Nitin Gadkari Water Project Failure: नागपुर की बहुचर्चित 24x7 जल आपूर्ति योजना को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने खुलकर नाराजगी जताई है. जिस योजना को उन्होंने अपने ड्रीम प्रोजेक्ट के तौर पर देखा था, वही अब उनके सामने नाकामी की मिसाल बनकर खड़ी है. सार्वजनिक मंच से गडकरी ने साफ शब्दों में स्वीकार किया कि यह योजना सफल नहीं हो पाई और इसके लिए उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था और अधिकारियों की कार्यशैली को जिम्मेदार ठहराया.
पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में फूटा गुस्सा
नागपुर में आयोजित एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान नितिन गडकरी ने इस मामले पर खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि जिस योजना से शहर को चौबीसों घंटे पानी की सुविधा मिलनी थी, वह पूरी तरह से फ्लॉप हो गई. गडकरी का कहना था कि यह उनके लिए व्यक्तिगत तौर पर भी दुखद है, क्योंकि यह परियोजना उनके दिल के बेहद करीब थी.
अधिकारियों की ‘बाबूगिरी' पर सीधा आरोप
गडकरी ने योजना की विफलता के लिए अधिकारियों और सलाहकारों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि फील्ड में जाकर जमीनी हकीकत समझने के बजाय अधिकारी घर बैठे गूगल के भरोसे विकास का खाका तैयार कर रहे हैं. उन्होंने इस रवैये को खुलकर “बाबूगिरी” करार दिया और कहा कि इसी वजह से योजनाएं कागजों से बाहर नहीं निकल पा रहीं.
गलत प्लानिंग से जनता को हुआ नुकसान
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि बिना ठोस सर्वे और जमीनी समझ के तैयार की गई डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) के चलते योजना में कई बड़ी खामियां रह गईं. इसका सीधा नुकसान आम जनता को उठाना पड़ा. समय और पैसे दोनों की बर्बादी हुई, लेकिन नतीजा शून्य रहा.
धरातल से जुड़ी योजना की जरूरत
गडकरी ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि जब तक योजनाओं को जमीन पर उतरकर, वास्तविक परिस्थितियों को समझकर तैयार नहीं किया जाएगा, तब तक ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स का सफल होना मुश्किल है. उन्होंने साफ कहा कि केवल प्रयोग करने से विकास नहीं होता, बल्कि सही सोच और ईमानदार अमल जरूरी है.
ड्रीम प्रोजेक्ट की नाकामी बना सबक
नागपुर की 24x7 जल आपूर्ति योजना को फेल बताते हुए गडकरी ने इसे एक बड़ा सबक भी बताया. उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में ऐसी गलतियों को दोहराने की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए. उनका मानना है कि अगर प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव नहीं हुआ, तो अच्छी से अच्छी योजना भी कागजों में ही दम तोड़ देगी.
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