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कैप्टन स्मित मच्छार ने बताया फ्लाइट में 'सबसे डरावनी चीज' क्या हुई थी? को-पायलट हम्मामी के बर्ताव पर भी की बात

फ्लाईदुबई की FZ1073 फ्लाइट के हीरो कैप्टन स्मित मच्छार ने एक इंटरव्यू में उस दिन के बारे में बात की है, जिस दिन को-पायलट ने उन पर हमला किया था और विमान को हाईजैक करने की कोशिश की थी.

कैप्टन स्मित मच्छार ने बताया फ्लाइट में 'सबसे डरावनी चीज' क्या हुई थी? को-पायलट हम्मामी के बर्ताव पर भी की बात
भारतीय कैप्टन स्मित मछार.
AFP

दुबई से तेल अवीव आ रही फ्लाईदुबई की FZ1073 फ्लाइट के कैप्टन स्मित मच्छार ने 'द नेशनल' को दिए इंटरव्यू में उस पल के बारे में बताया है जब उनके को-पायलट हमाम हम्मामी ने उन पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया था. 

इस हमले में कैप्टन मच्छार बुरी तरह घायल हो गए थे. वह अभी भी अबू धाबी के अस्पताल में भर्ती हैं. वहीं से उन्होंने दिए इंटरव्यू में बताया कि उनके बगल में दो घंटे तक बैठे को-पायलट के बर्ताव से ऐसा नहीं लगा था कि वह विमान को हाईजैक करने की कोशिश करने वाला है.

फ्लाईदुबई की फ्लाइट में 30 सितंबर को जो कुछ हुआ था, वह एक बहुत बड़ी दुर्घटना में बदल सकता था, अगर कैप्टन मच्छार हिम्मत नहीं दिखाते. क्योंकि अब तक की जांच में सामने आया है कि हम्मामी विमान को अपने कब्जे में लेना चाहता था और उसे इजरायल में क्रैश करना चाहता था. इस विमान में 174 यात्री सवार थे. उसका मकसद 9/11 जैसा हमला करने का था.

भारतीय कैप्टन मच्छार इसलिए हीरो हैं, क्योंकि उन्होंने अंदर से बंद कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया, जिससे हमले को नाकाम किया जा सका.

को-पायलट के बारे में क्या बताया?

अबू धाबी के अस्पताल से ही 'द नेशनल' को दिए इंटरव्यू में कैप्टन स्मित मच्छार ने बताया कि उन्हें लगा कि उनके सिर पर लगा पहला वार किसी उपकरण के गिरने से हुआ है, लेकिन इसके तुरंत बाद उन पर कई और वार किए गए.

को-पायलट हम्मामी के बारे में कहा जा रहा है कि वह इस्लामिक कट्टरपंथी और अल-कायदा की विचारधारा से प्रेरित था, लेकिन कैप्टन मच्छार का कहना है कि शुरुआत में उसके बर्ताव में कुछ भी अजीब नहीं दिखा था.

कैप्टन मच्छर को नहीं पता कि उस को-पायलट ने अचानक कंट्रोल अपने हाथ में क्यों ले लिया, जबकि तेल अवीव एयरपोर्ट - जहां वह विमान को क्रैश करना चाहता था - वहां पहुंचने में अभी एक घंटे से ज्यादा का समय था. 

कैप्टन मच्छार ने कहा कि उन्हें लगा कि उनके सिर पर जो चोट लगी है, वह कॉकपिट के किसी पैनल के गिरने की वजह से लगी है.

उन्होंने कहा, 'जब मुझे पहली बार चोट लगी... तो मुझे लगा कि विमान के ढांचे में कुछ बहुत बुरा हुआ है, और उसका कोई हिस्सा मेरे सिर पर आ गिरा है. इसकी वजह से मैं लगभग अपने कंट्रोल कॉलम पर ही गिर गया था. अगले कुछ सेकंड में, जब लगातार चोटें पड़ती रहीं, तो मुझे एहसास हुआ कि यह तो वह दूसरा व्यक्ति है, जिसके बारे में मुझे लगा था कि वह हमारी टीम का ही हिस्सा है.'

उन्होंने उन शुरुआती पलों को याद करते हुए बताया, 'मेरा पहला काम खुद को सीट बेल्ट से आजाद करना था. और मैंने वार को जितना हो सके रोकने की कोशिश की, क्योंकि ये वार सिर पर लग रहे थे.'

उन्होंने ठीक-ठाक याद नहीं है कि कॉकपिट में क्या हुआ था. लेकिन उन्होंने बताया कि जब भी वह कॉकपिट का दरवाजा खोलने के लिए जोर लगा रहे थे, तब-तब उनका खून बहने लगता और वह बेहोश हो जा रहे थे.

को-पायलट हमाम अल हम्मामी.

को-पायलट हमाम अल हम्मामी.

सबसे डरावनी चीज

उन्होंने बताया, 'तुरंत ही मेरा हाथ दरवाजा खोलने वाले हैंडल की तरफ गया. और मैं अपने साथियों को जोर-जोर से पुकारने लगा. मुझे लगता है कि उसी समय मैं बेहोश हो गया था. मैं कॉकपिट में मुंह के बल गिर पड़ा.'

उनका कहना है कि उन्हें तब होश आया जब विमान तेजी से नीचे आने लगा. दूसरी तरफ क्रू मेंबर और यात्री कॉकपिट के दरवाजा पीटने लगे.

