया और ट्रेनिंग करते रहे."

ट्रेनिंग के दौरान कोच सरबजीत सिंह के साथ गुरिंदरवीर सिंह

ट्रेनिंग के दौरान कोच सरबजीत सिंह के साथ गुरिंदरवीर सिंह

गुरि VS अनिमेष- ऐसे टूटा रिकॉर्ड

रांची में अनिमेष कुजूर और गुरिंदर में एक तरह की जंग मची रही. गुरुवार को गुरिंदरवीर ने सेमीफ़ाइनल हीट में 10.17 सेकेंड में 100 मीटर भागकर ओडिशा के अनिमेष कुजूर का 101.8s का रिकॉर्ड तोड़ा. लेकिन ये रिकॉर्ड 5 मिनट ही रह सका. सबसे कम देर रहने वाला नेशनल रिकॉर्ड.

अगले ही हीट में अनिमेष कुजूर ने 10.15s में 100 मीटर रेस भागकर वो रिकॉर्ड फिर से अपने नाम कर लिया. फ़ाइनल में पंजाब के गुरिंदरवीर 10.09s के साथ पहले, ओडिशा के अनिमेष कुजूर 10.20s के साथ दूसरे और रिलायंस के प्रणव प्रमोद गौरव 10.29s तीसरे नंबर पर रहे. 

गुरिंदरवीर ने साल भर पहले बेंगलुरु ग्रांप्री में मणिकांत होब्लिधर का रिकॉर् तोड़कर 10.20 का रिकॉर्ड बनाया. लेकिन उसके बाद ज़्यादा नहीं भागे. क्योंकि, उन्हें टॉन्सिल की शिकायत थी और वो फिट नहीं महसूस कर रहे थे. कोच सरबजीत कहते हैं,"गुरु ने जब अमीय कुमार मलिक के के 10.25s केरिकॉर्ड से आगे निकले तबसे ही उसपर कई लोग सवाल उठाते रहे. लेकिन मुझे उसकी ताक़त और उसके टैलेंट का अंदाज़ा है."

कुत्तों ने भगाया तो टैलेंट की हुई पहचान.. 

गुरिंदरवीर के पिता कमलजीत सिंह वॉलीबॉल खेलते थे और वो पंजाब पुलिस में एक कॉन्सेटबल थे. हाल ही में रिटायर हुए हैं. उनकी थोड़ी-बहुत बाड़ी भी है. गुरिंदरवीर के पिता कमलजीत कहते हैं,"मैंने गुरि को मैदान पर भागते देखा तो मुझे पता था कि ये तेज़ भाग सकता है. मैंने इसे एथलेटिक्स में डालने का फ़ैसला किया और कोच स्वर्ण सिंह के पास ले गया. वो आज भारत का सबसे फ़ास्ट एथलीट बन गया है. लेकिन उसने पेट खराब, गला खराब होने जैसी मुश्किलों से जूझते हुए बड़ा संघर्ष किया है. उसने, उसके कोचों ने बहुत मेहनत की है. ये सब उसी की नतीजा है."

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कोच हैप्पी कहते हैं,"उसका यहां से निकलना ज़रूरी था. मेरे पास तकरीबन 30 उम्दा एथलीट हैं. लेकिन मेरी तनख्वाह सिर्फ़ 23,000 रुपये है. कई बार मेरे हाथ भी बंध जाते हैं. टॉप क्वालिटी डाइट या सबके लिए उम्दा स्पाइक्स का खर्च मेरी जेब के बाहर हो जाता है."

ये पूछने पर गुरिंदरवीर ने कैसे दौड़ना शुरू किया, कोच हैप्पी हसंते हुए बताते हैं,"गुरि खेतों में तो भागता था. लेकिन एक बार कुत्तों ने उसे दौड़ा दिया और वो बहुत तेज़ भागा. तो, सही मायनों में कुत्तों ने उसका टैलेंट पहचाना. फिर गांव में कोच श्रवण ने उसे ट्रेनिंग दी. उनके पिता चाहते थे कि वो कोई इंडिविज़ुअल गेम खेलें तो वो उन्हें मेरे पास ले आए."

मिल्खा-मक्खन-गुरु रंधावा जैसे एथलीटों का ग्रुप 

कोच हैप्पी कहते हैं कि एक वक्त मिल्खा सिंह, मक्खन सिंह से लेकर गुरुबचन सिंह रंधावा जैसे दिग्गज एथलीट होते थे जिनकी वजह से भारतीय एथलेटिक्स का नाम चमका. मौजूदा एथलीटों का जेनेरेशन बैहद टैलेंटेड है. ये एक बड़ा नतीजा लाएंगे और फिर ये वाकई भारत के ‘गोल्डन जेनेरेशन एथलीट' कहलाएंगे.

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