- घायल गोविंदाओं के इलाज के बिल को लेकर शिवसेना कार्यकर्ताओं ने हॉस्पिटल में हंगामा किया था.
- 25-30 कार्यकर्ताों ने महिला डॉक्टर के साथ बदसलूकी की और बिलिंग स्टाफ को थप्पड़ मारा.
- पीड़ित डॉक्टर बोलीं- इतनी डरी हूं कि घर जाने में डर लगता है.
महाराष्ट्र के पालघर में एक अस्पताल में दही-हंडी समारोह के दौरान घायल हुए पांच 'गोविंदाओं' के मेडिकल बिल को लेकर एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना के करीब 25-30 कार्यकर्ता ICU में घुस गए. उन्होंने एक डॉक्टर के साथ बदसलूकी की और स्टाफ को धमकाया. इसके साथ ही, शनिवार रात ICU में भर्ती कराए गए एक घायल शख्स को वे जबरदस्ती अपने साथ ले गए. यह जानकारी बिलिंग असिस्टेंट ने NDTV को दी, जिन पर भी हमला किया गया था. जन्माष्टमी के मौके पर 'दही-हंडी' परंपरा में हिस्सा लेने वाले कृष्ण भक्तों को 'गोविंदा' कहा जाता है.
यह घटना शनिवार तड़के रिलीफ हॉस्पिटल में हुई, जब पालघर में शिवसेना के केंद्रीय कार्यालय के बाहर दही-हंडी कार्यक्रम के दौरान घायल हुए 'गोविंदाओं' को इलाज के लिए वहां लाया गया था. इस मामले पर एनडीटीवी ने हॉस्पिटल के डॉक्टर से बातचीत की है.
एनडीटीवी से बात करते हुए डॉ. लिगी मोल कहती हैं, "कुल पांच मरीज घायल हुए थे और उन्हें हमारे अस्पताल लाया गया. हमने तुरंत उनका इलाज शुरू कर दिया. इससे पहले हमने उनके रिश्तेदारों को साफ बता दिया था कि MRI, CT स्कैन और कई दूसरी जांचों की जरूरत होगी. उन्होंने हमसे कहा, 'कृपया जो भी जरूरी हो, वह करें, बस इन लोगों की जान बचा लें.'"
उन्होंने आगे कहा कि हमने उसी के मुताबिक इलाज शुरू किया, लेकिन बाद में, अचानक वे लोग इमरजेंसी वार्ड में घुस आए और मांग करने लगे कि हम तुरंत मरीजों को छुट्टी दे दें.
'डॉक्टरों के बदसलूकी क्यों...'
डॉ. लिगी मोल वाकये के बारे में बात करते हुए कहती हैं, "जब हमने उनसे कम से कम उस इलाज का पेमेंट करने को कहा जो पहले ही किया जा चुका था, तो वे हिंसक हो गए. रिसेप्शनिस्ट को बेरहमी से थप्पड़ मारा गया. हमें बिल्कुल नहीं पता कि हमारी क्या गलती थी. जिस शख्स राहुल खरात को गिरफ्तार किया गया है, उसने न सिर्फ मुझे धमकाया बल्कि बेहद अपमानजनक और अस्वीकार्य भाषा का इस्तेमाल करते हुए मेरे साथ बदसलूकी भी की. उसने जो शब्द इस्तेमाल किए, वे पूरी तरह से अनुचित थे, खासकर एक महिला के प्रति."
वे आगे कहती हैं कि मुझे नहीं पता कि मेरी क्या गलती थी, लेकिन एक डॉक्टर के तौर पर, मुझे अब भी डर लगता है. घटना के बाद दो दिनों तक मैं इतनी डरी हुई थी कि अस्पताल परिसर से बाहर नहीं निकल पा रही थी. मुझे घर वापस जाने में डर लगता है.
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डॉ. लिगी मोल ने आगे कहा, "मैं बस इतना पूछना चाहती हूं कि डॉक्टरों के साथ इस तरह बदसलूकी क्यों की जा रही है? हमारी सुरक्षा की क्या गारंटी है? सरकार ऐसे दोषियों के खिलाफ क्या कर रही है, जो खुलेआम घूम रहे हैं?"
"ऐसी घटनाओं के बाद, लोग डॉक्टर बनने से डरेंगे. कोई भी ऐसे पेशे में नहीं आना चाहेगा, जहां डॉक्टरों के साथ सिर्फ अपनी ड्यूटी करते वक्त बदसलूकी और धमकी दी जाती हो. हमने उनसे सिर्फ उस इलाज के लिए पैसे लिए जो हमने किया था. हमने उनसे एक भी रुपया एक्स्ट्रा नहीं लिया."
डॉ. लिगी मोल ने कहा, "ICU एक प्रतिबंधित क्षेत्र है, जहां किसी को भी प्रवेश करने की अनुमति नहीं है, यहां तक कि हमारे प्रशासनिक कर्मचारियों को भी नहीं. लेकिन इन लोगों ने न सिर्फ ICU में प्रवेश किया, बल्कि ऐसी स्थिति पैदा कर दी कि वहां भर्ती एक अन्य मरीज बहुत बुरी तरह डर गया. उसकी हृदय गति 150 से ऊपर चली गई और इसके बाद उसकी सर्जरी टालनी पड़ी."
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