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This Article is From Jan 25, 2026

ओशिवारा फायरिंग केस: ड्रोन और फॉरेंसिक से कैसे सुलझी गुत्थी? KRK तक कैसे पहुंची जांच? समझिए

मुंबई के ओशिवारा इलाके में हुई फायरिंग में एक्टर केआरके बुरी तरह फंस गए हैं. ड्रोन और फॉरेंसिक की मदद से इसकी गुत्थी सुलझी.

ओशिवारा फायरिंग केस: ड्रोन और फॉरेंसिक से कैसे सुलझी गुत्थी? KRK तक कैसे पहुंची जांच? समझिए
कमाल आर खान.
  • मुंबई के ओशिवारा में नालंदा बिल्डिंग में हुई फायरिंग की जांच में पुलिस ने ड्रोन और फॉरेंसिक का इस्तेमाल किया
  • फॉरेंसिक जांच में फायरिंग पैलेट .32 एसीपी कैलिबर के हथियार से हुई और KRK के नाम पर इसी कैलिबर का रिवॉल्वर था
  • ड्रोन सर्वे से फायरिंग की दिशा, दूरी और बाधाओं का आकलन हुआ, जिससे गोली का निशाना सिद्ध हुआ
मुंबई:

मुंबई के ओशिवारा इलाके में नालंदा बिल्डिंग में हुई रहस्यमयी फायरिंग के मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है. बिना किसी चश्मदीद गवाह और फायरिंग के उलझे एंगल के बावजूद, ओशिवारा पुलिस ने ड्रोन टेक्नोलॉजी और फॉरेंसिक जांच के जरिए इस केस की परतें खोलीं और जांच की कड़ी एक्टर कमाल राशिद खान (केआरके) तक पहुंची.

पुलिस सूत्रों के अनुसार, घटनास्थल से बरामद संदिग्ध वस्तु की फॉरेंसिक जांच में पुष्टि हुई कि वह एक पैलेट थी और फायरिंग पॉइंट 32 ACP कैलिबर के हथियार से की गई थी. इसके बाद इलाके में वैध हथियार लाइसेंस की जांच की गई, जिसमें KRK के नाम पर इसी कैलिबर का रिवॉल्वर दर्ज पाया गया. इसी बिंदु पर जांच की दिशा स्पष्ट हुई.

ड्रोन सर्वे बना जांच का टर्निंग पॉइंट

शक के आधार पर पुलिस टीम KRK के एमएचएडीए बंगले पर पहुंची, जहां से ड्रोन उड़ाकर फायरिंग की संभावित दिशा, दूरी और बीच में मौजूद रुकावटों का आकलन किया गया. ड्रोन के जरिए तैयार की गई एरियल मैपिंग में यह सामने आया कि उसी दिशा से चली गोली नालंदा बिल्डिंग तक पहुंच सकती थी.

पुलिस सूत्रों के अनुसार, ड्रोन सर्वे से यह भी साफ हुआ कि दोनों स्थानों के बीच कोई ऐसी ठोस बाधा नहीं थी, जिससे पैलेट का रास्ता रुकता. यही तकनीकी पुष्टि जांच में निर्णायक साबित हुई.

न गवाह, न सीधा सुराग

यह मामला 18 जनवरी को सामने आया था, जब फिल्म निर्देशक नीरज कुमार मिश्रा ने पुलिस को सूचना दी कि नालंदा बिल्डिंग स्थित उनके चौथी मंजिल के फ्लैट में गोली लगने जैसा छेद दिखाई दिया है. मौके पर मौजूद मॉडल प्रतीक बैद ने पुलिस को एक 'बटन जैसी' वस्तु सौंपी थी, जिसे बाद में फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया.

शुरुआती जांच में पुलिस सबसे ज्यादा फायरिंग के एंगल को लेकर उलझन में थी. आसपास का इलाका अंडर-कंस्ट्रक्शन होने के कारण खुले मैदान और टीन शेड्स मौजूद थे, जिससे सीधे फायरिंग की संभावना स्पष्ट नहीं हो पा रही थी. पुलिस सूत्रों के अनुसार ड्रोन सर्वे से यह तकनीकी रूप से साबित हो गया कि पैलेट उस दूरी तक पहुंच सकती थी.

आरोपों से इनकार, पुलिस रिमांड

KRK ने आरोपों से इनकार किया है. उनके वकील नागेश मिश्रा का कहना है कि गिरफ्तारी के आधार स्पष्ट नहीं किए गए और उनके मुवक्किल को झूठा फंसाया गया है.

फिलहाल पुलिस ने KRK के खिलाफ बीएनएस की धारा 110 के तहत गैर-जमानती मामला दर्ज किया है और उन्हें 27 जनवरी तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है. पुलिस अब यह जांच कर रही है कि घटना पूरी तरह दुर्घटनावश हुई या इसके पीछे कोई अन्य मंशा थी. मामले के मद्देनजर KRK के हथियार लाइसेंस को रद्द करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है.

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