- संकट की इस खड़ी में भी संजय राउत दावा कर रहे हैं कि पार्टी में टूट जैसा कुछ भी नहीं है.
- सूत्रों के मुताबिक- 9 में से 6 सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना में जाने को तैयार हैं.
- आज स्पीकर से मिल सकते हैं श्रीकांत शिंदे.
उद्धव ठाकरे को इन दिनों अपनी पार्टी शिवसेना की चिंता सता रही है. महाराष्ट्र की राजनीति इन दिनों मुंबई से दिल्ली तक चर्चा में है. उद्धव ठाकरे की शिवसेना पर टूट का खतरा लगातार मंडरा रहा है. सूत्रों के हवाले से मिली खबर के मुताबिक, 9 में से 6 सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना में जाने को तैयार हैं. वे इन दिनों अपना डेरा दिल्ली में डाले हुए हैं. सूत्रों के मुताबिक, एकनाथ शिंदे भी दिल्ली में मौजूद हैं. मंगलवार रात वे जयपुर गए थे, वहां से फिर दिल्ली वापस आ गए. खबर ये भी है कि एकनाथ शिंदे रात में उद्धव ठाकरे के सांसदों से मिले थे. सूत्रों के मुताबिक, शिंदे और यूबीटी सांसदों के बीट रात को बैठक हुई थी.
आज स्पीकर से मिल सकते हैं श्रीकांत शिंदे
संकट की इस खड़ी में भी संजय राउत दावा कर रहे हैं कि पार्टी में टूट जैसा कुछ भी नहीं है. उनके सभी सांसद एकजुट हैं. शिंदे गुट के 'ऑपरेशन टाइगर' को नाकाम करने के लिए उद्धव की यूबीटी शिवसेना ने पूरी ताकत झोंक दी है. अब सूत्रों के हवाले से खबर सामने आ रही है कि ठाकरे गुट के नेता श्रीकांत शिंदे के दिल्ली वाले घर पर उद्धव गुट के सांसदों के साथ बुधवार सुबह 8.30 बजे एक बैठक हो सकती है. इस बैठक में एकनाथ शिंदे भी मौजूद रहेंगे. संभव है कि मीटिंग के बाद श्रीकांत स्पीकर से मुलाकात करें. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला भी मंगलवार रात दिल्ली लौट आए. खबर है कि श्रीकांत उद्धव का गुट छोड़ शिंदे गुट में शामिल हो गए हैं.
सांसद अरविंद सावंत ने स्पीकर को लिखी चिट्ठी
उद्धव ठाकरे गुट के शिवसेना सांसद और ग्रुप लीडर अरविंद सावंत भी आज दिल्ली पहुंचने वाले हैं. उन्होंने लोकसभा स्पीकर को चिट्ठी लिखकर कहा है कि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को हाउस में अपने सही ऑथराइज़्ड लीडर और व्हिप के ज़रिए रिप्रेजेंट करने वाली अकेली पॉलिटिकल पार्टी के तौर पर पहचान दी जानी चाहिए. पार्टी को रिप्रेजेंट करने का दावा करने वाले किसी भी कथित ग्रुप या अलग हुए ग्रुप को कोई अलग पहचान, स्टेटस, प्रिविलेज या फैसिलिटी नहीं दी जानी चाहिए. अगर ऐसा कोई लेटर मिलता है, तो शिवसेना (यूबीटी) को उनके ऑफिस के सामने अपनी बात रखने का मौका दिए बिना उस पर कोई फैसला नहीं लिया जाना चाहिए. उन्होंने आगे लिखा कि पार्टी के पास कानून के तहत मौजूद पावर हैं. इसमें दसवीं अनुसूची के प्रोविज़न को लागू करने और ऊपर बताए गए कॉन्स्टिट्यूशनल प्रिंसिपल्स के खिलाफ किसी भी व्यवहार के संबंध में ज़रूरी कदम उठाने की पावर शामिल है.
मुंबई से दिल्ली तक सियासी हलचल तेज
बता दें कि पार्टी में होने वाले बड़े बिखराव और विरोधी खेमे के 'ऑपरेशन टाइगर' की आहट को भांपते हुए उद्धव ठाकरे ने मोर्चा संभाल लिया है. पार्टी को टूट से बचाने के लिए मातोश्री ने अपना 'क्राइसिस मैनेजमेंट' प्लान एक्टिव कर दिया है. मुंबई से दिल्ली तक सियासी हलचल तेज है. खबर के मुताबिक, ठाकरे की शिवसेना के चार प्रमुख सांसद इस वक्त दिल्ली में हैं. शिवसेना के फायरब्रांड नेता संजय राउत और सीनियर नेता अनिल देसाई भी दिल्ली पहुंच चुके हैं. सांसद अरविंद सावंत और राजाभाऊ वाजे भी बुधवार को दिल्ली पहुंचने वाले हैं.
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