विज्ञापन

नागपुर की जेल में महकी लजीज 'एकता खिचड़ी' की खुशबू, क्यों खास है इस खिचड़ी की कहानी, पढ़ें

पूरे कार्यक्रम के दौरान स्वच्छता, स्वास्थ्य सुरक्षा, अन्न भंडारण और अन्न प्रबंधन (फ़ूड हैंडलिंग) के उच्च मानकों का कड़ाई से पालन किया गया. जेल के रसोईघर और परिसर को स्वच्छ, सुनियोजित और अनुशासित रखा गया. यह पहल केवल भोजन वितरण तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि कैदियों के मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक पुनर्वास की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण चरण साबित हुई.

नागपुर की जेल में महकी लजीज 'एकता खिचड़ी' की खुशबू, क्यों खास है इस खिचड़ी की कहानी, पढ़ें
नागपुर:

नागपुर की सेंट्रल जेल में रविवार को एक अनूठा कार्यक्रम देखने को मिला. निरंतर पराठा महोत्सव, डोसा महोत्सव जैसे स्वादिष्ट कार्यक्रम आयोजित करने वाले और समय-समय पर खाद्य पदार्थ बनाने के नए-नए विश्व रिकॉर्ड बनाने वाले महाराष्ट्र के सुप्रसिद्ध शेफ विष्णु मनोहर ने सीधे नागपुर की सेंट्रल जेल में जाकर 'एकता खिचड़ी' नामक अभिनव पहल के माध्यम से जेल परिसर में 'महाखिचड़ी' (बड़ी मात्रा में खिचड़ी) पकाई. इस खिचड़ी का वितरण 3 हजार कैदियों के बीच किया गया. विष्णु मनोहर ने इस अवसर पर कहा कि एकता का अर्थ है भेद भूलकर एक साथ आना, आपसी सहयोग, समानता की भावना और मानवता का सम्मान. मेरा और जेल प्रशासन का यह प्रयास था कि हम इसी अर्थ को प्रत्यक्ष रूप से कार्य में उतारें.

Latest and Breaking News on NDTV

30 नवंबर को सुबह 7 बजे खिचड़ी बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई. लगभग 3 घंटे 30 मिनट में यह खिचड़ी जेल के कैदियों की सक्रिय भागीदारी से पूरी की गई. इस दौरान कैदियों ने सब्जी काटने, दालें धोने, सामग्री तैयार करने तथा अन्य आवश्यक कार्यों में अनुशासन और उत्साह के साथ मदद की. इस काम से कैदियों को खुशी, जिम्मेदारी की भावना और एकात्मता का अनुभव मिला. प्रेम, मानवता, समानता और सामूहिक प्रयासों का प्रतीक यह ‘एकता खिचड़ी' बाद में जेल के लगभग 3000 कैदियों को वितरित की गई.

पूरे कार्यक्रम के दौरान स्वच्छता, स्वास्थ्य सुरक्षा, अन्न भंडारण और अन्न प्रबंधन (फ़ूड हैंडलिंग) के उच्च मानकों का कड़ाई से पालन किया गया. जेल के रसोईघर और परिसर को स्वच्छ, सुनियोजित और अनुशासित रखा गया. यह पहल केवल भोजन वितरण तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि कैदियों के मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक पुनर्वास की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण चरण साबित हुई. यह अभिनव कार्यक्रम अपर पुलिस महानिदेशक एवं कारागृह महानिरीक्षक (कारागृह व सुधार सेवा), महाराष्ट्र राज्य सुहास वारके तथा माननीय कारागृह महानिरीक्षक श्री योगेश देसाई के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया. नागपुर सेंट्रल जेल के अधीक्षक वैभव आगे और अतिरिक्त अधीक्षक दीपा आगे की संकल्पना व आनंद पानसरे (वरिष्ठ जेल अधिकारी) के विशेष प्रयासों से यह पहल सफल हुई.

Latest and Breaking News on NDTV

एकता खिचड़ी के पीछे की रोचक कहानी...

