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This Article is From Apr 21, 2026

युद्ध के बीच तेल के लिए दुनिया परेशान, गडकरी ने देश को बताया क्या है समाधान

गडकरी ने बताया कि भारत में भी अब 100% इथेनॉल से चलने वाले दोपहिया और कार विकसित हो चुकी हैं, जिन्हें बजाज, टीवीएस, हीरो, टोयोटा, टाटा, महिंद्रा और हुंडई जैसी कंपनियों ने तैयार किया है.

युद्ध के बीच तेल के लिए दुनिया परेशान, गडकरी ने देश को बताया क्या है समाधान
  • गडकरी ने कहा कि भारत को ऑटोमोबाइल ईंधन में 100 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण हासिल करना चाहिए.
  • भारत अपनी कुल तेल जरूरत का लगभग 87 प्रतिशत आयात करता है और 22 लाख करोड़ रुपए का फॉसिल फ्यूल आयात करता है.
  • गडकरी ने बताया कि भारत ने 2025 तक 100 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य 2030 से पहले हासिल कर लिया है.
नई दिल्ली:

ईरान‑इजरायल युद्ध के बीच वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल को लेकर चिंता बढ़ गई है, क्योंकि होर्मूज जलडमरूमध्य के बंद होने से सप्लाई पर असर पड़ा है. ऐसे हालात में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने देश को बताया है कि इस संकट से निपटने का समाधान क्या हो सकता है और भारत इससे कैसे आत्मनिर्भर बन सकता है. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि भारत को जल्द ही ऑटोमोबाइल ईंधन के रूप में 100 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण हासिल करने का लक्ष्य रखना चाहिए, ताकि आयातित तेल पर निर्भरता कम हो सके, जो ईरान युद्ध जैसे भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान के प्रति देश को संवेदनशील बनाता है.

मंत्री ने बताया कि भारत अपनी कुल तेल जरूरत का लगभग 87 प्रतिशत आयात करता है. केंद्रीय मंत्री ने इंडियन फेडरेशन ऑफ ग्रीन एनर्जी के ग्रीन ट्रांसपोर्ट कॉन्क्लेव में अपने संबोधन में कहा कि हम 22 लाख करोड़ रुपए के फॉसिल फ्यूल आयात करते हैं, जो प्रदूषण भी बढ़ाता है. इसलिए हमें वैकल्पिक ईंधन और बायो-फ्यूल के उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में काम करना होगा.

'ब्राजील जैसे देशों में 100 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का उपयोग'

उन्होंने आगे कहा कि निकट भविष्य में भारत को 100 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण हासिल करने का लक्ष्य रखना चाहिए. पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण आज ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना जरूरी है. 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ई20) लॉन्च किया था. वर्तमान में भारतीय वाहन ई20 पेट्रोल पर थोड़े बदलाव के साथ चल सकते हैं, जिससे इंजन में जंग जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है. ब्राजील जैसे देशों में 100 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का उपयोग होता है.

ग्रीन हाइड्रोजन भविष्य का ईंधन... गडकरी

पेट्रोल और डीजल वाहनों के उपयोग को कम करने की जरूरत पर जोर देते हुए गडकरी ने कहा, "हम लोगों को जबरदस्ती पेट्रोल-डीजल वाहन खरीदने से नहीं रोक सकते." ई20 को लेकर सोशल मीडिया पर बढ़ती चिंताओं के बारे में उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम सेक्टर इस कदम के खिलाफ लॉबिंग कर रहा है. उन्होंने ऑटोमोबाइल कंपनियों से कहा कि वे लागत के बजाय गुणवत्ता पर ध्यान दें, इससे उन्हें नए बाजारों में जगह बनाने में मदद मिलेगी. गडकरी ने यह भी कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन भविष्य का ईंधन है, लेकिन इसे व्यावहारिक बनाने के लिए हाइड्रोजन फ्यूल स्टेशनों की लागत कम करना जरूरी है.

