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This Article is From Feb 20, 2026

'जरूरत पड़ी तो BMC के अधिकारियों पर भी होगी कार्रवाई,' कोलाबा में नेवी के स्टेशन के पास बन रही इमारतों को लेकर बॉम्बे HC की सख्त टिप्पणी

अदालत ने निर्माण पर लगी अंतरिम रोक को बढ़ाने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि डेवलपर निर्धारित ऊंचाई (53.07 मीटर) से ऊपर का निर्माण अपने जोखिम पर करेगा. यदि भविष्य में कोर्ट इस नतीजे पर पहुंचता है कि NOC अनिवार्य थी, तो 53 मीटर से ऊपर की पूरी इमारत को गिराने का आदेश दिया जा सकता है.

'जरूरत पड़ी तो BMC के अधिकारियों पर भी होगी कार्रवाई,' कोलाबा में नेवी के स्टेशन के पास बन रही इमारतों को लेकर बॉम्बे HC की सख्त टिप्पणी
आईएनएस शिकरा के पास नई इमारतों के निर्माण पर बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त
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  • बॉम्बे HC ने कोलाबा में INS Shikra के पास बन रही ऊंची इमारत पर नौसेना की इंटेलिजेंस की विफलता को दर्शाया है
  • नौसेना ने इस बिल्डिंग को गैरकानूनी बताया है क्योंकि यह सुरक्षा मानकों का उल्लंघन किया है
  • अदालत ने आदेश दिया है कि याचिका के अंतिम निपटारे तक वह थर्ड पार्टी राइट्स न बनाए और फ्लैट बेचने से बचे
मुंबई:

दक्षिण मुंबई के कोलाबा इलाके में नेवी के प्रतिष्ठित एयर स्टेशन INS Shikra के पास बन रही 20 से अधिक मंज़िला इमारत को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है. अदालत ने सुनवाई के दौरान “कोलाबा में नेवल इंटेलिजेंस की विफलता” (failure of Naval Intelligence at Colaba) का उल्लेख किया और साथ ही बिल्डर को बड़ा झटका देते हुए निर्देश दिया है कि याचिका के अंतिम निपटारे तक वह किसी भी तरह के थर्ड पार्टी राइट्स (तीसरे पक्ष के अधिकार) न बनाए.यह मामला नेवी की लोकल मिलिट्री अथॉरिटी (Local Military Authority) की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है. नेवी का आरोप है कि INS Shikra के बेहद करीब बन रही यह ऊंची इमारत “गैरकानूनी और अनधिकृत” तरीके से खड़ी की जा रही है, जो सुरक्षा मानकों का उल्लंघन है और संवेदनशील रक्षा प्रतिष्ठान के लिए खतरा बन सकती है.

हाई कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि यह पाया गया कि BMC ने बिना जरूरी NOC के निर्माण की अनुमति देने में लापरवाही बरती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी. अदालत ने निर्माण पर लगी अंतरिम रोक को बढ़ाने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि डेवलपर निर्धारित ऊंचाई (53.07 मीटर) से ऊपर का निर्माण अपने जोखिम पर करेगा. यदि भविष्य में कोर्ट इस नतीजे पर पहुँचता है कि NOC अनिवार्य थी, तो 53 मीटर से ऊपर की पूरी इमारत को गिराने का आदेश दिया जा सकता है.इस मामले की अंतिम सुनवाई 30 मार्च को तय की गई है.

क्या है नेवी की आपत्ति?

नेवी का कहना है कि जिस जगह पर यह इमारत बनाई जा रही है, वह रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील क्षेत्र है. INS Shikra भारतीय नौसेना का अहम एयर स्टेशन है, जहां से हेलिकॉप्टर ऑपरेशंस संचालित होते हैं. ऐसे में उसके आसपास ऊंची इमारत का निर्माण सुरक्षा, निगरानी और ऑपरेशनल गतिविधियों पर असर डाल सकता है.इस याचिका में यह भी कहा गया है कि निर्माण कार्य संबंधित नियमों और सुरक्षा मंज़ूरियों का पालन किए बिना आगे बढ़ाया गया है. इसी आधार पर निर्माण को अवैध और अनधिकृत बताया गया है. 

