- इस साल देश में मॉनसून की बारिश सामान्य से लगभग 42% कम रिकॉर्ड की गई है और रफ्तार धीमी है
- दिल्ली में मॉनसून के पहुंचने में लगभग एक सप्ताह की देरी होने की संभावना है, जो सामान्य तारीख से बाद में होगा
- अगले पांच दिनों तक दिल्ली और आसपास के इलाकों में मॉनसून की बारिश नहीं होने का मौसम विभाग ने अनुमान लगाया है
राजधानी दिल्ली समेत देशभर में मौसम का मिजाज बदल चुका है. दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई इलाकों में बारिश के बाद मौसम सुहावना हो गया है. लेकिन मॉनसून अभी भी अटका हुआ है. मौसम विभाग का कहना है कि दिल्ली को मॉनसून की बारिश के लिए अभी कुछ दिन और इंतजार करना पड़ेगा. इस साल मॉनसून की रफ्तार पहले से ही धीमी है. इसकी वजह अल-नीनो बताया जा रहा है.
कहां तक पहुंचा मॉनसून?
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 'अगले 2 दिनों में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के बाकी हिस्सों और उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में और आगे बढ़ने के लिए हालात अनुकूल हैं. इसके बाद के 2-3 दिनों में यह मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, दक्षिण-पूर्व राजस्थान और गुजरात के बाकी हिस्सों में भी आगे बढ़ेगा.'
दिल्ली में कब दस्तक देगा?
यानी अगले 5 दिनों तक मॉनसून के दिल्ली या आसपास के इलाकों में पहुंचने का पूर्वानुमान नहीं है. मॉनसून के दिल्ली पहुंचने की सामान्य तारीख 27 जून है, लेकिन मॉनसून के दिल्ली पहुंचने में इस साल करीब एक हफ्ते की देरी होने की संभावना है. मौसम विभाग के एक सीनियर वैज्ञानिक के मुताबिक, एक नया सर्कुलेशन पैटर्न डेवेलोप हो रहा है जिसकी वजह से 5 दिन के बाद दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की रफ़्तार फिर तेज़ होने की संभावना है.
जाहिर है, अगर मॉनसून ने 04 जुलाई से रफ्तार पकड़ी तो दिल्ली समेत उत्तर-पश्चिम भारत के इलाकों में मॉनसून पहुंच सकता है.

दिल्ली में बारिश का क्या अपडेट?
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मॉनसून की रफ्तार धीमी
फिलहाल 29 जून को सब-हिमालयन पश्चिम बंगाल और सिक्किम में और 29 जून तथा 2 और 3 जुलाई को कोंकण और गोवा में कई जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश और कुछ जगहों पर बहुत ज्यादा बारिश होने की संभावना है. मध्य महाराष्ट्र में 2 और 3 जुलाई को ऐसी बारिश हो सकती है. पिछले कुछ दिनों से दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की रफ्तार धीमी चल रही है. इसकी वजह से अब तक मॉनसून की बारिश में कमी देश के कई हिस्सों में रिकॉर्ड की गई है.
कहां-कितना बरसा मॉनसून?
सोमवार को मौसम विभाग ने अपने ताजा रिपोर्ट में कहा कि 01 जून से 29 जून के बीच देश में औसत से 42% कम बारिश रिकॉर्ड की गई है. आमतौर पर 01 जून से 29 जून के बीच देश में औसतन 157.7 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की जाती है, लेकिन इस साल जून महीने में 29 तारीख तक सिर्फ 92.2 मिलीमीटर बारिश ही रिकॉर्ड की गई है.
सबसे ज्यादा deficiency सेंट्रल इंडिया क्षेत्र में दर्ज की गई है, जहां 01 जून से 29 जून के बीच औसत से 54% कम बारिश दर्ज की गई है.
दूसरी सबसे ज्यादा बारिश की कमी पूर्वी और उत्तरपूर्वी भारत में देखी जा रही है गई, जहां इन 29 दिनों के दौरान औसत से 41% कम बारिश हुई है. इस दौरान दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में बारिश की कमी 28% रही है, जबकि उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश की कमी बढ़कर 30% हो गई है.

कहां कब पहुंचेगा मॉनसून
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कृषि मंत्रालय ने शुरू की तैयारियां
उधर कमजोर मॉनसून के असर से निपटने के लिए कृषि मंत्रालय ने बड़े स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है. एनडीटीवी से एक्सक्लूसिव बातचीत में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को कहा, "हमने उन 111 जिलों की पहचान कर ली है जहां अल नीनो का ज्यादा असर पड़ने की आशंका है. लेकिन असर 300 जिलों से ज्यादा पर पड़ने की आशंका है. हमने राज्यों को पूरी जानकारी दे दी है कि उनके यहां कौन-कौन से जिले या इलाके संवेदनशील हैं. इन सभी प्रभावित होने वाले जिलों में उन्हें खेती या रोजगार में जहां भी कमी आएगी 'जी राम जी' कानून के तहत सभी प्रभावित लोगों को रोजगार देने के लिए तैयार रहना होगा.'
कृषि मंत्रालय और इंडियन कॉउन्सिल फॉर एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) ने मिलकर वैज्ञानिक डेटा के आधार पर 315 जिलों का आकलन किया, जहां कम वर्षा और सिंचाई की कमी का खतरा ज्यादा है क्योंकि इन 315 जिलों में मॉनसून कमजोर रहने की संभावना का अनुमान है.
केंद्रीय कृषि मंत्री ने प्रभावित होने वाले राज्यों को निर्देश दिया है कि जो पुरानी वॉटर बॉडीज है उनको समय पर ठीक कर लिया जाए. साथ ही, जितनी नई वॉटर बॉडीज बन सकती हैं बनायीं जाएं, और छोटी-छोटी वाटर बॉडीज जैसी संरचनाएं तैयार की जाएं. जल के संरक्षण से जुड़े कार्यों को 01 जुलाई से लांच होने वाले नए 'जी राम जी' कानून के तहत सर्वोच्च वरीयता दी जाए जिससे अगर बारिश कम हो तो बारिश के पानी को अच्छे से संग्रहित किया जा सके और इसका उपयोग खेती और पीने के पानी के लिए सही तरीके से हो सके.
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