राजस्थान के डीग जिले में पुलिस अधीक्षक (SP) शरण गोपीनाथ के नेतृत्व में पिछले कुछ समय से साइबर अपराधियों के खिलाफ 'ऑपरेशन एंटीवायरस' अभियान चलाया जा रहा है. डीग पुलिस को अब साइबर ठगों के खिलाफ एक और बड़ी कामयाबी मिली है. जिला पुलिस की विशेष टीम और जुरहरा थाना पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो पीतल के टुकड़ों को 'असली सोने की चमचमाती ईंट' बताकर ठगता था. ये ठग देश के अलग-अलग राज्यों के रईसों और सीधे-साधे लोगों को करोड़ों का चूना लगा रहे थे. पुलिस ने इस गैंग के 5 मुख्य गुर्गों को दबोचकर उनके पास से साइबर ठगी की काली कमाई के 53 लाख 39 हजार रुपये नकद, ठगी के पैसों से खरीदी गई एक शानदार हैरियर गाड़ी, 5 मोबाइल और 10 फर्जी एटीएम कार्ड बरामद किए हैं.

पुलिस ने 5 ठगों को गिरफ्तार किया है
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कॉर्पोरेट स्टाइल में ठगी
यह कोई साधारण गैंग नहीं, बल्कि एक बेहद संगठित और कॉर्पोरेट स्टाइल में चलने वाला सिंडिकेट था. पूछताछ में सामने आया है कि गैंग के हर सदस्य की भूमिका पहले से तय थी. गैंग के कुछ सदस्य फोन पर अलग-अलग राज्यों के अमीर और लालची लोगों को सस्ते दाम में सोना दिलाने का झांसा देकर जाल में फंसाते थे.
जैसे ही कोई शिकार जाल में फंसता, गैंग के अन्य सदस्य दूर-दराज के राज्यों (जैसे गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा) में जाकर असली सोने का छोटा सा टुकड़ा 'सैंपल' के तौर पर दिखाते थे. जब पार्टी करोड़ों रुपये लेकर सोने की ईंट लेने पहुंचती, तो उन्हें पीतल की पीली ईंट थमाकर रकम समेत रफूचक्कर हो जाते थे.
सेक्सटॉर्शन और 'पुराने सिक्कों' का भी था धंधा
पुलिस के अनुसार गिरोह के शातिर ठग सोने की फर्जी ईंट बेचने के अलावा, सोशल मीडिया पर महंगे दामों में पुरानी मुद्रा (एंटीक कॉइन्स और नोट) खरीदने-बेचने का फर्जी विज्ञापन भी चलाते थे. साथ ही सीधे-साधे लोगों को वीडियो कॉल के जरिए जाल में फंसाकर सेक्सटॉर्शन (ब्लैकमेलिंग) के जरिए भी मोटी रकम वसूलते थे.
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