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"महाराष्ट्र में हर घंटे हो रहा है एक बलात्कार"- पुणे रेप कांड को लेकर रोहित पवार ने सरकार को घेरा

Rohit Pawar Nasrapur Rape Case: एनसीपी विधायक रोहित पवार ने पुणे के नसरापुर कांड के पीड़ित परिवार से मुलाकात की और राज्य में बढ़ती बलात्कार की घटनाओं पर सरकार को घेरा. जानें उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा और पुलिस की भूमिका पर क्या बड़े दावे किए.

"महाराष्ट्र में हर घंटे हो रहा है एक बलात्कार"- पुणे रेप कांड को लेकर रोहित पवार ने सरकार को घेरा
  • पुणे जिले के नसरापुर में चार साल की मासूम बच्ची के साथ हुई दरिंदगी और हत्या ने महाराष्ट्र को झकझोर दिया है
  • एनसीपी विधायक रोहित पवार ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर सरकार की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं
  • महाराष्ट्र में हर रोज औसतन 24 बलात्कार की घटनाएं हो रही हैं, जिससे महिलाओं की सुरक्षा गंभीर चिंता का विषय है

Nasrapur Rape Case Pune:पुणे जिले के नसरापुर (Nasrapur) में एक 4 साल की मासूम बच्ची के साथ हुई दरिंदगी और उसकी हत्या ने पूरे महाराष्ट्र को झकझोर कर रख दिया है. अब एनसीपी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर संवेदनाएं व्यक्त की है और राज्य की कानून व्यवस्था को लेकर देवेन्द्र फडणवीस सरकार पर सीधा हमला बोला है. पवार ने दावा किया कि महाराष्ट्र में औसतन हर रोज 24 बलात्कार की घटनाएं हो रही हैं, जिसका मतलब है कि राज्य में हर घंटे एक महिला के साथ दरिंदगी हो रही है. साल 2025 के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि पोक्सो (POCSO) के तहत ही 13,000 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं, जो बच्चों के खिलाफ बढ़ती संवेदनहीनता को दर्शाता है.

लापता महिलाएं और पेंडिंग मामलों का अंबार

रोहित पवार ने राज्य में महिलाओं के खिलाफ छेड़छाड़ की बढ़ती घटनाओं पर डेटा पेश करते हुए कहा कि एक साल के भीतर 50,000 से ज्यादा ऐसी वारदातें सामने आई हैं.

सबसे डरावना आंकड़ा लापता महिलाओं का है, जहां राज्य भर में करीब डेढ़ लाख महिलाएं और लड़कियां लापता हैं. इनमें से 30,000 का तो अब तक कोई सुराग ही नहीं मिल पाया है.

विधायक ने बदलापुर, चाकण, बीड और गोंदिया जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि कई गंभीर मामलों में घटना के 90 दिन बीत जाने के बाद भी चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है, जो न्याय प्रणाली की सुस्ती को उजागर करता है.

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'शक्ति कानून' पर केंद्र और राज्य को घेरा

विधायक ने कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए 'शक्ति कानून' का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया. उन्होंने याद दिलाया कि महाविकास अघाड़ी सरकार के दौरान महिलाओं की सुरक्षा के लिए कड़ा 'शक्ति कानून' लाया गया था, जिसे केंद्र सरकार ने वापस भेज दिया. पवार ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए मांग की है कि राज्य सरकार को जल्द ही विशेष सत्र बुलाना चाहिए और इस कड़े कानून को फिर से पारित कर लागू करना चाहिए. उन्होंने सरकार को नसीहत दी कि उन्हें केवल वीआईपी सुरक्षा और राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए पुलिस बल का इस्तेमाल करने के बजाय, महिलाओं की सुरक्षा के लिए 'स्पेशल कानून' लाने पर ध्यान देना चाहिए.

पुलिस के बेजा इस्तेमाल और राजनीति का आरोप

रोहित पवार ने आरोप लगाया कि साल 2014 के बाद से राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराधों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है. उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग का सही इस्तेमाल होने के बजाय, सरकार उनका उपयोग अपनी राजनीति साधने के लिए कर रही है. पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाते हुए उन्होंने उन्हें बिना डरे पुलिस के पास जाने के लिए प्रेरित किया. पवार ने साफ कहा कि संतों और महापुरुषों की इस भूमि पर, जहाँ महिलाओं का सम्मान सर्वोपरि है, ऐसी घटनाएं महाराष्ट्र की छवि को धूमिल कर रही हैं. साथ ही उन्होंने अंधविश्वास विरोधी कानून को भी और अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत पर जोर दिया.
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लेखक के बारे में
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पूजा भारद्वाज
Associate Editor -Current Affairs
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