India's Next Generation of Champions: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के खाते में 39 मेडल आए और भारतीय दल टूर्नामेंट में चौथे नंबर पर रहा. इस बार युवा खिलाड़ियों ने दिखाया है कि भारत का स्पोर्ट्स भविष्य पहले से कहीं ज्यादा उज्ज्वल दिख रहा है, कई खेलों में नई पीढ़ी के टैलेंटेड एथलीट सुर्खियां बटोर रहे हैं. क्रिकेट, बैडमिंटन, शूटिंग, कुश्ती, एथलेटिक्स, टेबल टेनिस और टेनिस में ये उभरते सितारे इंटरनेशनल लेवल पर देश का नाम रोशन कर रहे हैं.ऐसे में जानते हैं उन खिलाड़ियों के बारे में जिनके परफॉर्मेंस ने भारत के लिए नई उम्मीद जगाई है.

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वैभव सूर्यवंशी (15 साल)
क्रिकेट के उभरते हुए टैलेंट वैभव सूर्यवंशी कम उम्र में इंटरनेशनल डेब्यू कर पहले ही खलबली मचा दी है. वैभव अब इंटरनेशनल क्रिकेट खेल रहे हैं और हर मैच के साथ उनके नाम रिकॉर्ड दर्ज होते जा रहे हैं. वैभव आज भारत के बैटिंग सेंसेशन बनकर उभरे हैं और उनकी तुलना सचिन तेंदुलकर से भी होने लगी है. कई जानकार का मानना है कि वैभव के आने से भारतीय क्रिकेट को नई ऊर्जा मिली है जैसा सचिन के आने से भारतीय क्रिकेट को मिली थी. वैभव के अलावा तिलक वर्मा (23) भी भारतीय क्रिकेट में नई पीढ़ी के उभरते हुए टैलेंट में से एक हैं.

बैडमिंटन स्टार्स तन्वी शर्मा
बैडमिंटन में 17 साल की तन्वी शर्मा और 18 साल की उन्नति हुड्डा से काफी उम्मीदें हैं. हाल ही में तन्वी शर्मा ने ताइपे ओपन सुपर महिला सिंगल्स का खिताब जीतकर इतिहास रचा है. तन्वी में साइना नेहवाल-पीवी सिंधु की झलक नजर आती है. पंजाब के होशियारपुर की रहने वाली तन्वी का स्पोर्ट्स का सफ़र कम उम्र में ही अपनी मां मीना शर्मा की देखरेख में शुरू हुआ, जो खुद एक पूर्व वॉलीबॉल खिलाड़ी रही हैं. तन्वी ने कई सालों तक मशहूर पुलेला गोपीचंद अकादमी में ट्रेनिंग की और उसके बाद मशहूर कोच पार्क ताए-सांग के साथ अपनी ट्रेनिंग जारी रखी, ताए-सांगजो जो पीवी सिंधु के पूर्व कोच भी रहे हैं. तन्वी को आज को कामयाबी मिल रही है उसके पीछे अनुशासन, कड़ी मेहनत और कोर्ट पर निडर अंदाज का बड़ा हाथ रहा है.

उन्नति हुड्डा
दूसरी ओर सिर्फ 18 साल की उम्र में, उन्नति हुड्डा भारतीय बैडमिंटन की सबसे चमकदार प्रतिभाओं में से एक बनकर उभरी हैं. हरियाणा के रोहतक में जन्मी, उन्होंने बचपन में ही बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया था और कोर्ट पर अपनी शानदार स्किल्स और निडर रवैये से जल्द ही सबका ध्यान खींचा. उनके पिता ने उनके इस सफ़र में अहम भूमिका निभाई, उन्होंने कम उम्र से ही उनकी ट्रेनिंग में मदद की. उनके करियर का एक अहम मोड़ तब आया जब उन्होंने इंटरनेशनल सर्किट में टॉप खिलाड़ियों को हराया और अपने बचपन के आदर्श पीवी सिंधु का भी सामना किया, जिससे वर्ल्ड बैडमिंटन में उनकी तेजी से बढ़ती कामयाबी का पता चलता है.

