- नागपुर के रिटायर्ड क्लर्क से 87 लाख रुपये की ठगी
- दो अलग-अलग साइबर ठगों ने गिरफ्तारी का डर दिखाकर की ठगी
- पीड़ित ने थाने पहुंचकर दर्ज कराई एफआईआर
नागपुर: 'मनी लांड्रिंग' की जांच का दिखावा कर एक रिटायर्ड क्लर्क से लगातार फोन कॉल और व्हॉट्सएप कॉल के जरिये 87 लाख रुपये ठग लिए जाने का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यह कोई डिजिटल अरेस्ट का मामला नहीं है, बल्कि दो अलग-अलग साइबर ठगों ने बार-बार फोन और वीडियो कॉल करके और झूठे दस्तावेज भेजकर रिटायर्ड कर्मचारी को धोखा दिया.
नागपुर के भगवान नगर इलाके के 70 वर्षीय निवासी विजय सखाराम पवार एक सेवानिवृत्त लिपिक हैं. उन्हें फोन करने वालों में से एक ने अपना नाम अमित कुमार बताकर भारत सरकार के प्रोटेक्शन बोर्ड का वरिष्ठ अधिकारी होने का ढोंग रचा, तो दूसरे ने मुंबई के कोलाबा पुलिस स्टेशन में उप-निरीक्षक होने और अपना नाम संदीप राव होने का नाटक किया.
फोन पर कहा- आपके खिलाफ मनी लांड्रिंग मामले की चल रही है जांच
फोन पर उन्होंने कहा, "आपके दस्तावेजों के आधार पर मुम्बई में एक नया फोन नंबर लेकर उससे भारी गड़बड़ी की गई है. आपके नाम पर मौजूद उस नंबर के खिलाफ करीब 20 शिकायतें दर्ज हैं और इसी वजह से मनी लांड्रिंग मामले में आपकी जांच चल रही है, और गिरफ्तारी वारंट भी जारी कर दिया गया है."
सुप्रीम कोर्ट के फर्जी दस्तावेज भेजे
आरोपियों ने पवार को व्हॉट्सएप पर कथित रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के प्रमाण पत्र, साथ ही सुप्रीम कोर्ट के फर्जी दस्तावेज भेजे. इसके बाद व्हॉट्सएप कॉल के जरिए संपर्क कर पैसे जमा करने का दबाव बनाया. मनी लाँड्रिंग मामले में फंसाने की धमकी देकर 87 लाख 80 हजार 600 रुपये ठग लिए गए. यह घटना 4 से 10 अगस्त के बीच घटी. आरोपियों ने पवार को कथित भुगतान और आरटीजीएस की फर्जी रसीदें भी भेजीं, लेकिन कुछ समय बाद जब उन्हें अपने साथ हुई ठगी का अहसास हुआ तो उन्होंने अजनी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई.
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