दस बाय दस फुट की कड़ाही का उपयोग करके इस खिचड़ी को पकाने में पुलिस कर्मियों ने भी विष्णु मनोहर का खुशी-खुशी सहयोग किया. यह विचार कैसे आया और इसे लागू करते समय आई कठिनाइयों के बारे में NDTV इंडिया से बात करते हुए विष्णु मनोहर ने कहा कि, डेढ़ साल पहले मेरे एक कार्यक्रम के दौरान एक व्यक्ति मुझसे मिलने आया था. अनजाने में हुई गलती के कारण उन्हें जीवन के कुछ साल जेल में बिताने पड़े थे. अच्छे-अच्छे खाने के शौकीन इस व्यक्ति ने मुझे बताया किजब आपका पराठा फेस्टिवल हुआ था, तब मैं जेल में था... अखबारों और टीवी से पता चला. आप कभी जेल में रहने वाले लोगों के लिए भी कोई स्वादिष्ट व्यंजन बनाइए.

विष्णु कहते हैं, कि उनके इस वाक्य से मुझे प्रेरणा मिली. मैं जेल अधिकारियों से मिला, लेकिन उन्होंने मुझे नियम दिखाए. उन्हें भी यह विचार अच्छा लगा, लेकिन उनका कहना था कि हमारे बर्तनों में हमारे रसोइए बनाएंगे, आप यहाँ आकर उनका मार्गदर्शन करें. मैंने उन्हें समझाने की कोशिश की कि अगर एक भव्य कड़ाही में, शानदार उत्सव के ढंग से, आपके और हमारे सहयोग से यह किया जाए, तो यह घर जैसे माहौल की एक यादगार घटना बन जाएगी. जिस तरह कड़ाही में चावल, चना दाल, तूर दाल, मूंग दाल, मूंगफली, तेल, मिर्च, नमक, मसाले, धनिया, हल्दी, लहसुन, अदरक, धनिया पत्ती, हरी मिर्च, फूलगोभी, गाजर, आलू और दही का मेल होता है.जब सब एक साथ मिलते हैं, तभी वह स्वाद और वह शानदार खुशबू बनती है... उसी तरह एकता का संदेश जाएगा, अगर सब मिलकर एक साथ खिचड़ी का आनंद लेंगे.

Latest and Breaking News on NDTV

आखिरकार, अनुमति मिली और कड़ाही को जेल परिसर में ले जाने में सफलता मिली. अन्य सभी सामग्री जेल प्रशासन ने उपलब्ध कराई और विष्णु मनोहर ने अपने चार सहयोगियों के साथ कुछ घंटों के लिए जेल जाकर इस अनूठे कार्यक्रम को पूरा किया. विष्णु मनोहर ने स्पष्ट किया कि ‘एकता खिचड़ी' शासन की अधिसूचना दिनांक 28 मई 2006 के अनुसार निर्धारित डाइट स्केल के अनुसार तैयार की गई थी. इसके लिए उच्च गुणवत्ता वाली और पौष्टिक सामग्री का उपयोग किया गया.

यहां यह उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी शेफ विष्णु मनोहर और उनकी टीम ने नागपुर सेंट्रल जेल में कैदियों के लिए फास्ट फूड प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया था. यह देखा गया है कि उस प्रशिक्षण से कई कैदियों के जीवन को एक नई दिशा मिली है. जेल से छूटने के बाद कुछ कैदियों ने अपना फास्ट फूड केंद्र शुरू करके स्वावलंबन हासिल किया, जबकि कुछ को प्रतिष्ठित रेस्टोरेंट में रोजगार के अवसर मिले हैं.
 फिल्मों वाली जेल काल्पनिक ही!

जब विष्णु मनोहर से पूछा गया कि क्या हिंदी सिनेमा में दिखाई जाने वाली जेलों में पानी ज़्यादा और दाल कम वाली दाल और जली हुई मोटी रोटी मिलती है, तो वे हंसकर बोले कि निश्चित रूप से नहीं, फिल्मों की क्या बात करते हैं, उन्हें छोड़ दीजिए. मैं खुद भात, दाल, रोटी और सब्जी वाली उनकी पूरी थाली देखकर आया हूं. इसमें कोई संदेह नहीं है कि महाराष्ट्र की जेलों में उच्च गुणवत्ता वाला और पौष्टिक भोजन मिलता है. खिचड़ी बनाने की प्रक्रिया में वामन निमजे (जे.ओ. श्रेणी–4),  के. पी. हिवाळे (जे.ओ. श्रेणी–1), किशोर रांगडाळे (सूबेदार), राजू मुंदने (हवलदार), सुधाकर आंबेकर (हवलदार), किशोर चावरे (हवलदार), धमपाल शेडरे तथा अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे. (इनपुट - संजय रमाकांत तिवारी)

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com