बॉक्सिंग में प्रीति और जैस्मीन
बॉक्सिंग में प्रीति और जैस्मीन मेडल की दावेदार के तौर पर उभर रही हैं, कॉमनवेल्थ गेम्स में प्रीति पवार को गोल्ड मेडल मिला तो वहीं, जैस्मीन लेम्बोरिया ने भी गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचने का काम किया है. जैस्मीन लेम्बोरिया ने नॉर्दर्न आयरलैंड की माइकेला वाल्श को 5-0 से हराकर महिलाओं के 57 किलोग्राम भार वर्ग का गोल्ड मेडल अपने नाम किया. खिताबी जीत के बाद जैस्मीन ने कहा कि उन्होंने इस उपलब्धि के लिए काफी मेहनत की थी और आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई. प्रीति और जैस्मीन की इस कामयाबी ने साबित किया है कि बॉक्सिंग में भारत का भविष्य काफी उज्जवल है.

रेसलर अमन सहरावत और अंतिम पंघाल से काफी उम्मीदें
भारतीय रेसलिंग एक नए दौर में पहुंच गई है और दो युवा एथलीट इसकी अगुवाई कर रहे हैं, अमन सहरावत और अंतिम पंघाल. दोनों अभी 20 साल की उम्र के शुरुआती दौर में हैं, फिर भी उन्होंने भारतीय रेसलिंग में बड़े नामों के बीच अपनी जगह बना ली है.
अमन सहरावत
अमन सहरावत ने इंटरनेशनल लेवल पर अपने बेखौफ प्रदर्शन से पहचान बनाई. दिल्ली के मशहूर छत्रसाल स्टेडियम में ट्रेनिंग करने वाले अमन, पेरिस ओलंपिक्स में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत के सबसे युवा ओलंपिक मेडलिस्ट बने थे. उनके आक्रामक अंदाज, तेजी और लगातार अच्छे प्रदर्शन ने उन्हें 57kg कैटेगरी में भारत का बेहतरीन रेसलर बना दिया है.

महिलाओं की कैटेगरी में अंतिम पंघाल से उम्मीदें
महिलाओं की कैटेगरी में, अंतिम पंघाल एक नई मिसाल बनकर उभरी हैं. वह U20 वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं और बाद में उन्हें UWW विमेंस राइजिंग स्टार ऑफ़ द ईयर का सम्मान मिला. वर्ल्ड चैंपियनशिप और एशियन इवेंट्स में उनकी कामयाबी ने उन्हें दुनिया की रेसलिंग में सबसे होनहार टैलेंट में से एक के तौर पर स्थापित किया है.

भारत की शूटिंग टीम में मनु भाकर बनी सबसे बड़ी स्टार
मनु भाकर जैसे जाने-माने नामों के साथ ईशा सिंह, रमिता और टीनएज सेंसेशन तिलोत्तमा जैसे युवा टैलेंट के जुड़ने से भारत की शूटिंग टीम मजबूत बनी हुई है. भारत की शूटिंग टीम इस समय दुनिया की सबसे मजबूत टीम है और यह टीम लगातार टूर्नामेंट में बेहतरीन परफॉर्मेंस कर रही है. मनु भाकर को देखकर अब कई खिलाड़ी शूटिंग को अपना करियर बनाने के लिए आगे आ रहे हैं.

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स्क्वैश में अनाहत सिंह ने बढ़ाई उम्मीद
एथलेटिक्स, आर्चरी, टेबल टेनिस, टेनिस और स्क्वैश में भी शानदार संभावनाएं हैं. अनिमेष कुजूर, अदिति स्वामी, अनाहत सिंह, दिव्यांशी भौमिक और माया राजेश्वरन जैसे एथलीट उस पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं जो भारतीय खेलों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए दृढ़ संकल्पित है. हाल ही में भारतीय स्क्वैश स्टार अनाहत सिंह ने विश्व जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप जीतकर इतिहास रच दिया है, भारत की 18 साल की खिलाड़ी अनाहत सिंह ने वर्ल्ड स्क्वॉश जूनियर चैंपियनशिप 2026 का खिताब स्क्वैश में उम्मीदें बढ़ा दी है.
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