- कांग्रेस नेता मां कनुप्रिया सत्तन और उनके ऑटिस्टिक बेटे केशव की कहानी.
- चाइल्ड साइकोलोजिस्ट डॉ. विनी झारिया से जानेंगे ऑटिज्म से जुड़े सवालों के जवाब.
- ऑटिज्म क्या है इसे कैसे ठीक किया जा सकता है.
वह तेज आवाज में चिल्लाता है, क्योंकि उसके पास शब्द नहीं है. वह सब देखता है, पर किसी से नजरें नहीं मिलाता. उसके पास कान हैं, लेकिन बुलाने पर सुनता नहीं है. वह सब अपने मन की करता है, उसकी अपनी एक दुनिया है, जिसे वो अपने तरीके से जीना चाहता है. इस दुनिया को अगर कोई समझता है तो वो है उसकी मां. ये मां अपने 4 साल के बेटे के लिए वो सब कर रही है, जो उसकी अच्छी जिंदगी के लिए जरूरी है. हर दिन की शुरुआत किसी खामोश जंग की तरह होती है और रात इस उम्मीद में खत्म होती है कि जल्द मेरा बेटा मुझे मम्मा कहकर पुकारेगा. ये कहानी है केशव की, जिसे ऑटिज्म (Autism Spectrum Disorder) है. मेडिकल टर्म का ये भारी-भरकम शब्द जब उसकी मां कांग्रेस नेता कनुप्रिया सत्तन और पिता तरूण तैलंग ने सुना तो उन्हें भरोसा ही नहीं हुआ. मां कनुप्रिया के कई दिन तो रोते हुए ही गुजर गए. लेकिन, अब उन्होंने अपने केशव की दुनिया को ही अपना लिया है. कनुप्रिया और तरूण अब यह बात खुलकर एक्सेप्ट करते हैं हां उनका बेटा ऑटिस्टिक है.
आइए, अब विस्तार से जानते हैं, ऑटिज्म जूझ रहे नटखट केशव को कनुप्रिया और उनके पति तरुण कैसे संभाल रहे हैं और उनकी कहानी क्या है?
चाइल्ड साइकोलोजिस्ट डॉ. विनी झारिया से जानेंगे ऑटिज्म से जुड़े हर सवाल का जवाब
- ऑटिज्म (Autism Spectrum Disorder) क्या है?
- कैसे पता चलता है कि बच्चा ऑटिस्टिक है?
- ऑटिस्टिक बच्चे के साथ कैसे डील करें?
- ऑटिज्म से जूझ रहे बच्चे के माता-पिता को क्या करना चाहिए?
- ऑटिस्टिक बच्चे को किस तरह की थैरपी दी जाती है
भाजपा नेता और कवि सत्यनारायण सत्तन की बेटी हैं कनुप्रिया
कांग्रेस नेता कनुप्रिया सत्तन मध्य प्रदेश के इंदौर की रहने वाली हैं. वे भाजपा के दिग्गज नेता और कवि सत्यनारायण सत्तन की बेटी हैं. वर्तमान में वे कांग्रेस के सम्यक इंदिरा ज्योति अभियान की महिला विंग की प्रदेश अध्यक्ष हैं और एक प्रवक्ता के तौर पर पार्टी का पक्ष रखती हैं. कनुप्रिया की शादी साल 2010 में टीकमगढ़ के रहने वाले तरुण तेलंग से हुई. शादी के तीन साल बाद दोनों एक बेटी के माता-पिता बने. नाम रखा केशु. लाइफ में सब कुछ सही चल रहा था. पति-दोनों जॉब में थे, परिवार के सपोर्ट के साथ केशु की परवरिश अच्छे से हो रही थी. इसी तरह समय आगे बढ़ा और कनुप्रिया एक बार फिर मां बनने वाली थीं. सब बहुत खुश थे. 27 मई 2022 को कनुप्रिया ने एक बेटे को जन्म को जन्म दिया. सबने मिलकर नाम रखा केशव. कनुप्रिया और तरुण परिवार के साथ मिलकर दोनों बच्चों को अच्छे से संभाल रहे थे.

अपने माता-पिता और बहन के साथ चार साल का केशव.
फ्रेंड ने किया ऑटिज्म की ओर इशारा
कई दिन रोते हुए ही गुजर गए
ज्योति की यह बात मेरे दिमाग में घर कर गई है. कुछ दिन बाद मेरा नोएडा से इंदौर जाने का प्लान था. मैंने सोच लिया था अब केशव को डॉक्टर को दिखाना है. मार्च 2024 में इंदौर पहुंची और केशव के साथ चाइल्ड साइकोलोजिस्ट डॉ. विनी झारिया से मिली. करीब 30 मिनट की मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि हां आपका बेटा ऑटिस्टिक है. यह सुनते ही मैं बहुत परेशान हो गई, घर आई और हसबैंड तरुण को कॉल कर सारी बात बताई. यह बताते हुए मैं रो रही थी. खुद तरुण भी इस बात पर यकीन नहीं कर पाए. उन्होंने कहा कि हम दिल्ली के डॉक्टर से मिलेंगे. मायके-ससुराल में कई दिन मेरे रोते हुए कटे. बाद में दिल्ली के डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने भी वही बात कही. केशव को थैरपी दिलाने की सलाह दी. अब फैसला हमें लेना था.