उन्होंने कहा, 'सबसे डरावनी बात जो मैंने सुनी और महसूस की, वह थी इंजनों की आवाज का कम होना. इंजन की तेज आवाज एकदम से धीमी हो गई... और उड़ान के दौरान ऐसी बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए. मुझे महसूस हुआ कि विमान बहुत तेजी से नीचे की ओर जा रहा है.'

कैप्टन मच्छार अपनी जान बचाने की कोशिश के बारे में बताते हुए भावुक हो गए.

उन्होंने बताया, 'उस समय मुझे लगा कि अब बचना नामुमकिन है. मैं लगातार दरवाजे की तलाश कर रहा था. मैं दरवाजे की तरफ गया और उसे धक्का भी दिया... इसके बाद मुझे बस इतना याद है कि मैं मुंह के बल पड़ा हुआ था, और शुक्र है कि कॉकपिट का दरवाजा खुला हुआ था. मैं कॉकपिट और गैली (विमान के किचन वाले हिस्से) के बीच में था.'

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अफरा-तफरी और हंगामा

कैप्टन मच्छार ने बताया कि जब उन्हें कॉकपिट से बाहर निकाला गया, तो वहां 'बहुत ज्यादा अफरा-तफरी और हंगामा' था. उसी समय यात्रियों और क्रू ने को-पायलट को पकड़ लिया. फ्लाईदुबई के दो पायलट, जो यात्री के तौर पर यात्रा कर रहे थे, उन्होंने विमान का कंट्रोल अपने हाथों में ले लिया.

उन्होंने कहा, 'अगर मुझे यह बताना हो कि कितने लोग स्थिति को काबू में करने की कोशिश कर रहे थे, तो मैं कहूंगा कि लाखों लोग. मुझे पता है कि यह बात अजीब लग सकती है, लेकिन हां, मैं यही कहूंगा कि लाखों लोग कंट्रोल अपने हाथ में लेने की कोशिश कर रहे थे.'

उन्होंने उस पल को 'जादू' बताया जब बाकी लोग उनकी मदद के लिए आगे आए. उन्होंने कहा, 'मुझे बस इतना याद है कि एक यात्री ने मुझे बाहर निकाला. फिर, कुछ ही देर में, सीनियर केबिन क्रू वहां पहुंच गए और उन्होंने अपना 'जादू' दिखाया. और हां, इसी वजह से आज मैं आपसे बात कर पा रहा हूं.'

उन्हें याद है कि जब केबिन क्रू चीफ और डेंटिस्ट शोता मुसायेव समेत अन्य लोग उनके घावों से हो रहे खून को रोकने की कोशिश कर रहे थे, तब वह प्रार्थना कर रहे थे. 

बात करते हुए कैप्टन मच्छार काफी भावुक हो गए. उन्होंने कहा, 'मैंने बहुत प्रार्थना की. मैंने अपने बेटे और बेटी के बारे में सोचा और प्रार्थना की. उस वक्त मैंने तय कर लिया था कि मैं हार नहीं मानूंगा.'

उन्होंने खुलकर कहा, 'क्या मैंने हार मान ली थी? नहीं. मैं पूरे यकीन के साथ कह सकता हूं कि मैंने हार नहीं मानी. लेकिन क्या मुझे पक्का यकीन था कि मैं बच जाऊंगा? नहीं.'

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को-पायलट पर कोई शक नहीं

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें अपने को-पायलट के बर्ताव से कुछ शक हुआ, तो उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा कुछ भी महसूस नहीं हुआ.

उन्होंने बताया, 'अगर जमीन पर या कहीं और पहले से ही कोई ऐसा संकेत मिला होता, तो जाहिर है, मैं जरूर कुछ करता. मैं आवाज उठाता. मैं इस तरह की कुछ बातों पर सवाल जरूर पूछता.'

उन्होंने उस सुबह को एक आम सुबह बताया और कहा कि को-पायलट से उनकी यह पहली मुलाकात थी. उन्होंने कहा, 'यह सुबह की फ्लाइट थी. तो हां, थोड़ी-बहुत बातचीत तो हुई, लेकिन कोई गहरी बातचीत नहीं हुई.'

कैप्टन मच्छार ने आगे कहा, 'हम गहरी बातचीत करने से बचते हैं, खास तौर पर तब जब हम बहुत व्यस्त या घने एयरस्पेस से गुजर रहे हों. सऊदी का एयरस्पेस बहुत व्यस्त रहता है.'

उन्होंने कहा, 'उस समय तक ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था जिससे मुझे लगे कि 'अरे, रुको, कुछ तो गड़बड़ है.'

इस बात को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं कि जब विमान तेल अवीव हवाई अड्डे से एक घंटे की दूरी पर था, तब को-पायलट ने अपने साथी पर हमला क्यों किया. आरोप है कि वह विमान को दुर्घटनाग्रस्त करना चाहता था.

कैप्टन मच्छार ने कहा, 'मैं यह तो नहीं कहूंगा कि मैं लगातार इसी बारे में सोच रहा हूं, लेकिन हां, मैंने इस पर विचार जरूर किया है. मेरी समझ में यह बात नहीं आती.'

उन्होंने आगे कहा, 'मैं इसके लिए किसी को दोष नहीं दूंगा. आपको ऐसी घटनाओं से सीखना चाहिए... मैं बस इतना कहूंगा कि जो कुछ भी हुआ है उससे सीखें और यह सुनिश्चित करें कि ऐसा दोबारा कभी न हो.'

उन्होंने आगे कहा, 'मुझे बस इस बात की खुशी है कि मैं अपना फर्ज निभा पाया.'

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