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CWG 2026 Success Story: किसान की बेटी से भारत की गोल्डन होप तक... साक्षी चौधरी की कहानी, जिसने हर चुनौती को पंच से दिया जवाब

Sakshi Chaudhary Golden Hope in CWG 2026: किसान की बेटी से भारतीय सेना की अधिकारी और अब देश की गोल्डन होप बन चुकी साक्षी चौधरी की कहानी इस बात का सबूत है कि मेहनत, धैर्य और जुनून के आगे कोई भी मंजिल बड़ी नहीं होती.

CWG 2026 Success Story: किसान की बेटी से भारत की गोल्डन होप तक... साक्षी चौधरी की कहानी, जिसने हर चुनौती को पंच से दिया जवाब
Farmer daughter Boxing Champion Sakshi Chaudhary

Sakshi Chaudhary Golden Hope in CWG 2026: स्कॉटलैंड के ग्लासगो में शुरू होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की नजरें महिलाओं के 51 किलोग्राम बॉक्सिंग वर्ग पर टिकी होंगी. वजह हैं साक्षी चौधरी, जिनकी कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की सफलता नहीं, बल्कि संघर्ष, अनुशासन और अटूट हौसले की मिसाल है. एक छोटे से किसान परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने वाली साक्षी आज भारत की सबसे भरोसेमंद महिला मुक्केबाजों में गिनी जाती हैं. उनके लिए यह सफर कभी आसान नहीं रहा, लेकिन हर मुश्किल ने उन्हें और मजबूत बनाया.

जब सपनों के रास्ते में आईं मुश्किलें

कॉमनवेल्थ गेम्स का टिकट हासिल करना साक्षी के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं था. चयन से पहले उन्हें महज तीन हफ्तों में तीन किलो वजन कम करना पड़ा. यही नहीं, टीम में जगह बनाने के लिए उन्हें विश्व चैंपियन निखत ज़रीन और मीनाक्षी हुड्डा जैसी अनुभवी मुक्केबाजों को भी हराना पड़ा. हर चुनौती के बाद साक्षी का आत्मविश्वास और मजबूत होता गया. उन्होंने साबित किया कि बड़े मंच तक पहुंचने के लिए सिर्फ प्रतिभा नहीं, बल्कि मजबूत इरादों की भी जरूरत होती है.

जब इतिहास ने उनका नाम याद रखा

साक्षी ने 2025 में अस्ताना में आयोजित वर्ल्ड बॉक्सिंग कप में गोल्ड मेडल जीतकर नया इतिहास रच दिया. वह इस प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला मुक्केबाज बनीं. यह उपलब्धि उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुई और उन्होंने दुनिया को बता दिया कि भारतीय महिला बॉक्सिंग का भविष्य सुरक्षित हाथों में है.

रिंग के बाहर भी निभा रही हैं बड़ी जिम्मेदारी

साक्षी सिर्फ बॉक्सर ही नहीं हैं, बल्कि भारतीय सेना की जवान भी हैं. देश की सेवा और खेल, दोनों जिम्मेदारियों को वह समान समर्पण के साथ निभा रही हैं. इन दिनों उनका पूरा ध्यान ग्लासगो में होने वाले मुकाबलों पर है. कड़ी ट्रेनिंग, संतुलित डाइट और मानसिक मजबूती के साथ वह अपने सबसे बड़े लक्ष्य की तैयारी में जुटी हैं.

'पिता ने सिखाया, कभी हार मत मानना'

कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले साक्षी ने कहा कि इस प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करना उनके जीवन का सपना रहा है. उन्होंने बताया कि तैयारी के दौरान उन्हें चोट का भी सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. रिकवरी के बाद फिर से अभ्यास शुरू किया और वजन घटाने जैसी कठिन चुनौती भी पार कर ली.

साक्षी ने कहा कि ऐसे समय में उन्हें अपने पिता की एक बात हमेशा याद रही  "कभी हार मत मानो और अपनी पूरी ताकत के साथ आगे बढ़ो." उनका कहना है कि अब उनका पूरा फोकस सिर्फ एक लक्ष्य पर है भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतना.

कम उम्र में ही बना ली थी अपनी पहचान

साक्षी ने महज 12 साल की उम्र में बॉक्सिंग शुरू कर दी थी. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा.

 वर्ल्ड यूथ चैंपियनशिप (2017 और 2018) में दो बार गोल्ड मेडल

 वर्ल्ड जूनियर महिला चैंपियनशिप 2015 में गोल्ड

 एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2021 में पदक

 वर्ल्ड बॉक्सिंग कप 2025 में ऐतिहासिक गोल्ड

इन उपलब्धियों ने उन्हें भारतीय बॉक्सिंग की सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल कर दिया है. अब निगाहें कॉमनवेल्थ गोल्ड पर हैं. ग्लासगो में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स साक्षी के करियर का एक और बड़ा पड़ाव हैं. इसके बाद एशियन गेम्स और ओलंपिक जैसे बड़े लक्ष्य उनका इंतजार कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल उनकी पूरी दुनिया एक ही लक्ष्य के इर्द-गिर्द घूम रही है भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना.

किसान की बेटी से भारतीय सेना की अधिकारी और अब देश की गोल्डन होप बन चुकी साक्षी चौधरी की कहानी इस बात का सबूत है कि मेहनत, धैर्य और जुनून के आगे कोई भी मंजिल बड़ी नहीं होती.

(ANI इनपुट के साथ)

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