मां कांग्रेस नेता कनुप्रिया सत्तन को बेटे के ऑटिज्म के बारे में पता चला तो रोते हुए गुजर गए कई दिन.
करियर छोड़ बेटे को चुनने का फैसला लिया
3 महीने की थैरपी में आए डिजास्टर चेंज
मई 2024 में तीन महीने के लिए मैं केशव और मेरी बेटी इंदौर आ गए. डॉ. विनी झारिया से केशव की थैरपी शुरू हुई, तीन महीने में उसमें डिजास्टर चेंज आए. अब हम जब मॉल जाते केशव जमीन पर नहीं लेट जाता, उसने हाथ-पैर चलना भी बंद कर दिया था. ये बदलाव हमारे लिए बहुत मायने रखते थे. अब बस उसकी स्पीच आना बाकी थी. मुझे लगा कि अब नोयडा लौट जाना चाहिए, क्योंकि एक सैलरी में दो घर चलाना मुश्किल हो रहा था. अगस्त 2024 को मैं वापस आ गई. जॉब शुरू की, लेकिन यहां आने के एक महीने बाद ही केशव का बिहेवियर फिर बदलने लगा. उसने वो सब फिर शुरू कर दिया था जो पहले करता था. चीखना, बुलाने पर नहीं सुनना जैसे कई चीजें.
हमें समझ आया कि वह सिर्फ थैरपी से नहीं अपने लोगों से भी ठीक हो रहा था.

Autism Spectrum Disorde: चार साल का केशव अभी भी कुछ ही शब्द बोलता है.
जॉब छोड़कर इंदौर जाने का फैसला लेना पड़ा
कनुप्रिया कहती हैं- केशव के लिए मैंने और तरुण ने फैसला लिया कि अब मुझे इंदौर में ही रहना पड़ेगा. मैंने नौकरी से रिजाइन किया और फिर सब कुछ सेट कर नंवबर 2024 में इंदौर आ गई. इस बार हमारे साथ ससुर जी भी आए. केशव की थैरपी डॉ. विनी झारिया से फिर शुरू हुई. इस बीच, मेरी जिंदगी में भी बदलाव आया...
केशव मम्मा कहकर बुलाए इसका इंतजार है
इधर, लागतार चल रही थैरपी का असर केशव पर साफ दिखाई दे रहा था. वह मेरे बुलाने पर सुनने लगा था, किसी साउंड पर रिएक्ट करता है. कुछ शब्द बोलने भी लगा है. लेकिन, एक मां और पिता के लिए सबसे खूबसूरत पल वह होता है जब उसका बच्चा पहली बार मम्मा-पापा कहकर बुलाता है. इस पल का हम आज भी इंतजार कर रहे हैं. चुनौतियां आज भी बहुत सारी हैं, लेकिन तरुण परिवार, पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं का साथ मुझे और केशव को हर कदम पर मिल रहा है. जो इस लड़ाई में सबसे ज्यादा जरूरी है.

केशव को पजल सॉल्व करना काफी पंसद है.
ऑटिस्टिक ही नहीं, शार्प माइंडिड है बेटा
अब जानिए ऑटिज्म से जुड़े हर सवाल जवाब
चाइल्ड साइकोलोजिस्ट डॉ. विनी झारिया ने NDTV से बात करते हुए कहा कि ऑटिज्म (Autism Spectrum Disorder) कोई बीमारी नहीं हैं, लोग इसे बीमारी मानना बंद करें. कुछ थैरपी के साथ ऑटिस्टिक बच्चे की स्पीच और आइकनेक्ट या उम्र के हिसाब से उसमें जो कमियां लग रही हैं, उन्हें सही किया जा सकता है. अब देखिए डॉ. विनी झारिया का वीडियो, जिसमें वे ऑटिज्म से जुड़े हर सवाल का जवाब दे रही हैं.
चाइल्ड साइकोलोजिस्ट डॉ. विनी झारिया ने NDTV से बात करते हुए कहा कि ऑटिज्म (Autism Spectrum Disorder) कोई बीमारी नहीं हैं, लोग इसे बीमारी मानना बंद करें. कुछ थैरपी के साथ ऑटिस्टिक बच्चे की स्पीच और आइकनेक्ट या उम्र के हिसाब से उसमें जो कमियां लग रही हैं, उन्हें सही किया जा सकता…
— NDTV MP Chhattisgarh (@NDTVMPCG) June 30, 2026
1 साल से पहले बच्चों को मोबाइल दिखाना पड़ सकता है भारी! AIIMS स्टडी में ऑटिज्म का बढ़ा खतरा
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