मध्यप्रदेश में बाढ़ से 1225 गांव प्रभावित, शिवपुरी और श्योपुर में 800 मिलीमीटर बारिश

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का हवाई दौरा किया, शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक बुलाई

मध्यप्रदेश में बाढ़ से 1225 गांव प्रभावित, शिवपुरी और श्योपुर में 800 मिलीमीटर बारिश

मध्य प्रदेश में भारी बारिश के कारण कई जिलों में बाढ़ आ गई है.

खास बातें

  • एसडीईआरएफ, एनडीईआरएफ, सेना और बीएसएफ लोगों को निकाल रहीं
  • एयर फोर्स के हेलीकॉप्टर भी बचाव कार्य में जुटे
  • तीन हजार लोगों को राहत शिविरों में रखा गया
भोपाल:

मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में अतिवृष्टि और बाढ़ (Flood) से शिवपुरी, श्योपुर, दतिया, ग्वालियर, गुना, भिंड और मुरैना जिलों के कुल 1225 गांव प्रभावित हैं. अब तक श्योपुर जिले के 32 गांवों से 1500 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है. इसी प्रकार शिवपुरी के 90 गांवों से 2000 और दतिया, ग्वालियर, मुरैना, भिंड के 240 गांवों से एसडीईआरएफ, एनडीईआरएफ, सेना और बीएसएफ ने मिलकर लगभग 5,950 लोगों को सुरक्षित निकालने में सफलता प्राप्त की है. खराब मौसम की वजह से मंगलवार को एयर फोर्स के हेलीकॉप्टर को बचाव कार्य में कठिनाई आ रही थी. बुधवार को फिर हेलीकॉप्टरों ने बचाव कार्य शुरू किया है.  
      
शिवपुरी और श्योपुर में मंगलवार तक ही लगभग 800 मिली मीटर बारिश हो चुकी है. श्योपुर जिले में संचार व्यवस्था पूरी तरह से ठप्प हो चुकी है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj Singh Chouhan) ने कहा कि "दूरसंचार मंत्रालय से बात कर व्यवस्थाएं पुन: स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं. गुना-शिवपुरी के बीच रेल सेवा बंद है. अधोसंरचना को बहुत नुकसान पहुंचा है, पर राहत की बात यह है कि बचाव कार्य निरंतर जारी है. प्रभावितों की जिन्दगी बचाने में हमें सफलता मिली है."
      
उन्होंने बताया कि "एनडीईआरएफ की तीन टीमें पहले से बचाव कार्य में लगी थीं, दो टीमें और आ रही हैं. आर्मी के चार कॉलम और एसडीईआरएफ की 70 से अधिक टीमें जिला प्रशासन के साथ बचाव कार्य में लगी हुई हैं. अब तक एयरफोर्स के चार हेलीकॉप्टर ग्वालियर में और एक शिवपुरी में बचाव कार्य में लगे हुए हैं."

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मुख्यमंत्री ने कहा कि "बारिश कम होने से पार्वती नदी का जल स्तर कम होना आरंभ हुआ है. ग्वालियर में 46 गांव प्रभावित हैं, 17 रेस्क्यू स्थल बनाए गए हैं और तीन हजार लोगों को राहत शिविरों में रखा गया है. दतिया में सेना पहुंच गई है. जिले के 36 गांव प्रभावित हैं, 18 रेस्क्यू स्थल बनाए गए हैं, लगभग 1100 लोगों को रेस्क्यू किया जा चुका है. यहां मंदिर में फंसे पुजारी को मोटर बोट भेजकर बचा लिया गया है. सभी मुख्य मार्ग बंद हैं. एनएच-3 भी सुरक्षा की दृष्टि से बंद किया गया है.'' 

शिवराज सिंह ने कहा कि ''रतनगढ़ का पुल क्षतिग्रस्त हुआ है. शिवपुरी में 22 गांव प्रभावित हुए हैं. बचाव कार्य जारी है, 801 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है. श्योपुर में ज्वालापुर, खेरावत, मेवाड़ा और जाटखेड़ा गांव पूरी तरह से पानी से घिरे हुए थे. यहां जलस्तर घट रहा है. सेना गांवों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है. पानी अधिक होने और पुलों के क्षतिग्रस्त होने के कारण सेना को रास्ता बनाते हुए आगे बढ़ना पड़ रहा है. लेकिन लोग सुरक्षित हैं. जलस्तर घट रहा है. जीवन को खतरा नहीं है."
      
चंबल नदी में लगातार पानी बढ़ रहा है. कोटा बैराज से छोड़े गए पानी से भी जलस्तर और बढ़ेगा. इन जिलों के निचले इलाकों में बसे गांवों को खाली कराने का काम लगातार जारी है. भिंड में 800 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया है. मुरैना में सावधानी के तौर पर गांव खाली कराए जा रहे हैं. लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है. सिंध नदी में भी लगातार पानी बढ़ रहा है.

मुख्यमंत्री ने बताया कि राहत के लिए कैंप और भोजन व्यवस्था की जा रही है. मैं निरंतर केंद्र सरकार के संपर्क में हूं. प्रधानमंत्री मोदी से आज भी फोन पर चर्चा हुई है. उन्हें स्थिति से अवगत कराया गया है. गृह मंत्री अमित शाह से भी चर्चा हुई है. केंद्र के सहयोग से ही लोगों को एयर लिफ्ट करने की व्यवस्था बन पाई है. प्रधानमंत्री मोदी के सहयोग के कारण ही सेना को भी तत्काल बुलाना संभव हो पाया. बचाव और राहत का हर संभव प्रयास जारी है.

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मुख्यमंत्री ने बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का हवाई दौरा किया और शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक बुलाई गई है, जिसमें बाढ़, अतिवृष्टि से हुए नुकसान, तात्कालिक व्यवस्थाएं एवं राहत कार्यो से संबंधित विषयों पर चर्चा एवं महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं.