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मुंबई में ईरान की 168 शहीद बच्चियों की याद में हुआ सेमिनार, दिग्गजों ने की युद्ध की निंदा, बच्चों को जंग से दूर रखे

Iran-US Deal: मुंबई के यशवंतराव चव्हाण सेंटर में ईरान के मीनाब शहर में मारी गई 168 स्कूली छात्रों की याद में एक सेमिनार आयोजित हुआ. जिसमें बच्चों को युद्ध से रखने की बात कही गई है.

मुंबई में ईरान की 168 शहीद बच्चियों की याद में हुआ सेमिनार, दिग्गजों ने की युद्ध की निंदा, बच्चों को जंग से दूर रखे
मुंबई में हुआ सेमिनार
मुंबई:

ईरान और अमेरिका के बीच रोकने के लिए डील होने वाली है. दोनों देशों के बीच युद्ध विराम हो रहा है. ऐसे में जहां दोनों देश शांति की तरफ आगे बढ़ रहे हैं . वहीं मुंबई के यशवंतराव चव्हाण सेंटर में अमेरिका हमले  में मारी गई ईरान के मीनाब में 168 स्कूली छात्रों की याद में सेमिनार हुआ. जिसमें मेजर जनरल जीडी बख्शी, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के सलाहकार सुधींद्र कुलकर्णी, पूर्व राज्यसभा सांसद माजिद मेमन और कुमार केटकर समेत ईरान सुप्रीम लीडर के भारत में उप प्रतिनिधि डॉ मोहम्मद हुसैन ज़ियानी. कर्नाटक सरकार में सेंट्रल रिलिफ कमेटी के चैयरमेन आगा सुल्तान समेत तकरीबन 500 से ज्यादा स्कूली छात्र छात्राएं शामिल हुए थे. सेमिनार में इन बच्चों ने पेंटिग और पत्र लिखकर मीनाब में मारे गए स्कूली छात्राओं के परिवार वालों को भेजने के लिए दिए है. सेमिनार के सभी पेनलिस्ट ने भी मीनाब में मारी गई बच्चियों की मौत की निंदा की है. जबकि बच्चों को पूरी तरह युद्ध से दूर रखने की बात कही है. 

बच्चों की याद में लगाए गए थे पोस्टर

मुंबई के यशवंतराव चव्हाण ऑडिटोरियम में ये प्रोग्राम रखा गया. जैसे ही लोग वहां पहुंचे तो सबसे पहले उन्हें उन सभी स्कूल के बच्चों की फोटो बड़े पोस्टर में दिखाई दी, जिसमें लिखा था. 'फॉर वट रीजन वार दे किल्लड' यानि किस वजह से इन बच्चों को मारा गया. उन बच्चों की फोटो भी लगाई गई थी. वहीं दूसरे पोस्टर में स्कूल के बैग के साथ आसमान दिखाया. जिसमें दर्शाया गया कि मासूम बच्चे जो स्कूल में पढ़ने गए थे. वो शहीद होकर ईश्वर के पास चले गए. वहीं वहां पहुंचे बच्चों और गेस्ट को एक मोमेंटो दिया गया. जिसमें उन 168 शहीदों के नाम और उनकी उम्र लिखी हुई थी. जिसे देखकर सबकी आंखे नम हो गई.

बच्चों को मारना सबसे बड़ा पापः जीडी बख्शी

रिटायर्ड मेजर जनरल बख्शी ने कहा 'मासूम बच्चों को मारना बहुत बड़ा पाप है. इसकी माफी नहीं मिलेगी. उन मासूम बच्चों का क्या कसूर था जो उनकी हत्या कर दी. अमेरिका और इजरायल ने बहुत बड़ा पाप किया है. ईरान हमारा पड़ोसी देश है. हम पर और ईरान पर कई बार हमले हो चुके हैं. ईरान 6000 साल पुराना देश है अमेरिका ने ईरान को नहीं बनाया है. वो कभी झुकने वाला नहीं. अगर तुम सोचते हो कि तुम्हारे हमले करने से ईरान हार जाएगा. तो याद रखो वो दिन नहीं आएगा. 37 साल में मैंने कई जंग लड़ी हैं. मैंने 10 महीने पहले ही कहा था कि ईरान अमेरिका और इजरायल पर भारी पड़ेगा. ईरान शहादत की राह पर सबसे आगे रहने वाला देश है. इसलिए वहां के लोगों में कोई डर नहीं है.' 

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अंदर आते ही मेरी आंखे नम हो गई: सुधींद्र कुलकर्णी

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के पूर्व सलाहकार सुधींद्र कुलकर्णी ने कहा 'जैसे ही में ऑडिटोरियम में आया तो ईरान में मारे गए मासूम बच्चों का फोटो लगा हुआ था. मेरे मन में एक ही सवाल था कि आखिर इन बच्चों का क्या जात धर्म दोष था?. बच्चें कहीं के भी हो. किसी भी देश के हो लेकिन उन्हें जंग में नहीं शामिल करना चाहिए. उनपर हमला नहीं होना चाहिए, चाहे वो गाजा के हो या ईरान के या फिर अन्य किसी देश के हो. ईरान घबराने वाला देश नहीं है और न कभी फिलिस्तीन खत्म होने वाला देश है.'

