- महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों में कई प्रत्याशी निर्विरोध चुने गए हैं, जिसे MNS ने लोकतंत्र के लिए खतरा बताया है.
- MNS नेता अविनाश जाधव ने कहा कि इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर जांच की मांग की जाएगी.
- जाधव का आरोप है कि प्रत्याशियों को दबाव, धमकी और पैसों का लालच देकर नाम वापस लेने के लिए मजबूर किया गया.
महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. बड़ी संख्या में प्रत्याशियों के निर्विरोध निर्वाचित होने को लेकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने गंभीर सवाल खड़े करते हुए इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया है. MNS नेता अविनाश जाधव इस मामले को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करेंगे, जिसमें इन मामलों की न्यायिक जांच की मांग की जाएगी. अविनाश जाधव ने कहा कि नगर निगम चुनावों में निर्विरोध चुने गए प्रत्याशियों के मामलों की जांच या तो किसी सेवानिवृत्त हाई कोर्ट जज से कराई जाए या फिर सीधे हाई कोर्ट की निगरानी में हो. साथ ही उन्होंने कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं होती है, तब तक इन प्रत्याशियों को विजेता घोषित नहीं किया जाए.
जाधव का दावा है कि MNS के पास पर्याप्त सबूत हैं, जो यह दर्शाते हैं कि कई प्रत्याशियों पर चुनाव से नाम वापस लेने के लिए दबाव बनाया गया, धमकाया गया और पैसों का लालच भी दिया गया. उन्होंने कहा, “हमारे पास ठोस प्रमाण हैं, जिन्हें हम कोर्ट के सामने पेश करेंगे.”
अधिकारियों की भूमिका पर भी उठाए सवाल
MNS ने इस पूरे मामले में रिटर्निंग ऑफिसर (RO) और जिला कलेक्टरों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं. अविनाश जाधव का आरोप है कि इन अधिकारियों ने सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के प्रत्याशियों का पक्ष लिया है, जिसके चलते राज्य चुनाव आयोग की रिपोर्ट पर भी भरोसा नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा, “जब प्रशासनिक मशीनरी ही पक्षपाती हो, तो लोकतंत्र कैसे बचेगा? इसीलिए अदालत का हस्तक्षेप जरूरी है.”
राज्यभर में करीब 70 प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं, जिनमें से अधिकांश महायुति गठबंधन से जुड़े बताए जा रहे हैं. हालांकि राज्य चुनाव आयुक्त ने इन मामलों में रिपोर्ट तलब की है, लेकिन विपक्षी दल इसे नाकाफी बता रहे हैं.
MNS का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही राज्य चुनाव आयुक्त दिनेश वाघमारे से मुलाकात कर इस मुद्दे पर औपचारिक शिकायत दर्ज कराएगा और निष्पक्ष जांच की मांग करेगा.
ऐसी चुनावी प्रक्रिया मैंने कभी नहीं देखी: राज ठाकरे
MNS अध्यक्ष राज ठाकरे ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. राज ठाकरे ने कहा था, “अपने पूरे राजनीतिक जीवन में ऐसी चुनावी प्रक्रिया मैंने कभी नहीं देखी. बालासाहेब ठाकरे के साथ कई चुनाव देखे, लेकिन एक ही चुनाव में 60 से अधिक उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना, यह स्थिति पहली बार देख रहा हूं.”
विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार और राज्य चुनाव आयोग को घेरते हुए आरोप लगाया है कि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं. उनका कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो जनता का लोकतांत्रिक प्रक्रिया से भरोसा उठ सकता है.
MNS का कहना है कि यह लड़ाई किसी एक पार्टी के खिलाफ नहीं, बल्कि लोकतंत्र को बचाने के लिए है.
अब सबकी निगाहें बॉम्बे हाईकोर्ट और राज्य चुनाव आयोग पर टिकी हैं कि इस गंभीर मुद्दे पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं.
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