हाइड्रोजन के ट्रांसपोर्ट में दिक्कत है. साथ ही, हमें 1 किलो हाइड्रोजन को 1 डॉलर में तैयार करना होगा ताकि भारत ऊर्जा निर्यातक बन सके. सर्कुलर इकोनॉमी पर ध्यान देकर भारत में रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं. 1 अप्रैल से लागू होने वाले कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (सीएएफई III) मानकों का इलेक्ट्रिक और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा. भारत में इथेनॉल को बढ़ावा देना किसी व्यक्ति या निजी लाभ के लिए नहीं, बल्कि देश को ईंधन आयात से मुक्त करने, प्रदूषण कम करने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से किया जा रहा है.

नितिन गडकरी

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री

गडकरी ने स्पष्ट किया कि भारत में खाद्यान्न संकट का कोई खतरा नहीं है, क्योंकि देश में चावल, गेहूं, मक्का और शक्कर का उत्पादन जरूरत से कहीं अधिक है. उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा भी था जब पंजाब‑हरियाणा में अनाज रखने के लिए रेलवे स्टेशनों का इस्तेमाल करना पड़ा था, क्योंकि गोदाम कम पड़ गए थे. आज स्थिति यह है कि देश में कृषि उत्पादन सरप्लस में है और उसी अधिशेष का उपयोग इथेनॉल बनाने में किया जा रहा है.

उन्होंने बताया कि इथेनॉल मिश्रण को 2030 के लक्ष्य से पहले 2025 तक हासिल कर लिया गया है, जिसकी वजह कृषि उत्पादन में वृद्धि और वैकल्पिक स्रोतों- जैसे गन्ने का रस, मोलासिस, टूटे चावल, मक्का, बांस और पराली—का उपयोग है. इससे अब तक लगभग ₹1.8 लाख करोड़ का तेल आयात बचाया जा चुका है और इसका सीधा फायदा किसानों को मिला है. मक्का उत्पादक किसानों को बेहतर दाम मिले और उत्तर प्रदेश‑बिहार जैसे राज्यों में किसानों की आय में सैकड़ों करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई.

इथेनॉल से वाहनों को नुकसान होने के दावों को गडकरी ने पूरी तरह बेबुनियाद बताया. उन्होंने कहा कि ब्राजील जैसे देशों में दशकों से 27% इथेनॉल मिश्रण के साथ वही वैश्विक कार कंपनियां काम कर रही हैं, जिनकी गाड़ियां भारत में भी चलती हैं. भारत में भी अब 100% इथेनॉल से चलने वाले दोपहिया और कार विकसित हो चुकी हैं, जिन्हें बजाज, टीवीएस, हीरो, टोयोटा, टाटा, महिंद्रा और हुंडई जैसी कंपनियों ने तैयार किया है.

अपने खिलाफ लगाए गए निजी लाभ के आरोपों पर गडकरी ने कहा कि देश में सैकड़ों इथेनॉल फैक्ट्रियां हैं और उनके परिवार का योगदान कुल उत्पादन का बेहद नगण्य हिस्सा है. इथेनॉल की खरीद पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया से होती है, जिसमें टेंडर, कैबिनेट की मंजूरी और तय कोटा शामिल होता है.

अवैध शराब से जुड़े सवालों पर उन्होंने स्पष्ट किया कि इथेनॉल एक सख्त नियंत्रित उत्पाद है और अब तक देश में एक भी मामला सामने नहीं आया है, जहां फ्यूल इथेनॉल का दुरुपयोग शराब बनाने में हुआ हो. उन्होंने कहा कि हाथ‑भट्टी शराब की समस्या इथेनॉल से अलग है और उसे किसी भी खाद्यान्न से बनाया जा सकता है. गडकरी ने जोर देते हुए कहा कि इथेनॉल नीति “वेस्ट टू वेल्थ” और “आत्मनिर्भर भारत” की दिशा में बड़ा कदम है, जिससे आयात घटेगा, प्रदूषण कम होगा, किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे और गांवों में रोजगार पैदा होगा. उनके मुताबिक, यह नीति भारत के दीर्घकालिक आर्थिक और पर्यावरणीय हित में है.

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