- महाराष्ट्र विधानसभा में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक पर चर्चा के दौरान NCP विधायक जितेंद्र आव्हाड के बयान से विवाद
- आव्हाड ने छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक को सामाजिक दर्जे के कारण वंचित रखने का विवादित दावा किया
- सत्तापक्ष के विधायकों ने आव्हाड के बयान को शिवाजी महाराज का अपमान करार देते हुए माफी और कार्रवाई की मांग की
महाराष्ट्र विधानसभा में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान सोमवार को भारी हंगामा देखने को मिला. NCP (SP) के विधायक जितेंद्र आव्हाड द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक से जुड़ा एक विवादित ऐतिहासिक दावा करने के बाद सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई.
आव्हाड के बयान से भड़का विवाद
विधानसभा में चर्चा के दौरान आव्हाड ने दावा किया कि छत्रपति शिवाजी महाराज को उनके सामाजिक दर्जे के कारण शुरुआत में राज्याभिषेक से वंचित रखा गया था. उन्होंने यह भी कहा कि मराठा शासक के माथे पर कुमकुम तिलक पैर के अंगूठे से लगाया गया था. आव्हाड के इस बयान के बाद सत्तारूढ़ गठबंधन के विधायकों ने तीखी आपत्ति जताई और सदन में जोरदार विरोध शुरू हो गया. कई विधायकों ने इसे छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान बताते हुए तुरंत माफी और कार्रवाई की मांग की.
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मंत्री शंभूराज देसाई ने उठाए सवाल
कैबिनेट मंत्री शंभूराज देसाई ने आव्हाड के दावों की ऐतिहासिक प्रामाणिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे संदर्भों का कोई ठोस आधार नहीं है। इसके बाद सदन में माहौल और गरमा गया और सत्ता पक्ष के विधायकों ने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी.
स्पीकर को करनी पड़ी दखलअंदाजी
सदन में बढ़ते हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर को हस्तक्षेप करना पड़ा. उन्होंने सभी सदस्यों से गंभीरता के साथ चर्चा करने की अपील की और कहा कि आराध्य दैवत छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में कोई भी विवादित बयान नहीं दिया जाना चाहिए. नार्वेकर ने आव्हाड से कहा कि यदि उनके शब्दों से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वे सदन में दिलगिरी व्यक्त करें.
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पहले शब्द वापस, फिर मांगी माफी
विवाद बढ़ने पर आव्हाड ने शुरुआत में कहा कि यदि उनके बयान से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वे अपने शब्द वापस लेते हैं. हालांकि सत्तापक्ष के विधायकों ने इसे पर्याप्त नहीं मानते हुए उनसे स्पष्ट माफी की मांग की. स्थिति तब शांत हुई जब विधानसभा अध्यक्ष ने आव्हाड को औपचारिक रूप से दिलगिरी व्यक्त करने का निर्देश दिया. इसके बाद आव्हाड ने सदन में कहा कि वे अपने बयान के लिए खेद व्यक्त करते हैं और माफी मांगते हैं.
बयान रिकॉर्ड से हटाया गया
स्पीकर राहुल नार्वेकर ने आव्हाड की विवादित टिप्पणी को सदन की कार्यवाही से हटाने का आदेश भी दिया. साथ ही उन्होंने आव्हाड को चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में इस तरह के विवादित बयान देने से बचें, अन्यथा कड़ी कार्रवाई और निलंबन भी किया जा सकता है.
निलंबन की मांग भी उठी
इस दौरान मंत्री दादा भुसे, विधायक नितेश राणे और योगेश सागर समेत कई सत्तापक्ष के नेताओं ने आव्हाड के खिलाफ निलंबन की मांग की. उनका कहना था कि शिवाजी महाराज के बारे में इस तरह की टिप्पणी महाराष्ट्र की भावनाओं को ठेस पहुंचाती है और इसे सहन नहीं किया जा सकता. हालांकि आव्हाड की माफी के बाद फिलहाल मामला शांत हो गया और विधानसभा की कार्यवाही आगे बढ़ाई गई.
धर्म स्वातंत्र्य विधेयक पर चल रही थी चर्चा
यह पूरा विवाद उस समय हुआ जब सदन में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 पर चर्चा चल रही थी. यह विधेयक कथित रूप से जबरन या प्रलोभन देकर किए जाने वाले धर्मांतरण को रोकने के उद्देश्य से लाया गया है. राजनीतिक हलकों में इस घटना को लेकर बहस जारी है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और गरमा सकता है.
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