- अमित ठाकरे ने पुणे के कॉलेज में PM मोदी की तस्वीर हटवाकर राजनीतिक विवाद की शुरुआत की थी
- 2009 में राज ठाकरे ने गुजरात जाकर नरेंद्र मोदी के प्रशासनिक मॉडल का अध्ययन किया था
- 2014 के लोकसभा चुनाव में राज ठाकरे ने बीजेपी उम्मीदवारों के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ा और मोदी की तारीफ भी की थी
मंगलवार को मुंबई के शिवाजी पार्क स्थित एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे के घर के पास बीजेपी और एमएनएस कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई. इस टकराव का कारण 31 अगस्त को पुणे के एक पॉलिटेक्निक कॉलेज में ठाकरे पुत्र अमित ठाकरे की ओर से किया गया बवाल था. अमित ठाकरे ने कॉलेज के प्रिंसिपल के दफ्तर में टंगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर अपने कार्यकर्ताओं के जरिए यह कहते हुए हटवा दी कि मोदी की तस्वीर छत्रपति शिवाजी और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जैसे महापुरुषों के बगल में नहीं लगनी चाहिए. यह घटना बीते ढाई दशकों में राज ठाकरे और मोदी के बीच रहे नरम-गरम रिश्तों में एक नया अध्याय है.
2009 में गुजरात मॉडल देखने पहुंचे थे राज ठाकरे
साल 2009 में एमएनएस ने जब पहली बार चुनाव लड़ा, तब उसके निशाने पर बीजेपी-शिवसेना गठबंधन था. लोकसभा में उसे एक भी सीट हासिल नहीं हुई, लेकिन विधानसभा चुनाव में पार्टी को 13 सीटें मिलीं. साल 2011 में ठाकरे ने यह कहकर सबको चौंका दिया कि वे मोदी मॉडल का अध्ययन करने के लिए गुजरात जाएंगे और यह देखेंगे कि क्या वैसी प्रशासनिक व्यवस्था महाराष्ट्र में लागू की जा सकती है. यह दौरा नौ दिनों का था, जिस दौरान गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने ठाकरे की जमकर खातिरदारी की और उन्हें सरकारी मेहमान का दर्जा दिया. तमाम विभागों के आला अधिकारियों के साथ ठाकरे की बैठक बुलाई गई, जिसमें हर विभाग की ओर से उन्हें प्रस्तुति दी गई. कुछ स्थानों पर मोदी खुद ठाकरे के साथ गए. दौरा खत्म करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में ठाकरे ने कहा कि वे गुजरात की मोदी सरकार से बेहद प्रभावित हैं और नरेंद्र मोदी को देश का प्रधानमंत्री बनना चाहिए.
2014 में भी पीएम मोदी की कई बार की तारीफ
2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान मोदी और राज ठाकरे के बीच अच्छे रिश्ते बरकरार रहे. उस साल भी शिवसेना और बीजेपी ने गठबंधन में चुनाव लड़ा था. अपने चचेरे भाई उद्धव ठाकरे से सियासी अदावत के चलते राज ठाकरे ने शिवसेना उम्मीदवारों के खिलाफ तो अपने प्रत्याशी उतारे, लेकिन जहां-जहां बीजेपी के उम्मीदवार थे, वहां उन्होंने एमएनएस का उम्मीदवार नहीं खड़ा किया. चुनावी दौर के दौरान उन्होंने मोदी की तारीफ में कुछ बयान भी दिए. हालांकि, पांच साल पूरे होते-होते ठाकरे और मोदी के रिश्तों में खटास आ गई.
2019 का लोकसभा चुनाव राज ठाकरे की पार्टी ने नहीं लड़ा, लेकिन उन्होंने मोदी के खिलाफ एक अभियान की शुरुआत कर दी, जिसका फायदा कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन ने उठाने की कोशिश की. ठाकरे अपनी चुनावी सभाओं में एक बड़ी स्क्रीन लगवाते और उस पर मोदी के पुराने बयानों को दिखाते हुए यह बताते कि मोदी की कथनी और करनी में कितना फर्क है. ऐसी सभाओं में वे श्रोताओं से भारत को मोदी मुक्त करने की अपील भी करते. ये सभाएं "लाव रे तो वीडियो" (वो वीडियो लगा तो रे...) नाम से मशहूर हो गई थीं. इसके कुछ महीनों बाद राज ठाकरे को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से समन आता है. एक पुराने मामले में उन्हें ईडी कार्यालय बुलाकर करीब आठ घंटे तक पूछताछ की जाती है, जिसके बाद से राज ठाकरे कभी मोदी के खिलाफ बोलते नजर नहीं आते.
साल 2020 की शुरुआत में राज ठाकरे फिर एक बार सभी को चौंका देते हैं, जब वे अपनी पार्टी का झंडा बदल देते हैं और पार्टी की विचारधारा के रूप में हिंदुत्व अपनाने का ऐलान करते हैं. नया भगवा ध्वज प्रदर्शित करते हुए ठाकरे ने कहा कि हिंदुत्व उनके डीएनए में है. दरअसल, राज ठाकरे समझ गए थे कि मराठीवाद के मुद्दे से उनकी पार्टी का विस्तार नहीं हो रहा था. परप्रांतीय विरोध के कारण वे बाकी पार्टियों के लिए सियासी तौर पर अछूत बन गए थे, क्योंकि अन्य दलों को लगता था कि यदि वे महाराष्ट्र में ठाकरे से गठजोड़ करेंगे तो उत्तर प्रदेश और बिहार में उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है. हिंदुत्व अपनाने के बाद राज ठाकरे के लिए भगवा गठबंधन से जुड़ने का रास्ता खुल गया.
अप्रैल 2024 में लोकसभा चुनाव की हलचल के बीच सालाना गुड़ी पड़वा रैली में राज ठाकरे ने ऐलान किया कि वे नरेंद्र मोदी की खातिर बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी के गठबंधन को बिना शर्त समर्थन दे रहे हैं. हालांकि राज ठाकरे की पार्टी ने लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन उनके बयान से लगा कि वे राज्य में महायुति का हिस्सा होंगे. लेकिन 2025 में उन्होंने फिर अलग रुख अपनाया. उन्होंने अपने चचेरे भाई उद्धव ठाकरे की पार्टी से हाथ मिला लिया, जिनके साथ बीते 20 वर्षों से उनकी अदावत चल रही थी. इस साल दोनों भाइयों की पार्टियों ने साथ मिलकर मुंबई महानगरपालिका का चुनाव लड़ा.
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