पूर्व सांसद कुमार केतकर ने भी सेमिनार में भाग लिया और कहा 'मैं हमेशा ईरान के साथ हूं और ऐसे हमलों की खुलकर निंदा करता हूं. 28 फरवरी को यह युद्ध शुरू हुआ, जिसमें अनेक मासूम लोगों की बलि चढ़ाई गई. वियतनाम में भी अमेरिकी सेना ने मासूम लोगों की हत्या की थी. ईरान-इजरायल युद्ध अचानक नहीं  बल्कि अमेरिका की तरफ से निर्देशित था. अमेरिका इजरायल को सीधे निर्देश दे रहा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने ऊपर लगे आरोपों से ध्यान हटाने के लिए यह युद्ध भड़का रहे हैं. वहीं भारत और ईरान की दोस्ती पंडित जवाहरलाल नेहरू के समय से चली आ रही है और हम ईरान के साथ खड़े हुए हैं, मैं हमेशा ईरान के साथ हूं और ऐसे हमलों की खुलकर निंदा करता हूं.'

'बच्चों को निशाना बनाना मानवता के खिलाफ'

पूर्व सांसद और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील माजिद मेनन ने भी हमले की निंदा की है. उन्होंने कहा 'इस घटना में 168 स्कूली बच्चों की निर्मम हत्या कर दी गई जो मानवता के खिलाफ जघन्य अपराध है और इस हमले को दुनियाभर को गंभीरता से लेना चाहिए. उन्होंने 1861-1865 के बीच हुए अमेरिकी गृहयुद्ध कि जिक्र करते हुए कहा कि तब अब्राहम लिंकन ने कहा था कि हम युद्ध को रोके और शांति स्थापित करें, क्योंकि यही मानवता के हित में होगा. मेनन ने कहा कि जब अमेरिका खुद गृहयुद्ध की आग में जल रहा था. तब भी लिंकन शांति और मानवता की बात कर रहे थे. आज के समय में भी यही संदेश प्रासंगिक है. मेनन ने अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय कानून के बुनियादी सिद्धांतों को भी याद दिलाया. उन्होंने कहा कि सशस्त्र संघर्ष के दौरान आम नागरिकों, खासकर बच्चों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय कानून का मूलभूत हिस्सा है. जेनेवा कनवेशन और अन्य संधियां स्पष्ट रूप से बच्चों को युद्ध की विभीषिका से बचाने का निर्देश देती हैं. मेनन ने जोर देकर कहा कि बच्चों को निशाना बनाना न केवल अपराध है, बल्कि मानवता के खिलाफ अपराध है. 

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ईरान सुप्रीम लीडर के भारत में उप प्रतिनिधि भी शामिल

ईरान सुप्रीम लीडर के भारत में उप प्रतिनिधि और अंतरराष्ट्रीय कानून के विशेषज्ञ डॉ. मुहम्मद हुसैन जियानी ने मिनाब स्कूल के बच्चों पर हुए क्रूर हमले की कड़ी निंदा की. उन्होंने विश्व भर में निर्दोष बच्चों और नागरिकों पर हो रहे अत्याचारों की निंदा करते हुए कहा कि यह न केवल एक देश या क्षेत्र की समस्या है, बल्कि समूची मानवता के खिलाफ जघन्य अपराध है. क्योंकि स्कूल सिर्फ इमारतें नहीं होते, बल्कि आशा के केंद्र, ज्ञान के मंदिर और भविष्य की नींव होते हैं. स्कूलों पर हमला करके हम न केवल बच्चों की जान लेते हैं, बल्कि पूरे समाज के भविष्य को नष्ट कर देते हैं. उन्होंने बच्चों पर लक्षित हिंसा से होने वाले भारी मानवीय नुकसान पर गहरा दुख व्यक्त किया. डॉ. जिया ने कहा कि एक बच्चे की मौत सिर्फ एक जीवन नहीं, बल्कि सपनों, संभावनाओं और आने वाली पीढ़ी की पूरी उम्मीद को मारने के बराबर है. उन्होंने दोहराया कि दोषियों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और ऐसी घटनाओं को दोहराने से रोकने के लिए मजबूत वैश्विक सुरक्षा तंत्र विकसित किया जाना चाहिए.'

भारत में रहना गर्व की बात

सेमिनार  स्पीकर में आगा सुल्तान और पत्रकार अली अब्बास नकवी ने कहा कि यह गर्व की बात है कि हम हिंदुस्तान में रहते हैं. जहां हक के साथ चलना सिखाया जाता है. हम लोग हमेशा मजलूम लोगों के लिए आवाज़ बुलंद करते हैं. पाकिस्तान में जब मासूम स्कूल के बच्चों को आतंकियों ने गोलियों से भून दिया था. तब भी हर भारतीयों की आंखें नम थी. गाज़ा में जब बच्चों को मारा गया तब भी भारत में उनके लिए आवाज बुलंद की गई थी. वहीं करबला में इमाम हुसैन की बेटी जनाबे सकीना जो 4 साल की बच्ची थी, उन्हें भी करबला की जंग के बाद इतना मारा गया जिसके बाद उन्होंने कैद खाने में ही अपना दम तोड़ दिया. उन्हीं को याद करते हुए कहा गया कि बच्चों पर जुल्म तो करबला से ही चला आ रहा है. बच्चे सिर्फ मासूम हैं उन्हें जंग में निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए. 

सेमिनार के समापन ने अंत में सभी लोगों ने खड़े होकर राष्ट्रगान गाया और शहीद हुए लोगों को मौन रहकर श्रद्धाजंलि दी. वहीं मीनाब में मारे गए हर बच्चों के नाम का मेमोंटो भी एक एक बच्चों को दिया गया है.

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