मुंबई:
मुंबई में मेट्रो-3 का नया रूट शुरू करने को लेकर शिवसेना और बीजेपी में ठन गई है। शिवसेना की हुकूमतवाली बीएमसी की सभा में मेट्रो-3 को जमीन देने से मना किया गया। जिससे इस प्रोजेक्ट में देरी की संभावना बनी है। बीजेपी ने शिवसेना की मेट्रो-3 विरोधी भूमिका को बिल्डरों के हितों के रक्षण के लिए उठाई आवाज़ करार दिया है।
मुम्बई मेट्रो-3 का रूट दक्षिण मुम्बई को मध्य और उत्तर मुम्बई से जोड़नेवाला है। कोलाबा से सीप्ज तक जानेवाली इस मेट्रो के लिए गिरगांव इलाके में 18 इमारतों का रिलोकेशन करना पड़ रहा है। शिवसेना इन इमारतों में रहनेवाले मराठी परिवारों के बहाने मेट्रो 3 का रूट बदलने की मांग कर रही है।
अपनी मांग पर अडिग शिवसेना ने बीएमसी में राज्य सरकार के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया जिसमें मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए जगह देनी थी। इस प्रस्ताव को ठुकराने के लिए शिवसेना ने बीएमसी में कांग्रेस और MNS से हाथ मिला लिया।
मुम्बई बीजेपी अध्यक्ष आशीष शेलार ने शिवसेना की मेट्रो प्रोजेक्ट विरोधी भूमिका पर तीखा हमला करते हुए इसे बिल्डर के फायदे के लिए ली हुई भूमिका करार दिया। शेलार मुम्बई में संवाददाताओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने शिवसेना को सवाल पूछा कि, जब वर्सोवा - घाटकोपर मेट्रो के चलते 2765 मराठी परिवार विस्थापित हुए तब शिवसेना क्यों चुप थी?
शिवसेना का विरोध कहीं उन चन्द बिल्डरों के फायदे के लिए तो नहीं जिनके रिडेवलपमेंट के कॉन्ट्रैक्ट फंसनेवाले हैं? मेट्रो 3 से विस्थापित होनेवालों को अगर उसी इलाके में मौजूदा घर से दुगना बड़ा घर मिलनेवाला हो तब शिवसेना विकास में रोड़ा क्यों डाल रही है?
मुम्बई मेट्रो-3 का रूट दक्षिण मुम्बई को मध्य और उत्तर मुम्बई से जोड़नेवाला है। कोलाबा से सीप्ज तक जानेवाली इस मेट्रो के लिए गिरगांव इलाके में 18 इमारतों का रिलोकेशन करना पड़ रहा है। शिवसेना इन इमारतों में रहनेवाले मराठी परिवारों के बहाने मेट्रो 3 का रूट बदलने की मांग कर रही है।
अपनी मांग पर अडिग शिवसेना ने बीएमसी में राज्य सरकार के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया जिसमें मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए जगह देनी थी। इस प्रस्ताव को ठुकराने के लिए शिवसेना ने बीएमसी में कांग्रेस और MNS से हाथ मिला लिया।
मुम्बई बीजेपी अध्यक्ष आशीष शेलार ने शिवसेना की मेट्रो प्रोजेक्ट विरोधी भूमिका पर तीखा हमला करते हुए इसे बिल्डर के फायदे के लिए ली हुई भूमिका करार दिया। शेलार मुम्बई में संवाददाताओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने शिवसेना को सवाल पूछा कि, जब वर्सोवा - घाटकोपर मेट्रो के चलते 2765 मराठी परिवार विस्थापित हुए तब शिवसेना क्यों चुप थी?
शिवसेना का विरोध कहीं उन चन्द बिल्डरों के फायदे के लिए तो नहीं जिनके रिडेवलपमेंट के कॉन्ट्रैक्ट फंसनेवाले हैं? मेट्रो 3 से विस्थापित होनेवालों को अगर उसी इलाके में मौजूदा घर से दुगना बड़ा घर मिलनेवाला हो तब शिवसेना विकास में रोड़ा क्यों डाल रही है?
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