हाई कोर्ट ने की सख्स टिप्पणी

सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस मामले में सख्त टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा है कि कोलाबा जैसे संवेदनशील इलाके में यदि इतनी बड़ी इमारत खड़ी हो रही है, तो यह नेवल इंटेलिजेंस की विफलता को दर्शाता है. अदालत ने फिलहाल निर्माण को पूरी तरह रोकने का आदेश नहीं दिया है, लेकिन साफ कर दिया है कि अंतिम सुनवाई तक बिल्डर फ्लैट बेचकर या किसी समझौते के जरिए तीसरे पक्ष के अधिकार नहीं बना सकता.अदालत का यह आदेश इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अगर बिल्डर थर्ड पार्टी राइट्स बना देता,तो बाद में कानूनी स्थिति और जटिल हो सकती थी.

अब आगे और क्या होगा?

अब इस मामले की अगली सुनवाई में कोर्ट यह तय करेगा कि निर्माण को जारी रखने की अनुमति दी जाए या उस पर रोक लगे। साथ ही यह भी देखा जाएगा. ताकि क्या वाकई नियमों का उल्लंघन हुआ है और क्या सुरक्षा मानकों को दरकिनार किया गया.बॉम्बे हाई कोर्ट ने दक्षिण मुंबई में नौसेना के प्रमुख एयर स्टेशन INS शिक्रा के पास एक ऊंची इमारत के निर्माण को लेकर भारतीय नौसेना को कड़ी फटकार लगाई है. अदालत ने इसे नौसेना की "इंटेलिजेंस और सुरक्षा की बड़ी चूक" करार दिया है.

अदालत की सख्त टिप्पणी

जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस अभय मंत्री की पीठ ने हैरानी जताते हुए कहा कि नौसेना के अधिकारी अपने दफ्तरों में बैठे रहे और उनकी नाक के नीचे एक गगनचुंबी इमारत खड़ी हो गई.कोर्ट ने कहा कि हमें आश्चर्य है कि नौसेना इतने सालों से बन रही इतनी ऊंची इमारत को देखने में कैसे विफल रही? यह केवल नौसेना अधिकारियों की ओर से इंटेलिजेंस की विफलता मानी जा सकती है. 

क्या है पूरा विवाद?

नौसेना के वकील ने तर्क दिया कि अन्य इमारतें 2011 से पहले की हैं। 2011 में रक्षा मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी की थी, जिसके तहत रक्षा प्रतिष्ठानों के पास ऊंची इमारतों के लिए NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) अनिवार्य कर दिया गया था. डेवलपर की ओर से वरिष्ठ वकील जनक द्वारकादास ने दलील दी कि इमारत को 'कमेंसमेंट सर्टिफिकेट' मार्च 2011 में मिला था, जो रक्षा मंत्रालय की अधिसूचना से महीनों पहले का है, इसलिए उन्हें किसी रक्षा NOC की जरूरत नहीं थी.हाईकोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि यह पाया गया कि BMC ने बिना जरूरी NOC के निर्माण की अनुमति देने में लापरवाही बरती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी.अदालत ने निर्माण पर लगी अंतरिम रोक को बढ़ाने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि डेवलपर निर्धारित ऊंचाई (53.07 मीटर) से ऊपर का निर्माण अपने जोखिम पर करेगा. यदि भविष्य में कोर्ट इस नतीजे पर पहुंचता है कि NOC अनिवार्य थी, तो 53 मीटर से ऊपर की पूरी इमारत को गिराने का आदेश दिया जा सकता है. इस मामले की अंतिम सुनवाई 30 मार्च को तय की गई है. 

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Bombay High Court, INS Shikra
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