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शिवसेना शिंदे नेता ने मतदान के दिन बंधक बनाया और पीटा, युवक ने सुनाई वोटिंग के दिन की डरावनी कहानी

पीड़ित सुनील कुमार ने कहा कि मैं बार-बार उनसे गुहार लगाता रहा था कि मुझे वोट डालने दें ताकि मैं काम पर जा सकूं, लेकिन उन्होंने मुझे रोक कर रखा.मैंने उनसे कहा कि बाबा साहेब ने मुझे वोट देने का अधिकार दिया है, मुझे वोट डालना है, लेकिन वो नहीं माने.

शिवसेना शिंदे नेता ने मतदान के दिन बंधक बनाया और पीटा, युवक ने सुनाई वोटिंग के दिन की डरावनी कहानी
कार्यकर्ताओं ने कार्यालय में बिठाकर पीटा
NDTV
  • सुनील ने बताया कि उन्हें नेतवली शाखा में बुलाकर मतदान करने से रोका गया और उनका मोबाइल जबरन छीन लिया गया
  • सुनील को शाम सात बजे तक शाखा में रखा गया और छोड़े जाने पर धमकी दी गई कि वह इस घटना की जानकारी न दें
  • सुनील ने कहा कि उन्होंने किसी के खिलाफ काम नहीं किया था, वे केवल मतदान करके अपने काम पर जाना चाहते थे
मुंबई:

महाराष्ट्र में बीते दिनों हुए निकाय चुनाव के दौरान शिंदे गुट के नेता की दबंगई का एक मामला सामने आया है. बताया जा रहा है कि शिंदे गुट के नेता और पार्टी कार्यकर्ताओं ने अपने दफ्तर में एक युवक को बुलाकर पहले उसे बंधक बनाया औऱ बाद में उसकी पिटाई की. NDTV पीड़ित सुनील कुमार मोहनलाल जायसवाल से बात की है. उन्होंने NDTV से कहा कि 15 जनवरी को वह नेतवली हुंबा बाबा पहाड़ी पर अपने चाचा के घर गया था. मैंने उनसे कहा कि चलिए मतदान करके काम पर चलते हैं. तभी सुबह 9:20 बजे मुझे इरफ़ान तांबोली का फोन आया कि नेतवली शाखा में आओ. मैंने पूछा किसलिए? उसने कहा कि 10 मिनट में यहां पहुंचो वरना मैं ऊपर आता हूं. 

इसके बाद जब मैं नेतवली शाखा पहुंचा तो इरफ़ान तांबोली और प्रवीण लहू महात्रे ने मेरे साथ मारपीट की और मुझे शाखा में बिठा लिया. इसके बाद उन्होंने जबरन मेरा मोबाइल छीन लिया और मुझे उस दिन मतदान नहीं करने दिया. मैं बार-बार उनसे गुहार लगाता रहा था कि मुझे वोट डालने दें ताकि मैं काम पर जा सकूं, लेकिन उन्होंने मुझे रोक कर रखा.मैंने उनसे कहा कि बाबा साहेब ने मुझे वोट देने का अधिकार दिया है, मुझे वोट डालना है, पर उन्होंने कहा कि शाम 5:30 बजे तक चुपचाप यहीं बैठे रहो. मैं चुपचाप बैठा रहा और उन्होंने मुझे शाम 7 बजे छोड़ा.  

छोड़ते समय उन्होंने मुझे धमकी दी कि यह बात किसी को मत बताना, अगर तुमने किसी को बताया तो मेरे पास बहुत लड़के हैं, पैसे देकर तुम्हें जान से मार दूंगा. जब सुनील से पूछा गया कि वो लड़के जिन्होंने उसे कार्यालय में बिठाया था वो किस पार्टी के थो उसने कहा कि उनका नाम प्रवीण लहू महात्रे और इरफान तांबोली है, वो दोनों शिवसेना शिंदे पार्टी के थे. आखिर सुनील को बंधक क्यों बनाया गया? इस सवाल के जवाब में सुनील ने बताया कि उन्होंने मुझे रोक कर रखा और पूछा कि क्या तुम मेरे खिलाफ काम करते हो? मैंने उनसे कहा कि मैं आपके खिलाफ कुछ नहीं कर रहा, बस वोट डालकर अपने काम पर जाना चाहता हूँ.

क्या आप किसी दूसरी पार्टी का प्रचार कर रहे थे? इतने लोगों में से सिर्फ आपको ही निशाना बनाने का क्या कारण था? इस पर सुनील ने कहा कि इसके बारे में मुझे कुछ नहीं पता, यह तो वही जान सकते हैं. जब सुनील से पूछा गया कि आखिर वे किसके लड़के हैं? तो सुनील ने बताया कि वे मल्लेश शेट्टी साहब के कार्यकर्ता हैं, लेकिन मल्लेश शेट्टी साहब या उमेश शेट्टी साहब ने मुझे कुछ नहीं कहा. सिर्फ प्रवीण लहू महात्रे और इरफ़ान तांबोली ने मेरे साथ मारपीट की है.

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