महाराष्ट्र सरकार ने बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है. अब ₹500 करोड़ या उससे अधिक लागत वाली परियोजनाओं की निविदाओं में भाग लेने वाले ठेकेदारों का मूल्यांकन केवल उनकी तकनीकी और वित्तीय क्षमता के आधार पर नहीं किया जाएगा, बल्कि उनके पिछले और वर्तमान कार्य प्रदर्शन को भी प्रमुख आधार बनाया जाएगा. लोक निर्माण विभाग ने इसके लिए नई परफॉर्मेंस रेटिंग व्यवस्था लागू करने का शासन निर्णय जारी किया है.
अब काम का रिकॉर्ड भी बनेगा चयन का आधार
अब तक अधिकतर मामलों में ठेकेदारों की तकनीकी योग्यता और वित्तीय स्थिति को ही प्राथमिकता मिलती थी. नई व्यवस्था के तहत परियोजनाओं में किए गए वास्तविक कार्य, गुणवत्ता मानकों का पालन, समयसीमा के प्रति प्रतिबद्धता, सुरक्षा नियमों का अनुपालन और परियोजना प्रबंधन की क्षमता का भी मूल्यांकन होगा. सरकार का उद्देश्य केवल परियोजनाओं को समय पर पूरा कराना नहीं बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि निर्माण कार्य सुरक्षित, टिकाऊ और पारदर्शी तरीके से पूरे हों.
किन परियोजनाओं पर लागू होगी नई व्यवस्था
यह नई प्रणाली ₹500 करोड़ या उससे अधिक अनुमानित लागत अथवा निविदा मूल्य वाली आगामी परियोजनाओं पर लागू होगी. इसके दायरे में लोक निर्माण विभाग के अलावा एमएसआरडीसी, एमएमआरडीए, सिडको, जल संसाधन विभाग, महा-मेट्रो, म्हाडा, नगर विकास विभाग, ग्राम विकास विभाग, सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग, आदिवासी विकास विभाग तथा स्थानीय निकाय और महानगरपालिकाएं भी शामिल होंगी.
परफॉर्मेंस सर्टिफिकेट होगा जरूरी
ऐसी परियोजनाओं के लिए निविदा दाखिल करने वाले ठेकेदारों को अपनी पूर्व या वर्तमान पात्र परियोजनाओं के वैध परफॉर्मेंस सर्टिफिकेट जमा करने होंगे. यह प्रमाणपत्र मुख्य अभियंता या समकक्ष स्तर से नीचे के अधिकारी द्वारा जारी नहीं किया जा सकेगा. सर्टिफिकेट में परियोजना की प्रगति, देरी होने के कारण, समयसीमा का पालन, कार्य गुणवत्ता, गुणवत्ता नियंत्रण मानकों के पालन और ठेकेदार के समग्र प्रदर्शन का विवरण दर्ज रहेगा. इसकी वैधता 12 माह होगी. वैध प्रमाणपत्र नहीं होने पर संबंधित परियोजना तकनीकी पात्रता के लिए स्वीकार नहीं की जाएगी.
100 अंकों की होगी पूरी रेटिंग
नई व्यवस्था में प्रत्येक पात्र परियोजना का मूल्यांकन 100 अंकों के आधार पर किया जाएगा. समय पर काम पूरा करने के लिए 30 अंक निर्धारित किए गए हैं. कार्य की गुणवत्ता को सबसे अधिक महत्व देते हुए 60 अंक दिए गए हैं जबकि रखरखाव अवधि में प्रदर्शन या जारी परियोजना के समग्र प्रदर्शन के लिए 10 अंक तय किए गए हैं. गुणवत्ता मूल्यांकन में स्वीकृत स्पेसिफिकेशन, क्वालिटी एश्योरेंस प्लान, परीक्षण रिपोर्ट, एनसीआर निपटान और संरचनात्मक गुणवत्ता जैसे पहलू शामिल होंगे.
ग्रीन, येलो और रेड कैटेगरी में होगा वर्गीकरण
सभी पात्र परियोजनाओं के अंकों का वेटेड औसत निकालकर अंतिम रेटिंग तय की जाएगी. 80 से अधिक अंक पाने वाले ठेकेदार ग्रीन कैटेगरी में रखे जाएंगे. 60 से अधिक लेकिन 80 से कम अंक मिलने पर येलो कैटेगरी मिलेगी जबकि 60 से कम अंक पाने वाले ठेकेदार रेड कैटेगरी में जाएंगे. ग्रीन कैटेगरी के ठेकेदारों पर सामान्य निविदा शर्तें लागू होंगी. येलो कैटेगरी के ठेकेदारों को 1.10 गुना अतिरिक्त परफॉर्मेंस सिक्योरिटी देनी होगी. वहीं रेड कैटेगरी में आने वाले ठेकेदार निविदा प्रक्रिया के लिए अपात्र माने जाएंगे.
साक्ष्यों के आधार पर होगा मूल्यांकन
सरकार ने स्पष्ट किया है कि ठेकेदारों का आकलन केवल राय पर नहीं बल्कि सत्यापन योग्य रिकॉर्ड के आधार पर होगा. इसके लिए मासिक प्रगति रिपोर्ट, गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट, एनसीआर रजिस्टर, साइट निरीक्षण रिपोर्ट, स्वतंत्र इंजीनियरों की रिपोर्ट, समीक्षा बैठक रिकॉर्ड, कंप्लीशन सर्टिफिकेट, पीएमआईएस डेटा और डिजिटल निर्माण रिकॉर्ड का उपयोग किया जाएगा.
सार्वजनिक धन की सुरक्षा पर भी जोर
लोक निर्माण मंत्री शिवेंद्रसिंहराजे भोसले ने कहा कि बड़ी परियोजनाओं का केवल समय पर पूरा होना पर्याप्त नहीं है. परियोजनाएं गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित, टिकाऊ और पारदर्शी तरीके से पूरी होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था से अच्छे प्रदर्शन करने वाले ठेकेदारों को प्रोत्साहन मिलेगा जबकि लगातार खराब प्रदर्शन करने वालों पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सकेगा. इससे सार्वजनिक धन का बेहतर उपयोग होगा और राज्य में बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता को नई मजबूती मिलेगी.
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